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आखिर अमेरिका ने क्यों लिया AUKUS से भारत को बाहर रखने का फैसला ?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वाशिंगटन पहुंचने से ठीक पहले अमेरिका ने भारत को लेकर एक बड़े फ़ैसले का ऐलान किया है,जो थोड़ा हैरान करने वाला है.अमेरिका ने भारत या जापान को ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के साथ हाल ही में हुए इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में ऑकस (AUKUS) रक्षा समझौते में जोड़ने से इंकार कर दिया है. वैश्विक कूटनीति के क्षेत्र में इसे भारत के लिए एक झटका माना जा रहा है, खासकर ऐसे वक्त में जबकि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका की धरती पर हैं.

गौरतलब है कि 15 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने त्रिपक्षीय सुरक्षा गठबंधन ऑकस की घोषणा की थी. इसी के तहत ऑस्ट्रेलिया को परमाणु-संचालित पनडुब्बियों का एक बेड़ा भी मिलेगा. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने बुधवार को कहा, "पिछले हफ्ते हुई ऑकस की घोषणा में ऐसा कोई संकेत नहीं था कि इसमें कोई और देश भी शामिल हो सकता है. राष्ट्रपति बाइडन ने यही संदेश फ़्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों को भी भेजा था. इंडो-पैसेफ़िक क्षेत्र की सिक्यूरिटी में किसी और देश को सम्मिलित नहीं किया जाएगा."

हालांकि, फ्रांस ने इस गठबंधन से, उसे अलग रखने की आलोचना की थी. व्हाइट हाउस प्रवक्ता ने आगे कहा, "बेशक, यह फ्रांस के साथ बातचीत में एक महत्वपूर्ण विषय है." प्रवक्ता से सवाल किया गया था कि क्या भारत और जापान इस नए रक्षा समूह का हिस्सा होंगे क्योंकि भारत और जापान के नेता पहले ही क्वाड सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका में हैं.लेकिन प्रवक्ता ने अपने जवाब में ऐसी किसी भी संभावना से साफ इंकार कर दिया.

दरअसल, ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि क्वाड सम्मेलन के बहाने ही सही अमेरिका इस नए समूह में भारत व जापान को भी शामिल कर सकता है. क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं. अमेरिका 24 सितंबर को वॉशिंगटन में होने वाले क्वाड सम्मेलन की मेज़बानी कर रहा है.

हालांकि, अमेरिका के इस फैसले की औपचारिक घोषणा से पहले ही विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला से भी मंगलवार को इस बारे में सवाल पूछा गया था कि AUKUS में भारत को शामिल न किये जाने को आखिर क्या समझा जाये, तो उन्होंने कहा था कि अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया का नया सुरक्षा समझौता न तो क्वाड से संबंधित है और न ही समझौते के कारण इसके कामकाज पर कोई प्रभाव पड़ेगा. जाहिर है कि दोनों समूहों के मकसद अलग-अलग हैं. क्योंकि ऑकस (ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका) तीन देशों के बीच का एक सुरक्षा गठबंधन है, जबकि क्वाड एक मुक्त, खुले, पारदर्शी और समावेशी हिंद-प्रशांत के दृष्टिकोण के साथ एक बहुपक्षीय समूह है.

यहां ये बताना जरुरी है कि ऑकस समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया को अमेरिका और ब्रिटेन से परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां बनाने की तकनीक मिलेगी. इसकी खास वजह भी है क्योंकि चीन ने पिछले कुछ अरसे से दक्षिण चीन सागर में बेहद आक्रामक तरीके से अपनी सक्रियता बढ़ाई है, जिसे ऑस्ट्रेलिया भी अपने लिए एक बड़े खतरे के रूप में देख रहा है. यही कारण है कि वैश्विक कूटनीति के विशेषज्ञ  इस गठबंधन को दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती आक्रामता का मुकाबला करने के एक कारगर प्रयास के तौर पर दख रहे हैं.

नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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