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2019 के विधानसभा चुनाव से लेकर 2022 तक महाराष्ट्र में अब तक 3 बार मुख्यमंत्री बदल चुके हैं...सबसे पहले तो बीजेपी की ओर से देवेन्द्र फडणवीस और ने रातों रात शपथ ली...लेकिन वो बहुमत साबित नहीं कर सके....तो शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ गठबंधन करके सरकार बनाई...और अब खुद को असली शिवसेना बताकर बगावत करने वाले एकनाथ शिंदे ने उद्धव सरकार गिराकर खुद मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है. लेकिन फिलहाल एक सवाल सबसे बड़ा है औऱ वो ये है कि शिवसेना का क्या होगा...क्योंकि एकनाथ शिंदे ने शिवसेना से बगावत की है तो उद्धव उन्हें और उनके साथियों को दल-बदल कानून के तहत अयोग्य ठहराकर शिवसेना से बाहर का रास्ता दिखाने के जुगाड़ में हैं...वहीं शिंदे के पास शिवसेना के 37 से ज्यादा विधायक हैं तो दलबदल लागू नहीं होगा और शिवसेना के कर्ताधर्ता अब एकनाथ शिंदे बन जाएंगे...लेकिन ये कोई पहली बार नहीं होगा, जब किसी नेता की वजह से एक पार्टी का ऐसा बंटवारा होगा कि पूरी पार्टी का चाल-चरित्र और चेहरा ही बदल जाए...भारतीय राजनीति का इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है. नमस्कार...मैं हूं आशी और आप देख रहे हैं अनकट. (वाइप) जो स्थिति आज महाराष्ट्र में है वही स्थिति कभी आंध्र प्रदेश में भी हो गई थी... उस वक्त चंद्रबाबू नायडू ने अपने ससुर एनटीआर को धोखा देकर तेलगुदेशम पार्टी (टीडीपी) पर कब्जा कर लिया था.. एनटी रामा राव नही तेलगुदेशम पार्टी की स्थापना की थी... पार्टी के टूटने और उस पार्टी का पूरा चरित्र ही बदलने का सबसे पुराना और सबसे बड़ा उदाहण मिलता है साल 1964 में. तब वक्त भारत की चीन के साथ जंग खत्म ही हुई थी. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया यानी कि सीपीआई का शीर्ष नेतृत्व चाहता था कि पार्टी कार्यकर्ता कांग्रेस और प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू का समर्थन करें. लेकिन उसी पार्टी के कई लोगों ने कांग्रेस और उसकी विचारधारा का विरोध किया. नतीजा ये हुआ कि 100 से ज्यादा नेता सीपीआई से अलग हो गए और एक नई पार्टी बनाई, जिसका नाम रखा गया Communist Party of India (मार्कसिस्ट). फिलहाल केरल में इसी पार्टी की सरकार है, जिसने कई दूसरी छोटी पार्टियों से गठबंधन कर रखा है. फिर 1972 में, Tamil Acotr एमजी रामचंद्रन और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के नेता ने पार्टी फंड के मुद्दे पर द्रमुक सुप्रीमो करुणानिधि के खिलाफ विद्रोह किया था... उन्होंने पार्टी छोड़ दी और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी AIADMK की स्थापना की, जिसने 1977 में डीएमके को हराया और 1987 तक अगले 10 वर्षों तक सत्ता में रहा... रामचंद्रन की मृत्यु के बाद, पार्टी पर एक और तमिल सिनेमा स्टार जयललिता का शासन रहा... ऐसा ही नजारा साल 1992 में भी देखने को मिला, जब मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया की समाजवादी विचारधारा को मानने और पिछड़े वर्ग के साथ ही मुस्लिमों के हक में आवाज उठाने की दुहाई देकर जनता दल का साथ छोड़ दिया और नई पार्टी बनाई समाजवादी पार्टी. बाबरी मस्जिद गिरने के बाद 1993 में हुए चुनाव में इस पार्टी ने बीएसपी के साथ गठबंधन करके सरकार भी बनाई थी. 1997 में जब लालू यादव चारा घोटाले में फंस गए और बचने का कोई रास्ता नहीं था तो जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के बावजूद उन्होंने पार्टी तोड़ दी और अपनी नई पार्टी बनाई Rashtriya Janata Dal. बात अब करते हैं कि कैसे ममता दीदी की पार्टी टीएमसी बनी... अप्रैल 1996-97 में ममता ने कांग्रेस पर बंगाल में सीपीएम की कठपुतली होने का आरोप लगाया और 1997 में कांग्रेस से अलग हो गईं. इसके अगले ही साल 1 जनवरी 1998 को उन्होंने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस बनाई. वह पार्टी की अध्यक्ष बनीं. 