Continues below advertisement
कुमार सम्भव जैन

खबर कोई भी हो... कैसी भी हो... उसकी नब्ज पकड़ना और पाठकों को उनके मन की बात समझाना कुमार सम्भव जैन की काबिलियत है. मुहब्बत की नगरी आगरा से मैंने पत्रकारिता की दुनिया में पहला कदम रखा, जो अदब के शहर लखनऊ में परवान चढ़ा. आगरा में अकिंचन भारत नाम के छोटे से अखबार में पत्रकारिता का पाठ पढ़ा तो लखनऊ में अमर उजाला ने खबरों से खेलना सिखाया. 

2010 में कारवां देश के आखिरी छोर यानी राजस्थान के श्रीगंगानगर पहुंचा तो दैनिक भास्कर ने मेरी मेहनत में जुनून का तड़का लगा दिया. यहां करीब डेढ़ साल बिताने के बाद दिल्ली ने अपने दिल में जगह दी और नवभारत टाइम्स में नौकरी दिला दी. एनबीटी में गुजरे सात साल ने हर उस क्षेत्र में महारत दिलाई, जिसका सपना छोटे-से शहर से निकला हर लड़का देखता है. साल 2018 था और डिजिटल ने अपना रंग जमाना शुरू कर दिया था तो मैंने भी हवा के रुख पकड़ लिया और भोपाल में दैनिक भास्कर पहुंच गया. 

झीलों के शहर की खूबसूरती ने दिल और दिमाग पर काबू तो किया, लेकिन जरूरतों ने वापस दिल्ली ला पटका और जनसत्ता में काफी कुछ सीखा. यह पहला ऐसा पड़ाव था, जिसकी आदत धारा के विपरीत चलना थी. इसके बाद अमर उजाला नोएडा में करीब तीन साल गुजारे और अब एबीपी न्यूज में बतौर फीचर एडिटर लोगों के दुख-दर्द और तकलीफ का इलाज ढूंढता हूं. करीब 18 साल के इस सफर में पत्रकारिता की दुनिया के हर कोने को खंगाला, चाहे वह रिपोर्टिंग हो या डेस्क... प्रिंटिंग हो या मैनेजमेंट... 

काम की बात तो बहुत हो चुकी अब अपने बारे में भी चंद बातें बयां कर देता हूं. मिजाज से मस्तमौला तो काम में दबंग दिखना मेरी पहचान है. घूमने-फिरने का शौकीन हूं तो कभी भी आवारा हवा के झोंके की तरह कहीं न कहीं निकल जाता हूं. पढ़ना-लिखना भी बेहद पसंद है और यारों के साथ वक्त बिताना ही मेरा पैशन है. 

टॉप स्टोरीज फ्रॉम ऑथर

गोमुख से गंगासागर तक खिला 'कमल', जानें देश की कितनी नदियों का रंग हुआ 'भगवा'?
सत्ता की दौड़ में फिसल रहे ये तीन सीएम, अपनी सीट पर पिछड़े और पार्टी भी बेहाल
क्या पब्लिश होने से पहले पढ़ सकते हैं पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की किताब, जानें क्या हैं नियम?
महाराष्ट्र की सभी 29 महानगरपालिकाओं की फुल डिटेल, कौन-सी पार्टी कहां से जीती? देखें एक क्लिक में
2047 तक दोबारा 'विश्व गुरु' बन जाएगा भारत, ज्ञान के केंद्र में पढ़ने के लिए तरसेंगे दुनियाभर के लोग
यूके-यूएस के लोग भी भारत में कराएंगे इलाज, 2047 तक इतनी तरक्की कर लेगा देश का हेल्थ सेक्टर, जानें कैसे?
पुतिन को कौन-सी फोर्स ने दिया गार्ड ऑफ ऑनर, इसमें कितने जवानों की मौजूदगी जरूरी?
मिजोरम के पूर्व राज्यपाल थे सुषमा स्वराज के पति स्वराज कौशल, क्या उन्हें मिलती थी पेंशन?
Sponsored Links by Taboola