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AAP की शिक्षा क्रांति से ‘अवध’ तक चमत्कृत

आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार ने देश-दुनिया में अपने शिक्षा मॉडल के लिए प्रशंसा हासिल की है. बच्चों के लिए विश्वस्तरीय सरकारी स्कूल के सपने को पूरा करना किसी भी सरकार के लिए अनुकरणीय उपलब्धि है. बच्चों को निशुल्क शिक्षा के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षा के लिए फ्री कोचिंग की घोषणा अपने मकसद के लिए आम आदमी पार्टी की गंभीरता को दर्शाता है. आम आदमी पार्टी के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए बहुत सारी नामचीन हस्तियां भी उनकी ओर आकर्षित हुई हैं. ऐसे ही नामों में एक नाम अवध ओझा का भी है जो सिविल सर्विसेज कोचिंग इंस्टीच्यूट की दुनिया में नामचीन हैं.

AAP ने दिया बेरोजगारी का समाधान

पूरा देश आज बेरोजगारी की मार झेल रहा है. ऐसे में यूनिवर्सिटीज और आईटीआई के छात्रों को भी अपने बिजनेस आइडिया पर काम करने के लिए दिल्ली सरकार ने 50 हजार रुपए सीड मनी देने का ऐलान किया है. आनेवाले समय में ये स्टूडेंट अपने स्टार्टअप से लाखों लोगों को नौकरी भी देने की स्थिति में आ जाएंगे और देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने में अपना योगदान देंगे. दिल्ली सरकार की “बिजनेस ब्लास्टर” योजना की शुरूआत उस वक्त ही हुई थी जब मनीष सिसोदिया शिक्षा मंत्री थे और उन्होने शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन किया था.

मनीष सिसोदिया ने ज़्यादा से ज़्यादा बच्चों को इससे जोड़ने की कोशिश की. इसके तहत, दिल्ली सरकार के स्कूलों में पढ़ने वाले 11वीं  और 12वीं के बच्चों के ग्रुप को सरकार दो-दो हज़ार रुपए की सीड-मनी देती है, जब उनका बिजनेस आइडिया आगे बढ़ता है तो उन्हें अतिरिक्त 25 हज़ार की मदद दी जाती है. स्कूली बच्चों के ऐसे कई ग्रुप आज अपना व्यवसाय स्थापित कर चुके हैं. कई बिजनेस ग्रुप का तो करोड़ों का टर्न ओवर है और वे दर्जनों लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं.

बच्चों के बिजनेस आइडियाने चौंकाया

दिल्ली में बिजनेस ब्लास्चर स्कीम ने शिक्षा जगत में अवध ओझा जैसे कॉमर्शियल बेंचमार्क पर्सनालिटी को भी आकर्षित किया. आम आदमी पार्टी में शामिल होने के दूसरे दिन अवध ओझा सरकारी स्कूल पहुंचे और बच्चों से रूबरू हुए. इस दौरान बच्चों की प्रतिभा ने प्रभावित किया और बिजनेस ब्लास्टर स्कीम से जुड़े बच्चों की खासतौर पर उन्होने तारीफ की. दिल्ली सरकार की ये योजना उन प्रतिभाशाली स्टूडेंट्स के लिए हैं जो अपने बिजनेस आइडिया पर काम करना चाहते हैं इसके तहत 1 हजार टीमों को उनके आइडिया पर सीड मनी दी जाएगी. स्टूडेंट्स टीम के तौर पर काम करेंगे जिसमें 3 से 5 स्टूडेंट्स होंगे. इसके बाद 1 हजार में से 100 टीमों को इन्वेस्टर्स के सामने बिजनेस आइडिया को पेश करने का अवसर दिया जाएगा.

