165 मासूमों की आखिरी निशानी !
आसमान की एक उड़ान......जिसका बोझ जमीन से कहीं ज्यादा भारी है....भारी इसलिए क्योंकि वो उड़ान जख्मों की है...य़ादों की है....एक ऐसे बर्बर हमले की है....जिसने 165 से ज्यादा बच्चों की जिंदगी छीन ली....सनसनी में आज उन्हीं बच्चों की कहानी...सनसनी में आज उन्हीं अधूरे सांसों की कहानी....सनसनी में आज उन्हीं बिखरे सपनों की कहानी....सनसनी में आज उन्हीं टूटे आंसूओं की कहानी....उस दर्दनाक कांड की कहानी....
जो आसमान की उड़ान से पूरी दुनिया को याद दिला रहा है- मासूमों की जंग अभी बाकी है....एक विमान… जिसमें यात्री कम… और यादें ज़्यादा हैं…सीटें भरी हैं… लेकिन आवाज़ नहीं है…क्योंकि इस उड़ान में बैठे है वो बच्चे…जो अब कभी घर नहीं लौटेंगे…दास्तान ईरान के उन मासूम बच्चों की है...जो इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमले में बेमौत मारे गए थे....और तब से ही इन मासूमों को इंसाफ का इंतजार है....एक तरफ पाकिस्तान की सरजमीं पर अमेरिका और ईरान के बीच शांति की बात हो रही है....तो दूसरी तरफ बातचीत से पहले ईरान ने दुनिया को वो दिखाया…जिसे देख कर शायद… पत्थर भी पिघल जाए…
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