Isha Foundation के Sadhguru को अपने घर बुलाना चाहते हैं तो जरूर देखें ये वीडियो
हर हर महादेव।
महाशिवरात्रि से पहले Isha Foundation द्वारा निकाली जाने वाली शिव यात्रा पिछले लगभग 13 वर्षों से आयोजित की जा रही एक विशेष पदयात्रा है, जिसे Sadhguru ने भक्तों के लिए आरंभ किया। यह यात्रा चेन्नई, बेंगलुरु, नागरकोइल, कोयंबटूर, पट्टुकोट्टई और कर्नाटक जैसे विभिन्न स्थानों से शुरू होती है। कुछ यात्राएं 21 दिनों में 20–25 किमी प्रतिदिन चलकर सैकड़ों किलोमीटर तय करती हैं, जबकि कर्नाटक रथ यात्रा इस वर्ष लगभग 70 दिनों में 1000 किमी से अधिक चली। इस यात्रा का उद्देश्य केवल चलना नहीं, बल्कि कर्म साधना और जागरूकता फैलाना है—खासतौर पर उन क्षेत्रों में जहां नई पीढ़ी महाशिवरात्रि के महत्व से अनजान है। यात्रा के दौरान रथ गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचता है, ताकि लोग स्वयं अनुभव कर सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की भावनात्मक भक्ति देखने को मिलती है—वे आंसुओं और श्रद्धा के साथ रथ का स्वागत करते हैं। यात्रा में 63 नयनमार (प्रमुख शिव भक्त संत) की प्रतीक झांकियां भी शामिल होती हैं। अंततः सभी यात्राएं ईशा आश्रम पहुंचकर Adiyogi Shiva Statue और ध्यानलिंग के दर्शन के साथ पूर्ण होती हैं। यह समापन महाशिवरात्रि से ठीक पहले एक भव्य उत्सव के रूप में होता है और शिवांगा साधना का भी समापन इसी समय किया जाता है। यात्रियों का जीवन अनुशासित और तपस्वी जैसा होता है—वे जो भी प्रसाद रूप में मिलता है, वही ग्रहण करते हैं और निरंतर भक्ति भाव से आगे बढ़ते हैं। कुल मिलाकर, शिव यात्रा महाशिवरात्रि की आध्यात्मिक चेतना को गांव-गांव तक पहुंचाने और लोगों को शिव से जोड़ने का एक दिव्य और भावनात्मक अभियान है


























