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Opinion: क्या बिहार में पुलिस प्रशासन पर नीतीश की पकड़ हो गई है ढीली, प्रदेश के पूर्व सांसद से जानें

बिहार के कटिहार जिले में बिजली आपूर्ति की मांग कर रहे लोगों पर पुलिस की गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो जाती है. इसे तो किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता है. पुलिस को संयम से काम लेना चाहिए था.

वहां के डीएम और एसपी का कहना है कि लोग कार्यालय में घुसकर तोड़-फोड़ कर रहे थे. हालांकि पुलिस अपने आपको बचाने के लिए घटना को बढ़ा-चढ़ाकर बता सकती है. इसलिए मैं समझता हूं कि नीतीश सरकार को इस घटना की जांच करनी चाहिए और देखना चाहिए कि प्रशासन, पुलिस प्रशासन की तरफ से क्या गलती हुई है. इस मामले में अगर पहले से पता था कि बिजली कटौती को लेकर लोगों में गुस्सा है और वे धरना प्रदर्शन को आ सकते हैं, तो पहले से सुरक्षा इंतजाम किया जा सकता था.

बातचीत से समाधान निकाला जा सकता था. इस प्रदर्शन में मुखिया और वार्ड मेंबर लोग थे, जो जनप्रतिनिधि होते हैं. इन जनप्रतिनिधियों के पास वीडियो और प्रशासन से जुड़े तमाम अधिकारियों के साथ संवाद का अनुभव होता है. वे उनके संपर्क में रहते हैं. कटिहार का इलाका बहुत पिछड़ा इलाका है, गरीब का इलाका है.  इतनी जल्दी में गोली चलाना सही नहीं था. मैं समझता हूं कि सरकार को इन सभी पहलुओं की जांच करनी चाहिए.

सरकार देख भी रही होगी. ये भी बात नहीं है कि सरकार संवेदनहीन है. लेकिन अधिकारी जो कह रहे हैं, उसी पर पूरा विश्वास नहीं कर लेना चाहिए. तहकीकात करनी चाहिए. किसी निष्पक्ष अधिकारी से जांच करवाना चाहिए. अगर वैसा अधिकारी नहीं लग रहा है, तो इसमें न्यायिक जांच कर लेनी चाहिए.

जब इस तरह की घटना होती, पुलिस आम लोगों पर गोली चलाने लगती है तो ऐसी घटनाओं पर मुख्यमंत्री को लेकर लोगों के बीच ग़लत मैसेज जाता है. लोग समझने लगते हैं कि सब सरकार एक ही तरह की है. जनता को दबाने का, जन आंदोलन को दबाने के लिए इस तरह का व्यवहार किसी स्तर पर नहीं होना चाहिए. इसमें देखना चाहिए कि प्रशासन के स्तर पर क्या ढिलाई या लापरवाही हुई है.

समाज में कई तरह का असंतोष चलते रहता है. ये बात है कि किसी एक बिन्दु को लेकर लोगों का गुस्सा फूट जाता है. किसी भी सरकार को इन सब परिस्थितियों को देखना चाहिए. अगर कटिहार के डीएम और एसपी समय पर पहुंच जाते तो पूरे मामले को बेहतर तरीके से पहले ही हैंडल कर सकते थे.

कटिहार में ये दुर्भाग्यपूर्ण घटना हो गई है. जो भी मरे हैं, सरकार को पहले उनके परिवार वालों के लिए मुआवजा वगैरह का भी इंतजाम करना चाहिए और जांच करनी चाहिए. आत्म रक्षार्थ पुलिस ने गोली चलाई, सिर्फ इससे काम नहीं चलेगा. पूरे हालात को देखना होगा कि क्या पुलिस को भीड़ से जान का खतरा था. क्या लोग किसी को जला रहे थे या मार रहे थे, ये सब पहलू पर भी गोलीबारी से पहले सोचना चाहिए.भीड़ को शांत करने के और भी तरीके होते हैं, पुलिस और प्रशासन को उन पर अमल करना चाहिए. बिहार की सरकार संवेदनशील सरकार है और उसको ध्यान देना चाहिए.

इस तरह की घटनाओं में विपक्ष का हाथ होता है. बीजेपी के लोग भड़काने का काम करते आए हैं. दंगा-फसाद तक को बढ़ावा देते आए हैं. ये सब ट्रेंड चला हुआ है. इसके लिए भी जरूरी है कि पूरी घटना की अच्छे से जांच हो. अगर बीजेपी के लोग भड़काने का काम पहले से कर रहे थे, तो इंटेलिजेंस विभाग क्या कर रहा था. उनको पहले सूचना देनी चाहिए थी कि बीजेपी के लोग ऐसा कर रहे हैं.

गोली चलाने से तो सरकार की बदनामी होती ही है, सरकार की छवि पर आंच आती ही है. अब उसकी भरपाई ये है कि उन लोगों को मुआवजा देना चाहिए. ये भी पता लगाना चाहिए कि क्या सचमुच बीजेपी के लोग उकसाने का काम कर रहे थे. अगर ऐसा है तो उनको भी पकड़ना चाहिए. सिर्फ कहने से नहीं होगा.

कटिहार में फायरिंग, दरभंगा में तनाव और बेगूसराय में नाबालिग लड़की की निर्वस्त्र पिटाई या पटना में शिक्षकों पर लाठीचार्ज ..इस तरह की घटना होने पर सरकार की बदनामी तो होती ही है. सरकार को ये देखना पड़ेगा कि इस तरह की हरकत करने वाले लोगों पर वास्तविक तौर से सख्ती हो. सिर्फ़ ये कह देने से नहीं चलेगा कि सुरक्षा की व्यवस्था है. पुलिस की हरकत हो या बाकी घटनाएं..किसी की जवाबदेही तो होनी ही चाहिए.

मैं समझता हूं कि सरकार को ये देखना चाहिए कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं हो. जिनके विध्वंसकारी विचार हैं, जिनके विचार तोड़-फोड़ वाले हैं, जो सांप्रदायिक विचार रखते हैं, अगर वे आपके विपक्ष में हैं तो आपको तो और भी सतर्कता बरतनी चाहिए. राजनीतिक स्तर पर भी उनसे निपटने की क्षमता होनी चाहिए.

बिहार में जो भी घटनाएं हुई हैं, पूरे मामले पर हम कह रहे हैं कि सरकार को ध्यान देनी चाहिए.प्रशासन चलाने में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम है. मौजूदा प्रदेश सरकार ठीक-ठाक काम कर रही है. लेकिन इतना ही काफी नहीं है. पुलिस-प्रशासन पर भी उनका अंकुश ढीला नहीं होना चाहिए. पुलिस-प्रशासन जो बात बोल दे, उसे आंख मूंदकर नहीं माननी चाहिए.

[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.]

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