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समंदर में चीन की बढ़ती हुई ताकत को थामेगा INS विक्रांत?

हिन्द महासागर में चीन (China) की बढ़ती हुई ताकत का मुकाबला करने के लिए भारत (India) को अपना पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) मिल गया है. ये समंदर में न सिर्फ हमारी नौ सेना की ताकत बढ़ायेगा बल्कि स्वदेशी तकनीक से बने विक्रांत को देखकर दुश्मन सेना भी कुछ हद तक तो रंज खाने पर मजबूर होगी. इसके साथ ही भारत अब एलीट क्‍लब में शामिल हो गया है.

आईएनएस विक्रांत के सेवा में आने से भारत अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन और फ्रांस जैसे उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो जाएगा जिनके पास स्वदेशी रूप से डिजाइन करने और एक विमान वाहक बनाने की अपनी क्षमता है. कई खूबियों वाले इस युद्धपोत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कोच्चि में देश को समर्पित करते हुए इसे भारत की ऐसी ताकत बताया, जो युद्धपोत से ज्यादा एक तैरता हुआ शहर है.

बता दें कि 43 हजार टन वजनी ये जहाज एयरक्राफ्ट कैरियर है, जो पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से बना है. INS विक्रांत की 76% चीजें भारत में बनीं हैं. इसमें 2200 कंपार्टमेंट हैं और एक बार में 1600 से ज्यादा नौसैनिक रह सकते हैं. इसके निर्माण पर करीब 22 हजार करोड़ रुपये की लागत आई है. INS विक्रांत के आने से हिंद महासागर में भारत की ताकत और बढ़ गई है. पीएम मोदी के मुताबिक INS विक्रांत के हर भाग की अपनी एक खूबी है, एक ताकत है, अपनी एक विकासयात्रा भी है. ये स्वदेशी सामर्थ्य, स्वदेशी संसाधन और स्वदेशी कौशल का प्रतीक है.

दरअसल, समंदर में ताकत बढ़ाने के लिए एयरक्राफ्ट कैरियर सबसे अहम हथियारों में से एक है. आईएनएस विक्रांत मिलने के बाद भारत के पास अब दो एयरक्राफ्ट कैरियर हो गए हैं. ये कैरियर इसलिए भी अहम है क्योंकि ये न सिर्फ समंदर में बेड़ों की सुरक्षा कर सकता है, बल्कि इससे हथियार दागे जा सकते हैं और लड़ाकू विमानों के साथ-साथ हेलिकॉप्टर भी तैनात किए जा सकते हैं. वैसे दुनिया में सबसे ज्यादा 11 एयरक्राफ्ट कैरियर अमेरिका के पास हैं.

वहीं, रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन और पाकिस्तान की चुनौतियों से निपटने के लिए भारत को अभी भी कम से कम एक और एयरक्राफ्ट कैरियर की जरूरत है. वैसे पाकिस्तान के पास फिलहाल ऐसा एक भी एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं है. विशेषज्ञों के मुताबिक हिंद महासगार में चीन का मुकाबला करने के लिए भारत को अपनी सैन्य क्षमता को अभी और बढ़ाना होगा. चीन-म्यांमार संबंधों पर नजर रखने वाले एक विशेषज्ञ ने हाल ही में न्यूज एजेंसी को बताया था कि चीन-म्यांमार इकोनॉमिक कॉरिडोर (CMEC) के जरिए चीन की पहुंच म्यांमार के क्युकफ्यु (Kyaukphyu) बंदरगाह तक हो जाएगी. उस सूरत में चीन हमारे लिए और बड़ा खतरा बन जायेगा.

हालांकि पीएम मोदी ने आईएनएस विक्रांत की खूबियां गिनाते हुए कहा है कि यह युद्धपोत से ज्‍यादा तैरता हुआ एयरफील्‍ड है, यह तैरता हुआ शहर है. इसमें जितनी बिजली पैदा होती है उससे 5,000 घरों को रौशन किया जा सकता है. इसका फ्लाइंग डेक भी दो फुटबॉल फील्‍ड से बड़ा है. इसमें जितने तार इस्तेमाल हुए हैं वह कोचीन से काशी तक पहुंच सकते हैं.

नौसेना के वाइस चीफ वाइस एडमिरल एसएन घोरमाडे के मुताबिक INS विक्रांत के आने से हिंद-प्रशांत और हिंद महासागर में शांति और स्थिरता बढ़ेगी. उन्होंने बताया कि INS विक्रांत पर एयक्राफ्ट का लैंडिंग ट्रायल नवंबर में शुरू होगा और 2023 के मध्य तक ये पूरा हो जाएगा, लेकिन इस मौके पर पीएम मोदी ने एक अहम घोषणा भी की है .उनके मुताबिक विक्रांत जब हमारे समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा के लिए उतरेगा, तो उस पर नौसेना की अनेक महिला सैनिक भी तैनात रहेंगी. समंदर की अथाह शक्ति के साथ असीम महिला शक्ति, ये नए भारत की बुलंद पहचान बन रही है.

अब इंडियन नेवी (Indian Navy) ने अपनी सभी शाखाओं को महिलाओं के लिए खोलने का फैसला किया है और जो पाबंदियों थीं, वो अब हट रही हैं. जैसे समर्थ लहरों के लिए कोई दायरे नहीं होते, वैसे ही भारत की बेटियों के लिए भी अब कोई दायरे या बंधन नहीं होंगे. सामरिक रणनीति के जानकार मानते हैं कि आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) के आने से बेशक चीन (China) की समुद्री ताकत तो कम नहीं होगी, लेकिन ये उस पर मनोवैज्ञानिक असर डालने में काफी हद तक कारगर साबित होगा. 

(नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.) 

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