1998 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी ने 8 सीटों पर कब्‍जा किया. उसके बाद 1999 में जब जनता दल बना... तब कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री जे एच पटेल के केंद्र में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन को समर्थन देने के फैसले पर पूर्व प्रधान मंत्री एच डी देवेगौड़ा सहित कई नेताओं ने जनता दल से असहमति जताई थी..फिर 2004 में कर्नाटक में सत्तारूढ़ गठबंधन का घटक बनने पर जनता दल (सेकुलर) को प्रमुखता मिली और 2019 में, कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के बाद कुमारस्वामी के नेतृत्व में जनता दल (सेकुलर) फिर से सत्ता में आया.. उसके बाद 2009 में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में लोकप्रिय कांग्रेसी मुख्यमंत्री वाई एस राजशेखर रेड्डी की मृत्यु के बाद, उनके बेटे वाई एस जगन मोहन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश में अपने पिता के समर्थकों की मौत पर शोक व्यक्त करने के लिए एक 'यात्रा' शुरू की, हालांकि, कांग्रेस राजनीतिक कारणों से यात्रा से असहज थी और उसने मोहन रेड्डी को इसे बंद करने के लिए कहा, जिसे उन्होंने नहीं माना...उसके बाद जल्द ही उन्होंने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस छोड़ दी और एक नई पार्टी-वाई एस आर कांग्रेस पार्टी का गठन किया था.. और ऐसे ही Biju Janata Dal, Lok Janshakti Party, और Jammu and Kashmir Peoples Democratic Party भी टूटी थी..और सबसे ज्यादा ये साउथ में ही देखने को मिली है.
2019 के विधानसभा चुनाव से लेकर 2022 तक महाराष्ट्र में अब तक 3 बार मुख्यमंत्री बदल चुके हैं...सबसे पहले तो बीजेपी की ओर से देवेन्द्र फडणवीस और ने रातों रात शपथ ली...लेकिन वो बहुमत साबित नहीं कर सके....तो शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ गठबंधन करके सरकार बनाई...और अब खुद को असली शिवसेना बताकर बगावत करने वाले एकनाथ शिंदे ने उद्धव सरकार गिराकर खुद मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है. लेकिन फिलहाल एक सवाल सबसे बड़ा है औऱ वो ये है कि शिवसेना का क्या होगा...क्योंकि एकनाथ शिंदे ने शिवसेना से बगावत की है तो उद्धव उन्हें और उनके साथियों को दल-बदल कानून के तहत अयोग्य ठहराकर शिवसेना से बाहर का रास्ता दिखाने के जुगाड़ में हैं...वहीं शिंदे के पास शिवसेना के 37 से ज्यादा विधायक हैं तो दलबदल लागू नहीं होगा और शिवसेना के कर्ताधर्ता अब एकनाथ शिंदे बन जाएंगे...लेकिन ये कोई पहली बार नहीं होगा, जब किसी नेता की वजह से एक पार्टी का ऐसा बंटवारा होगा कि पूरी पार्टी का चाल-चरित्र और चेहरा ही बदल जाए...भारतीय राजनीति का इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है. नमस्कार...मैं हूं आशी और आप देख रहे हैं अनकट. (वाइप) जो स्थिति आज महाराष्ट्र में है वही स्थिति कभी आंध्र प्रदेश में भी हो गई थी... उस वक्त चंद्रबाबू नायडू ने अपने ससुर एनटीआर को धोखा देकर तेलगुदेशम पार्टी (टीडीपी) पर कब्जा कर लिया था.. एनटी रामा राव नही तेलगुदेशम पार्टी की स्थापना की थी... पार्टी के टूटने और उस पार्टी का पूरा चरित्र ही बदलने का सबसे पुराना और सबसे बड़ा उदाहण मिलता है साल 1964 में. तब वक्त भारत की चीन के साथ जंग खत्म ही हुई थी. