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टेस्ट सीरीज में मिली धाकड़ जीत में उमेश यादव के प्रदर्शन पर चर्चा भी है जरूरी

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत की जीत में तेज गेंदबाजों का रोल अहम है. भारतीय तेज गेंदबाजों की टोली में उमेश यादव के लिए ये सीरीज काफी अहम रही.

विशाखापत्तनम टेस्ट मैच के बाद विराट कोहली ने एक बड़ा फैसला लिया. जीत के बाद भी उन्होंने हनुमा विहारी को प्लेइंग 11 से बाहर बिठाया. अमूमन जीत के बाद प्लेइंग 11 में बदलाव करने से पहले कोई भी कप्तान दस बार सोचता है. लेकिन विराट ऐसे जोखिम उठाने में माहिर हैं. हाल के दिनों में तो वो ये भी कह चुके हैं कि अगर कोई खिलाड़ी प्लेइंग 11 से बाहर किया जाता है तो उसे उसकी वजह पता होती है.

खैर, पुणे टेस्ट के लिए विराट कोहली हनुमा विहारी की जगह उमेश यादव को प्लेइंग 11 में लेकर आए. उमेश करीब 10 महीने बाद टेस्ट टीम में शामिल किए गए थे. साल 2019 में वो पहला टेस्ट मैच खेल रहे थे. उन्होंने पुणे टेस्ट मैच की दोनों पारियों में 3-3 विकेट लिए. इसमें भी पहली पारी में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के तीनों टॉप बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा. इसमें डेन एल्गर, मार्करम और ब्रुइन शामिल थे.

इसके बाद रांची टेस्ट मैच की बारी आई. उमेश यादव को फिर प्लेइंग 11 में मौका दिया गया. रांची टेस्ट की पहली पारी में उमेश यादव ने 3 और दूसरी पारी में 2 विकेट लिए. सीरीज में कुल मिलाकर उन्होंने 11 विकेट लिए. उमेश यादव के इस प्रदर्शन के बाद हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है. उमेश यादव ने टेस्ट सीरीज के दोनों मैचों में मोहम्मद शमी के साथ मिलकर अफ्रीकी बल्लेबाजों को परेशान किया. इस सीरीज का उनके लिए बड़ा फायदा ये है कि अब टीम इंडिया के तेज गेंदबाजों की लिस्ट में उन्हें ईशांत शर्मा पर वरीयता दी जाएगी. ऐसा इसलिए क्योंकि इस सीरीज में ईशांत शर्मा ने बिल्कुल प्रभावित नहीं किया.

किस रणनीति से उमेश को मिली कामयाबी

पिछले दो-तीन साल में भारतीय गेंदबाजों ने अपनी लाइन-लेंथ से दुनिया के बड़े बड़े बल्लेबाजों को परेशान किया है. दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में पिछले साल मिली कामयाबी की सबसे बड़ी वजह ही यही थी कि अब भारतीय तेज गेंदबाज रफ्तार के साथ साथ लाइन लेंथ पर गेंद फेंक रहे हैं. उमेश यादव वैसे भी राउंड ऑर्म एक्शन से गेंदबाजी करते हैं. उन्होंने इस सीरीज में अपनी बाउंसर गेंदों का बेहतरीन तरीके से इस्तेमाल किया. उन्होंने दोनों टेस्ट मैचों को मिलाकर करीब 48 फीसदी गेंदबाजी विकेट की लाइन में की. जो किसी भी गेंदबाज की कामयाबी के लिए जरूरी शर्त है. उन्होंने मैच में रिवर्स स्विंग कराई. जिसे खेलने में दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज असहज दिखाई दिए. इन सारी खूबियों के साथ साथ उन्होंने जब जब नई गेंद संभाली तो लेट आउट स्विंग कराई जो अफ्रीकी बल्लेबाजों को परेशान करती रही. एक अनुभवी तेज गेंदबाज के तरकश में जितने तीर होने चाहिए वो सारे तीर इस सीरीज में उमेश यादव के तरकश में नजर आए.

बुमराह और भुवनेश्वर का बैकअप

विराट कोहली लगातार ये बात कहते रहे हैं कि वो टीम के किसी भी खिलाड़ी को ‘बर्न-आउट’ नहीं करना चाहते. यही वजह है कि वो हर एक खिलाड़ी को बीच बीच में आराम देते रहते हैं. ये नियम तेज गेंदबाजों पर खास तौर पर लागू होता है क्योंकि सबसे ज्यादा फिटनेस की परेशानी तेज गेंदबाजों को ही झेलनी होती है. इस सीरीज से पहले टीम इंडिया को तब झटका लगा था कि जसप्रीत बुमराह चोट की वजह से सीरीज से बाहर हो गए. हार्दिक पांड्या भी चोट की वजह से टीम से बाहर हैं. भुवनेश्वर कुमार भी टीम में नहीं हैं.

ऐसे में इस बात का थोड़ा बहुत डर हर हिंदुस्तानी क्रिकेट फैन को था कि कहीं फ्रंटलाइन तेज गेंदबाजों की गैर मौजूदगी में दक्षिण अफ्रीका की टीम भारत पर भारी ना पड़ जाए. लेकिन मोहम्मद शमी और उमेश यादव की जोड़ी ने बुमराह की कमी नहीं खलने दी. इन दोनों गेंदबाजों ने मिलकर सीरीज में 24 विकेट लिए. यानी अब टीम इंडिया अपने घर में भी जीत दिलाने के लिए सिर्फ स्पिन गेंदबाजों की मोहताज नहीं रही. दक्षिण अफ्रीका की टीम दो टेस्ट मैचों में पारी के अंतर से हारी. इन तेज गेंदबाजों की घातक बल्लेबाजी का इसमें बड़ा रोल है.

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