एक टीवी इंटरव्यू में अवध ओझा ने कहा कि क्या हम सोच सकते थे कि एक स्कूली बच्चा वो भी सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला, एक करोड़ के टर्न ओवर की कंपनी चलाएगा. दिल्ली से बाहर के आम लोगों के लिए यह बात चौंकाने वाली हो सकती है, लेकिन दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने यह चरितार्थ करके दिखाया है कि

यकीन हो तो कोई रास्ता निकलता है,

हवा की ओट भी लेकर चिराग जलता है”

 

स्कूलों से निकल रहे नौकरी देने वाले युवा”

अन्य राज्यों की सरकारी योजनाओं की तरह दिल्ली सरकार ने इस योजना को शुरू करके इसे भगवान भरोसे नहीं छोड़ा है, सरकार बच्चों के सपनों को पंख देने के लिए उनके साथ लगातार खड़ी है. इसे इस बात से समझा जा सकता है कि चालू वित्त वर्ष के लिए ही दिल्ली सरकार ने बिजनेस ब्लास्टर योजना के लिए 40 करोड़ का बजट आवंटित किया है. इस योजना के जरिए दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार अपने नेता अरविंद केजरीवाल के इस सपने को आकार देने में जुटी है कि “हमें स्कूली बच्चों को नौकरी ढूंढने वाला नहीं, नौकरी देने वाला युवा बनाना है.”

स्पेशलाइज्ड एक्सीलेंस पर भी ज़ोर

सिर्फ बिजनेस ब्लास्टर ही नहीं, स्कूली शिक्षा से जुड़े अलग अलग मोर्चों पर आम आदमी पार्टी की सरकार ने नए और सफल प्रयोग किए हैं. इसका एक और उदाहरण है, स्कूल ऑफ स्पेशलाइज्ड एक्सीलेंस. अब तक बच्चों और अभिभावकों के सामने यह चिंता रहती थी कि स्कूल के बाद क्या करें और अगर किसी ख़ास फ़ील्ड में जाना हो तो उसकी तैयारी कैसे करें. दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने इसका समाधान निकाला और अलग अलग क्षेत्र में जाने के इच्छुक बच्चों के लिए उस क्षेत्र विशेष की पढ़ाई स्कूल के स्तर से ही शुरू कराई. दिल्ली में अभी कुल 31 स्कूल ऑफ स्पेशलाइज्ड एक्सीलेंस संचालित हैं, जो संगीत से लेकर खेल और साइंस-टेक्नोलॉजी से लेकर आर्मी के क्षेत्र में जाने तक के लिए बच्चों को तैयार कर रहे हैं. इन स्कूलों की खासियत इस बात से समझी जा सकती है कि इस साल इन स्कूलों में एडमिशन के लिए 6 हजार सीट के लिए कुल 1 लाख 40 हजार आवेदन आए.

मजबूत हुई शिक्षा व्यवस्था की नींव

 दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव का एक बड़ा हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा है. विदेशों में शिक्षकों की ट्रेनिंग के साथ साथ आम आदमी पार्टी की सरकार ने स्कूल भवन और इससे संबंधित व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर बड़ा ज़ोर दिया है. दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, आज़ादी के बाद से 1947 से 2015 के बीच दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 24 हजार क्लास रूम्स बने थे. लेकिन आम आदमी पार्टी के सरकार में आने के बाद से 2015 से 2024 के बीच 9 साल में ही 20 हजार से ज़्यादा नए क्लास रूम बन चुके हैं. आधुनिक सुविधाओं से लैस ये क्लास रूम कई मायनों में बड़े प्राइवेट स्कूलों के क्लास रूम से कई गुना बेहतर हैं.

बजट में शिक्षा को प्राथमिकता

शिक्षा के क्षेत्र में ये सब क्रांतिकारी काम हुए शिक्षा को सरकार का मुख्य एजेंडा बनाकर. अब तक शिक्षा बजट के मामले में भी सबसे निचले पायदान पर होती थी. केंद्र की भाजपा सरकार के साथ साथ अन्य राज्यों में अब भी यही हाल है. लेकिन दिल्ली की सत्ता में आते ही आम आदमी पार्टी ने सबसे पहले शिक्षा को बजट के केंद्र में रखा. दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार अपने कुल बजट का करीब 25 फीसदी हिस्सा शिक्षा पर खर्च करती है. शिक्षा पर आम आदमी पार्टी सरकार का फोकस ही वह कारण है कि जिसने सरकारी स्कूलों को विश्वस्तरीय बनाया. इन स्कूलों को देखने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति की पत्नी भी आती हैं. दिल्ली से अगर गुजरात की तुलना की जाए जहां पीएम मोदी लंबे वक्त तक सीएम रहे. वहां ये हाल है कि प्रधानमंत्री मोदी को मॉडल स्कूल दिखाने के लिए गुजरात में अस्थायी मॉडल स्कूल बनवाना पड़ता है.

[उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही ज़िम्मेदार है.]

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