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चीन ने एलन मस्क के सपने पर फेरा पानी! दिमाग से कंट्रोल हो रहा रोबोट, जानिए क्या है टेक्नोलॉजी

Brain-Computer Interface: ब्रेन–कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) तकनीक के क्षेत्र में चीन ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है.

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  • यह तकनीक एलन मस्क की न्यूरालिंक से आगे बढ़कर वास्तविक जीवन में उपयोगी।

Brain-Computer Interface: ब्रेन–कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) तकनीक के क्षेत्र में चीन ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है. चीनी वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि पूरी तरह लकवाग्रस्त व्यक्ति अब केवल अपने दिमाग के संकेतों से मशीनों और डिजिटल डिवाइस को कंट्रोल कर पा रहा है. यह उपलब्धि उस भविष्य की झलक देती है जिसकी कल्पना अब तक सिर्फ फिल्मों या एलन मस्क जैसे टेक दिग्गजों के विज़न में ही देखी जाती थी.

लैब से बाहर, असली दुनिया में कामयाबी

Interesting Engineering की रिपोर्ट के अनुसार, चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज से जुड़े वैज्ञानिकों ने 17 दिसंबर को जानकारी दी कि रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट झेल चुके एक मरीज ने पूरी तरह इम्प्लांटेड और वायरलेस ब्रेन इंटरफेस की मदद से स्मार्ट व्हीलचेयर, रोबोटिक डॉग और कंप्यूटर जैसे डिवाइसों को सफलतापूर्वक कंट्रोल किया है. यह पहली बार है जब इस तरह की तकनीक ने केवल प्रयोगशाला तक सीमित न रहकर रोजमर्रा की जिंदगी में स्थिर और भरोसेमंद प्रदर्शन किया है.

यह शोध सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन ब्रेन साइंस एंड इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी (CEBSIT) द्वारा साझा किया गया जिसमें बताया गया कि मरीज अब न सिर्फ खुद को मूव कर पा रहा है बल्कि नौकरी भी कर रहा है.

हादसे से उम्मीद तक का सफर

इस मरीज की पहचान मिस्टर झांग के रूप में हुई है. साल 2022 में एक गंभीर हादसे के बाद उन्हें रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगी जिससे उनका शरीर गर्दन के नीचे पूरी तरह से निष्क्रिय हो गया. लंबे समय तक चले पारंपरिक इलाज और फिजियोथेरेपी के बावजूद कोई खास सुधार नहीं हुआ. इसके बाद उन्होंने BCI के क्लिनिकल ट्रायल में हिस्सा लेने का फैसला किया.

20 जून को शंघाई के हुआशान अस्पताल में सर्जरी के जरिए उनके दिमाग में WRS01 नाम का वायरलेस ब्रेन–कंप्यूटर इंटरफेस लगाया गया. इसमें बेहद पतले और लचीले इलेक्ट्रोड्स दिमाग में डाले गए जबकि प्रोसेसर चिप को सिर के एक छोटे हिस्से में फिट किया गया.

सोच से कंट्रोल की ताकत

सर्जरी के बाद झांग को एक खास तरह की कैप पहनाई गई जो वायरलेस पावर सप्लाई देती है और दिमाग से आने वाले संकेतों को रिसीव करती है. सिर्फ दो से तीन हफ्तों की ट्रेनिंग के भीतर वह अपने विचारों के जरिए कंप्यूटर कर्सर और अन्य डिजिटल डिवाइस चलाने लगे. एक वीडियो में झांग कहते हैं कि हादसे के तीन साल बाद अब वह दोबारा काम कर पा रहे हैं जो उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है.

नौकरी, रोबोट और व्हीलचेयर, सब दिमाग के इशारों पर

यह तकनीक सिर्फ स्क्रीन तक सीमित नहीं है. झांग अब ब्रेन–कंट्रोल्ड कर्सर की मदद से रिमोट काम कर रहे हैं जिसमें वह वेंडिंग मशीनों से निकलने वाले प्रोडक्ट्स की जांच करते हैं. माना जा रहा है कि वह BCI ट्रायल में शामिल ऐसे पहले व्यक्ति हैं जो इस तकनीक की मदद से सैलरी वाली नौकरी कर रहे हैं.

इसके अलावा वह स्मार्ट व्हीलचेयर और रोबोटिक डॉग को भी अपने दिमाग से नियंत्रित कर सकते हैं. रोबोटिक डॉग उनके लिए खाना तक ला सकता है जबकि व्हीलचेयर से वह बाहर घूम सकते हैं और सीढ़ियां उतरने जैसे काम भी बिना मदद के कर पा रहे हैं.

एलन मस्क के विजन से एक कदम आगे चीन

यह उपलब्धि एलन मस्क की Neuralink परियोजना की याद दिलाती है लेकिन फर्क साफ है. जहां Neuralink अभी शुरुआती स्तर पर गेम्स और सीमित डिजिटल टास्क पर फोकस कर रहा है, वहीं चीन की यह तकनीक सीधे रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल हो रही है.

दिमाग के संकेतों को काम में बदलने के लिए सिर्फ इलेक्ट्रोड काफी नहीं होते. इसके लिए तेज वायरलेस नेटवर्क, भरोसेमंद AI सिस्टम और एडवांस रोबोटिक्स की जरूरत होती है. 5G, आने वाली 6G तकनीक, सेमीकंडक्टर और रोबोटिक्स में चीन की मजबूती ने इस पूरे सिस्टम को एक साथ जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है.

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