Bertha Benz: ये महिला हैं दुनिया की पहली ड्राइवर, जिनके चलते बनी मर्सिडीज बेंज जैसी कंपनी
Bertha Benz story: मर्सिडीज बेंज के निर्माता कार्ल बेंज की पत्नी बेर्था बेंज दुनिया की ऐसी पहली महिला थीं, जिन्होंने सड़क पर कार चलाई और जिस जगह से बेर्था ने फ्यूल भरवाया, वही पहला पेट्रोल पंप बना.

Bertha Benz story: बेर्था बेंज दुनिया की ऐसी पहली महिला थीं, जिन्होंने सड़कों पर कार दौड़ाई. बेर्था बेंज ने अपनी पति की बनाई कार को सड़क पर उतारा और लोगों की जानकारी में लाने के लिए इस गाड़ी को 100 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तक चलाया. जिस रास्ते पर बेर्था बेंज ने कार चलाई, उसे बेर्था बेंज मेमोरियल रूट नाम दिया गया. साल 1888 में जर्मनी के मैनहेम से फोर्जियम तक कार चलाकर, बेर्था बेंज, दुनिया की पहली महिला ड्राइवर बनीं.
कौन थीं बेर्था बेंज?
दुनिया में सबसे पहले कार चलाने वाली महिला बेर्था बेंज, मर्सिडीज बेंज के संस्थापक कार्ल बेंज की पत्नी थीं. इस घटना से पहले बेर्था बेंज को कोई नहीं जानता था. लेकिन, जर्मनी की सड़क पर कार से 100 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय करने के बाद बेर्था बेंज का नाम इतिहास में दर्ज हो गया. कार्ल बेंज ने अपने सहयोगी डेमलर गॉटलीब के साथ मिलकर मर्सिडीज बेंज का निर्माण किया.
तिपहिया वाहन से तय की 106 किलोमीटर की दूरी
कार्ल बेंज ने तीन पहियों पर चलने वाली कार का निर्माण किया था. हालांकि, कार बनने के तीन साल बाद भी इसका एक भी मॉडल नहीं बिका. बेर्था ने अपने पति से कहा कि अगर इस कार को लोगों के आगे इस्तेमाल करके दिखाया जाए, तो लोग इस कार के बारे में जानेंगे और खरीदना चाहेंगे. लेकिन कार्ल बेंज ने बेर्था के सुझाव को मना कर दिया.
बेर्था बेंज ने पति के मना करने के बावजूद अपने मन की सुनी और साल 1888 के अगस्त महीने में कार्ल की बनाई कार को सड़क पर उतार लाईं. इसके लिए बेर्था ने न तो अपने पति से इजाजत ली और न ही कंपनी के बाकी अधिकारियों से. बेर्था ने मैनहेम से फोर्जियम तक 106 किलोमीटर का रास्ता उसी कार से तय किया. साल 2008 में बेर्था के तय किए गए रास्ते को 'बेर्था बेंज मेमोरियल रूट' नाम दिया गया.
दुनिया का पहला पेट्रोल पंप
इस लंबी यात्रा के दौरान बेर्था बेंज के आगे मुश्किलें भी आईं. बेर्था ने फ्यूल लाइन की साफ-सफाई के लिए अपनी हेड पिन का यूज किया. साथ ही बेर्था इंजन को ठंडा रखने के लिए उस पर पानी भी डालती रहीं. तिपहिया गाड़ी में तेल कम होने पर एक केमिस्ट शॉप से बेर्था ने फ्यूल भी खरीदा. इस शॉप को ही दुनिया का पहला पेट्रोल पंप माना जाता है. बेर्था ने अपने पति को उनके काम में फायदा पहुंचाने के लिए ये कदम उठाया था. इस कदम के बाद कार्ल को उनके कारोबार में सफलता भी हासिल हुई.
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Source: IOCL





















