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Opinion: अंतरिम बजट में बंधे थे मोदी सरकार के हाथ, लेकिन चुनाव से पहले लोक लुभावन घोषणाओं का खुला पिटारा

आज वित्त मंत्री आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अंतरिम बजट पेश किया. हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी ने कल यानी बुधवार, 31 जनवरी को कहा है कि पूर्ण बजट भी वही पारित करेंगे, यानी उनको इस बात का पूरा यकीन है कि वह सत्ता में वापस आ ही जाएंगे. सरकार ने हालांकि इसका कलेवर चुनावी ही रखा है और कई ऐसी घोषणाएं की हैं, जो पहले से चली आ रही योजनाओं का विस्तार ही हैं. महिलाओं, किसानों, युवाओं को अपना लक्षित वर्ग सरकार ने कई बार बताया है और इसीलिए सरकार ने इस बजट में भी उनको ही ध्यान में रखा है. 

अंतरिम बजट और पूर्ण बजट में अंतर

बजट सरकार का निर्धारित लेखा-जोखा होता है कि आपकी कितनी आय है और कितना व्यय आप किधर करेंगे. आय तो निर्धारित होती है लेकिन व्यय फ्यूचर प्लान यानी भविष्य की योजना से तय होता है. जब फ्यूचर प्लान करते हैं तो  इसमें सरकार के अपने कुछ एजेंडे होते हैं और उसी हिसाब से वह काम करते हैं. जब अगर आप पूर्ण बजट पेश करते हैं तो गवर्नमेंट अपने एजेंडा पर अपने प्रायोरिटी एक्सपेंडिचर के हिसाब से तय करती है. अब क्योंकि सरकार आने वाले साल में रहेगी या नहीं, इसकी कोई गारंटी चुनावी साल में नहीं होती, तो उसका मोरल ग्राउंड नहीं बनता है कि आप उस हिसाब से बजप पेश करें, इसलिए सरकारें अंतरिम बजट ही पेश करती है. आप अगले साल रहेंगे या ना रहेंगे, वही जब तय नहीं तो आप कैसे वह प्लान कर सकते कि मैं यहां एक्सपेंडिचर करूंगा हम लोग इधर करेंगे.अंतरिम बजट सरकार का लेखा-जोखा होता है. सरकार के पास पिछले साल का क्या खर्च होगा और जब तक इलेक्शन होगा तब तक का हमारा व्यय किधर होगा, उसके आगे की बात नहीं होती है.सरकार अपने चार सालों में देखेगी कि उसने क्या-क्या काम किया है और उसी आधार पर आज वित्त मंत्री ने बजट पेश किया है. खासकर जो पिछला वर्ष जो रहा है, हमारी अर्थव्यवस्था में जो सुधार हुआ है. अगर आप अपने आस पड़ोस के विश्व की किसी भी अर्थव्यवस्था से तुलना करें तो सरकार ने उस हिसाब से अपनी पीठ थपथपायी है और यह बताया है कि जो उसकी प्रायरिटी लिस्ट है, उसको वह बता सके. 

सरकार ने थपथपायी अपनी पीठ 

गवर्नमेंट अभी तक जैसा परफॉर्मेंस कर रही है, इसमें अंतरिम बजट और पूर्ण बजट में किसी को कोई संदेह है. अगर पूर्ण बजट यही सरकार लेकर आएगी,  इसलिए सरकार ने कुछ पॉइंटर सेट किए हैं. जैसे सरकार ने दावा किया भी कि गरीब, महिलाओं, युवाओं और किसानों पर वह सबसे ज्यादा ध्यान दे रही है. पिछले 10 वर्षों में सरकार ने 25 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला है, इसका भी सरकार ने काफी प्रचार किया है. डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर का भी सरकार ने काफी उल्लेख किया है. किसानों को अन्नदाता बताते हुए 11.8 करोड़ किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि योजना का लाभ मिला है, यह भी सरकार ने बताया. 4 करोड़ से अधिक किसानों को फसल बीमा योजना का फायदा मिला है. वित्त मंत्री ने किसी नए टैक्स का या टैक्स स्लैब में बदलाव का ऐलान नहीं किया. इसका मतलब ये है कि सरकार ने आयात शुल्क सहित प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों के लिए समान कर दरों को बनाए रखने का प्रस्ताव सरकार ने किया है. हालांकि, सरकार की ओर से इस बजट में इनकम टैक्स देने वालों को कोई राहत नहीं मिली.

