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2024 चुनाव: लालू-तेजस्वी यादव ने आख़िर क्यों कर दिया बीजेपी की उलटी गिनती का दावा?

साल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अपनी जमीन मजबूत करने के लिए 'भारत जोड़ो यात्रा' निकाल रही है. बेशक आज वो महज़ दो राज्यों की सत्ता में है लेकिन बावजूद इसके वो देश की मुख्य विपक्षी पार्टी है. लेकिन उसने भी औपचारिक तौर पर अभी तक ये ऐलान नहीं किया है कि वो अगले चुनाव में बीजेपी की उलटी गिनती शुरू करा देगी. यानी उसे ये तो उम्मीद है कि ये यात्रा देश की जनता का मिज़ाज काफी हद तक बदलेगी लेकिन उसे आज भी पुख्ता तौर पर ये यकीन नहीं है कि कांग्रेस की अगुवाई में सियासी लड़ाई के लिए तैयार होने वाला संयुक्त विपक्ष नरेंद्र मोदी को तीसरी बार सत्ता में आने से रोकने के लिए एक बड़ा 'स्पीड ब्रेकर' खड़ा कर सकता है.

लेकिन लालू प्रसाद यादव की आरजेडी ने रविवार को जो दावा किया है उसने राजनीतिक खेमे में थोड़ी हलचल इसलिये मचा दी है कि क्या विपक्षी खेमे में वाक़ई कोई ऐसी खिचड़ी पक रही है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल करने और तमाम विपक्षी नेताओं से मुलाकात करने के बावजूद आज भी कोई दिग्गज़ नेता ये कहने की हैसियत में नहीं है कि हां 2024 में मोदी से मुकाबला करने के लिए पूरा विपक्ष एकजुट होगा.

दरअसल, एक जमाने में बिहार की राजनीति के चाणक्य समझे जाने वाले और अपने उसी जलवे से केंद्र की सियासत को प्रभावित करने वाले लालू प्रसाद यादव के सितारे पिछले कुछ साल से बेहद गर्दिश में हैं. अब तो सीबीआई ने उनकी पत्नी, बेटे तेजस्वी यादव और  बेटी मीसा भारती को भी भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले में आरोपी बना लिया है. ये देश की जनता को भी दिख रहा है और लालू जी के परिवार को भी इसका अहसास होगा कि वे डरे हुए हैं, सहमे हुए हैं और जांच एजेंसी की अगली संभावित कार्रवाई का इंतज़ार भी कर रहे हैं. इसे आप राजनीति के काल चक्र का सबसे कठोर सच कह सकते हैं, जिसका एकमात्र मकसद कुर्सी से हटते ही संबंधित नेता को उसकी असली औकात में लाना होता है. लेकिन काल चक्र के इस पहिये की सबसे बड़ी खूबी ये है कि वो हर नेता के साथ बराबरी का इंसाफ़ करते हुए उसे पुराने पापों की भी याद दिला देता है.

याद दिला दें कि लालू यादव अपनी पार्टी RJD की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक अक्सर पटना में ही करते रहे हैं. लेकिन इस बार उन्होंने जानबूझकर दिल्ली को ही चुना. शायद ये दिखाने के लिए कि उनका परिवार इस सरकार की जांच एजेंसियों से नहीं डरता है. रविवार को ही इस बैठक में आरजेडी ने दावा किया कि देश के कई हिस्सों में विपक्ष ने एकजुट होना शुरू कर दिया है और बीजेपी (BJP) का दो से 303 सीटों तक का सफर 2024 से उलटी दिशा में जाना शुरू हो जाएगा. पार्टी ने कहा कि सामूहिक विकल्प प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन की 'आत्म मुग्ध' राजनीति को मात देगा.

इस बैठक में तीन प्रस्ताव भी पेश किए गए लेकिन ये कोई नहीं जानता है कि बाकी विपक्ष भी इस पर अपनी मुहर लगाएगा भी कि नहीं. बैठक के बाद आरजेडी नेता व मुखर राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने कहा, "राजनीतिक स्थिति पर, विदेश नीति पर और देश की आर्थिक स्थिति पर तीन महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किए गए. राजनीतिक प्रस्ताव काफी अहम है क्योंकि यह ऐसे समय में आया है जब देश को अंधकार में ले जाया जा रहा है." उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद, तेजस्वी यादव और शरद यादव के भाषणों का जोर इस बात पर था कि देश की स्थिति बहुत गंभीर है क्योंकि बेरोजगारी पांच दशकों में अपने उच्चतम स्तर पर है.

उन्होंने एक और बड़ी बात कही है जिसका सीधा नाता आरजेडी के वोट बैंक से जुड़ा हुआ है. उनके मुताबिक "सरकार के पास कोई रूप-रेखा नहीं है. अगर आप बेरोजगारी की बात करते हैं, तो वे बुलडोजर और हिजाब की बात करते हैं. जहां सांप्रदायिक सौहार्द को मजबूत करने की इच्छा होनी चाहिए, वहां वे (बीजेपी) हिंदू-मुसलमान कर रहे हैं. देश को अपनी आजादी के 75वें वर्ष में एक नई दिशा की जरुरत है."

उनसे एक अहम सवाल पूछा गया कि अगर विपक्ष एकजुट हो भी गया तो पीएम पद का उम्मीदवार आखिर कौन होगा? इसके जवाब में मनोज झा का कहना था कि, "हम एक शैम्पू नहीं खरीद रहे हैं कि ये काम करेगा और ये नहीं करेगा. लोकतंत्र सामूहिकता के बारे में है, जब लोकतंत्र में सामूहिकता का समापन होता है, तो इससे नरेंद्र मोदी का उदय होता है." 

हमारे तीनों नेताओं ने कहा है कि बिहार में बदलाव कोई सामान्य बात नहीं है. हम मतभेद और अहंकार को दरकिनार कर एक साथ आए हैं. अब इसे पूरे देश में दोहराया जाना है. विपक्ष एक साथ बैठेगा, बातचीत होगी और बेरोजगारी, महंगाई और सांप्रदायिक सौहार्द के समर्थन में एक प्रगतिशील दस्तावेज तैयार किया जाएगा, ताकि आजादी के 75वें वर्ष में हमारी विरासत नष्ट न हो."

लोकसभा की सीटों के लिहाज़ से उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र् के बाद बिहार तीसरा ऐसा बड़ा राज्य है, जहां 40 सीटें हैं. वहां तो बदलाव हो गया लेकिन बड़ा सवाल ये है कि आरजेडी का ये दावा क्या देश में भी कुछ बदलाव कर पायेगा?

नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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