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया यानी कि सीपीआई का शीर्ष नेतृत्व चाहता था कि पार्टी कार्यकर्ता कांग्रेस और प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू का समर्थन करें. लेकिन उसी पार्टी के कई लोगों ने कांग्रेस और उसकी विचारधारा का विरोध किया. नतीजा ये हुआ कि 100 से ज्यादा नेता सीपीआई से अलग हो गए और एक नई पार्टी बनाई, जिसका नाम रखा गया Communist Party of India (मार्कसिस्ट). फिलहाल केरल में इसी पार्टी की सरकार है, जिसने कई दूसरी छोटी पार्टियों से गठबंधन कर रखा है. फिर 1972 में, Tamil Acotr एमजी रामचंद्रन और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के नेता ने पार्टी फंड के मुद्दे पर द्रमुक सुप्रीमो करुणानिधि के खिलाफ विद्रोह किया था... उन्होंने पार्टी छोड़ दी और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी AIADMK की स्थापना की, जिसने 1977 में डीएमके को हराया और 1987 तक अगले 10 वर्षों तक सत्ता में रहा... रामचंद्रन की मृत्यु के बाद, पार्टी पर एक और तमिल सिनेमा स्टार जयललिता का शासन रहा... ऐसा ही नजारा साल 1992 में भी देखने को मिला, जब मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया की समाजवादी विचारधारा को मानने और पिछड़े वर्ग के साथ ही मुस्लिमों के हक में आवाज उठाने की दुहाई देकर जनता दल का साथ छोड़ दिया और नई पार्टी बनाई समाजवादी पार्टी. बाबरी मस्जिद गिरने के बाद 1993 में हुए चुनाव में इस पार्टी ने बीएसपी के साथ गठबंधन करके सरकार भी बनाई थी. 1997 में जब लालू यादव चारा घोटाले में फंस गए और बचने का कोई रास्ता नहीं था तो जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के बावजूद उन्होंने पार्टी तोड़ दी और अपनी नई पार्टी बनाई Rashtriya Janata Dal. बात अब करते हैं कि कैसे ममता दीदी की पार्टी टीएमसी बनी... अप्रैल 1996-97 में ममता ने कांग्रेस पर बंगाल में सीपीएम की कठपुतली होने का आरोप लगाया और 1997 में कांग्रेस से अलग हो गईं. इसके अगले ही साल 1 जनवरी 1998 को उन्होंने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस बनाई. वह पार्टी की अध्यक्ष बनीं. 1998 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी ने 8 सीटों पर कब्‍जा किया. उसके बाद 1999 में जब जनता दल बना... तब कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री जे एच पटेल के केंद्र में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन को समर्थन देने के फैसले पर पूर्व प्रधान मंत्री एच डी देवेगौड़ा सहित कई नेताओं ने जनता दल से असहमति जताई थी..फिर 2004 में कर्नाटक में सत्तारूढ़ गठबंधन का घटक बनने पर जनता दल (सेकुलर) को प्रमुखता मिली और 2019 में, कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के बाद कुमारस्वामी के नेतृत्व में जनता दल (सेकुलर) फिर से सत्ता में आया.. उसके बाद 2009 में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में लोकप्रिय कांग्रेसी मुख्यमंत्री वाई एस राजशेखर रेड्डी की मृत्यु के बाद, उनके बेटे वाई एस जगन मोहन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश में अपने पिता के समर्थकों की मौत पर शोक व्यक्त करने के लिए एक 'यात्रा' शुरू की, हालांकि, कांग्रेस राजनीतिक कारणों से यात्रा से असहज थी और उसने मोहन रेड्डी को इसे बंद करने के लिए कहा, जिसे उन्होंने नहीं माना...उसके बाद जल्द ही उन्होंने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस छोड़ दी और एक नई पार्टी-वाई एस आर कांग्रेस पार्टी का गठन किया था.. और ऐसे ही Biju Janata Dal, Lok Janshakti Party, और Jammu and Kashmir Peoples Democratic Party भी टूटी थी..और सबसे ज्यादा ये साउथ में ही देखने को मिली है.
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