बजट में इन बिंदुओं पर रहा जोर

पहला, नॉमिनल जीडीपी है जो आपका करंट प्राइस (यानी, अभी के मूल्य पर) जो भारत की अर्थव्यवस्था का विकास है या कुल आकार जो है अर्थव्यवस्था का, उसकी ग्रोथ देखें तो बाकी किसी भी देश से हमारी अर्थव्यवस्था काफी बेहतर स्थिति में है. ऐसा नहीं कि हम डबल डिजिट में बहुत ज्याद विकास कर रहे हैं, लेकिनअगर पूरे समय को आकलन करें तो उसमें हम लोग काफी बेहतर स्थिति में है, सरकार ने  इस चीज को हाईलाइट किया कि हमारा जो नॉमिनल जीडीपी जो है, अभी फिलहाल 10 से 12 परसेंट के आसपास है और यह जारी रहेगा तो  इससे काफी फायदा होता है, ग्रोथ होते ही जो संसाधन (मानवीय) बेरोजगार हैं, वे बारोजगार हो जाते हैं, तो कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था में ये सबसे जरूरी बात है और इसी को सरकार ने दिखाया भी है. सरकार का पब्लिक एक्सपेंडिचर, खासकर कैपिटल एक्सपेंडिचर, ऐसे इन्वेस्टमेंट जो आपको बाद में रिटर्न दे, उससे आपको सर्विसेज मिल पाए. उस पर गर्वमेंट का बहुत ज्यादा फोकस हुआ है और 2014 से लेकर जबसे बीजेपी की सरकार आई है, पहली बार तीन गुना बढ़ोतरी हुई है, लगभग 3 गुना. मतलब डाटा में देखें तो 16.6 ट्रिलियन रुपए था पूंजीगत व्यय 2014 में और वह अभी बढ़ कर पिछले साल तक वह 46 ट्रिलियन को पार कर गया. हालांकि, इसमें एक बात दिक्कत ी है कि  प्राइवेट इन्वेस्टमेंट क्राउडिंग (निजी निवेश की बरसात) नहीं हुआ. जैसे कहा जाता है खासकर भारत जैसे देश में  कि सरकार का व्यय बढ़ाइये, तब निजी निवेश भी घुसता है. इसके अलावा कर का संग्रहण बढ़ा है, सरकार का जो राजस्व का संग्रह है, वह बहुत बढ़ा है. जीएसटी में शुरू में तकलीफ हुई लेकिन आज हम उसका परिणाम देख रहे हैं. गवर्नमेंट का जो कलेक्शन है, वह बेहतर हुआ है. .ये सारी बातें अंतरिम बजट में दिखी हैं. 

सरकारी व्यय पर लगी लगाम 

भारत जैसे देश में हमेशा से एक चीज होती आई है, कि यहां पर सरकार का व्यय, सरकार के राजस्व से ज्यादा रहा है. कई बार इसपर कमिटि भी बनी, जिसने इसपर नियंत्रण करने की बात की, चूंकि कर्ज बढ़ता चला जाता है और उसके बढ़ने के बाद कंट्री की क्या हालत होती है वो सभी को पता है. उसमें गर्वमेंट का प्रयास तो था, लेकिन बीच में महामारी आयी. कोरोना के समय सरकार की सारी योजनाएं उल्टे-सीधे हो गए. उसके बावजूद भी गर्वमेंट उस पर काफी हद तक कंट्रोल कर पायी है, यह अभी जीडीपी के 5% के आसपास है और इसको 5 से नीचे ही रखना है. कई सारे ऐसे गवर्नमेंट के जो पब्लिक सेक्टर है वो अब सेंट्रल प्लानिंग की ओर देख रहे है क्योंकि वे असफल हो चुके हैं. उसमें फायदा भी हुआ है. तो, विनिवेश यानी डिस्इवेस्टमेंट जो है, वह बढ़ा है. पिछले साल सरकार ने काफी कुछ कदम उठाए हैं, तो इस बार वह अंतरिम बजट में इसको भी दिखा रही है.  

भविष्य की राह

वित्त मंत्री ने बजट भाषण की शुरुआत जिस हिसाब से की थी, वही उन्होंने अपने पूरे भाषण में कहा. महिलाओं पर जोर देते हुए उन्होंने यह बताया कि अब तक एक करोड़ लखपति दीदियां बन चुकी हैं. 9 करोड़ महिलाएं 83 लाख हेल्प ग्रुप्स से जुड़ी हुई हैं. लखपति दीदी का लक्ष्य बढ़ाकर 2 करोड़ से 3 करोड़ कर दिया गया है. सरकार के दूसरे लक्षित वर्ग किसानों के लिए भी सरकार ने अंतरिम बजट में ही कई बड़े ऐलान किए. डेयरी किसानों की मदद के लिए सरकार की ओर से योजना बनेगी. पीएम संपदा योजना का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि इससे अब तक 38 लाख किसानों लाभ को हुआ है.मत्स्य पालन के लिए मोदी सरकार ने अलग विभाग बनाया और पीएम मत्स्य योजना से 55 लाख नए रोजगार मिलने की संभावना है. युवाओं के लिए कौशल विकास पर जोर दिया जा रहा है, इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर जोर है और कुल मिलाकर यह बजट चुनावी नहीं है, क्योंकि सरकार के हाथ बंधे हैं, लेकिन फिर भी कई लोकलुभावन घोषणाएं सरकार ने की हैं. वित्तमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना के जरिए 3 करोड़ घर के लक्ष्य को पाने के सरकार करीब हैं. अगले 5 साल में 2 करोड़ लोगों को और घर मिलेंगे. 1 करोड़ गरीबों के घरों में सोलर पैनल के जरिए 300 यूनिट मुफ्त बिजली पहुंचाई जाएगी.

बजट में भविष्य की राह यही होगी कि ऊंचे निवेश, शिक्षा इत्यादि पर फोकस होगा. महिलाओं को आगे बढ़ाने की बात हो रही है. घरेलू आर्थिकी को मजबूत किया जाए, मतलब कि किसी भी आघात को अर्थव्यवस्था सहन कर ले. सरकार जलवायु परिवर्तन को लेकर भी काफी चिंतित है और ऐसा नहीं कि किसी सरकार ने बात नहीं की है, लेकिन बाकी सरकारें किसी भी देश की हो, वो बस बड़ी-बड़ी बातें करते है. लेकिन भारत में उस पर काफी अमल हुआ है और आगे भी होगा.

[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.] 

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