EXCLUSIVE: ईडी के पास मौजूद हैं चिदंबरम के खिलाफ पुख्ता सबूत, बढ़नेवाली हैं पूर्व वित्त मंत्री की मुश्किलें
पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ईडी ने उनके खिलाफ मजबूत सुबूत जुटाये हैं। ये वो दस्तावेज हैं जिनसे ये साफ होता है कि पूर्व मंत्री ने रिश्वत ली थी।

नई दिल्ली, ओमप्रकाश तिवारी। आईएनएक्स मीडिया केस में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की मुश्किल और बढ़ सकती हैं। हमारे सहयोगी न्यूज चैनल एबीपी न्यूज के पास प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के वो दस्तावेज हैं जिनके द्वारा रिश्वत की पुष्टि होती है। सीबीआई ने इन दस्तावेजों को ईडी से मांगा था। आपको बता दें कि चिंदबरम 30 अगस्त तक सीबीआई की कस्टडी में हैं।
चिदंबरम के ट्रस्ट को मिले दान में लाखों रुपए
सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई को भेजे ईडी के दस्तावेजों में लिखा है कि जिस कंपनी को रिश्वत की रकम भेजी गई थी, उसी कंपनी ने चिदंबरम के ट्रस्ट को लाखों रुपए दान दिए थे। इनके मुताबिक नार्थस्टार कंपनी ने पलानीएप्पा चेटियर ट्रस्ट को 33.05 लाख रुपए की रकम दान में दी थी। ट्रस्ट का पूरा नाम L. Ct. L. Palaniappa Chettiar Trust है।
ईडी के दस्तावेज के मुताबिक, इसके ट्रस्टी पी चिदंबरम हैं। आईएनएक्स के दस्तावेजों में साफ तौर पर लिखा है कि 26 सितंबर 2008 को नार्थस्टार कंपनी को 60 लाख रुपये दिए गए थे। सीबीआई ने चिदंबरम से ट्रस्ट के बारे में भी पूछताछ की है। जांच एजेंसियां अब ट्रस्ट के दस्तावेजों को खोजने में लगी हुई हैं। अगर रिश्वत का सीधा संबंध चिदंबरम से हुआ तो उनकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
इस तरह फंसे चिदंबरम
बता दें कि चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार एवं धनशोधन मामले में सीबीआई ने 21 अगस्त को हिरासत में लिया था। इंद्राणी को उनकी बेटी शीना बोरा की हत्या के मामले में अदालत में पेश किया गया था। उन्होंने कहा कि आईएनएक्स मीडिया मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री के बेटे कार्ति चिदंबरम को दी गई जमानत भी रद्द कर दी जानी चाहिए।
इससे पहले इंद्राणी ने धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत अपने बयान दर्ज कराए थे और दावा किया था कि वह और पीटर पी. चिदंबरम से दिल्ली के नॉर्थ ब्लॉक में उनके आवास पर मिले थे। उन्होंने अपने बयान में यह भी दावा किया कि पूर्व केंद्रीय मंत्री ने उनसे कहा था कि वे उनके बेटे कार्ति की उसके कारोबार में मदद करें और आईएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड (एफआईपीबी) से मंजूरी के बदले विदेशों में भुगतान करें।
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