छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पर बड़ा वार! बीजापुर में सुरक्षाबलों ने 2 कुख्यात इनामी नक्सली मार गिराए
Chhattisgarh: बीजापुर में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में 2 नक्सली मारे गए, जिन पर 7 लाख रुपये का इनाम था. डीआरजी, बस्तर फाइटर्स और CRPF की संयुक्त कार्रवाई को इस अभियान में बड़ी सफलता माना जा रहा है.

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच एक बार फिर मुठभेड़ की खबर सामने आई है. इस मुढभेड़ में दो कुख्यात नक्सली मारे गए हैं. यह मुठभेड़ पामेड़ थाना क्षेत्र के काऊरगट्टा-गुंडराजगुड़े़म गांव के जंगल में 28 जनवरी सुबह हुई. मारे गए नक्सलियों पर कुल सात लाख रुपये का इनाम घोषित था. पुलिस अधिकारियों ने 29 जनवरी को यह जानकारी दी.
कैसे हुई मुठभेड़ और क्या बरामद हुआ?
बीजापुर के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार यादव के अनुसार, पामेड़ एरिया कमेटी के सशस्त्र माओवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) की टीम को अभियान पर भेजा गया था. 28 जनवरी की सुबह करीब सात बजे से डीआरजी के जवानों और माओवादियों के बीच लगातार गोलीबारी होती रही.
मुठभेड़ थमने के बाद जब सुरक्षाबलों ने इलाके की तलाशी ली, तो घटनास्थल से 2 माओवादियों के शव बरामद हुए. इसके साथ ही एक एके-47 राइफल, नौ एमएम की एक पिस्टल और अन्य नक्सली सामग्री भी जब्त की गई. पुलिस के अनुसार, यह अभियान पूरी तरह योजनाबद्ध था और सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेराबंदी कर कार्रवाई की.
मारे गए नक्सलियों की पहचान और अपराध
पुलिस ने मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों की पहचान पामेड़ एरिया कमेटी के सदस्य प्रदीप उर्फ जोगा और नक्सली भीमा वेको के रूप में की है. अधिकारियों के मुताबिक, प्रदीप पर पांच लाख रुपये और भीमा पर 2 लाख रुपये का इनाम घोषित था.
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने बताया कि दोनों माओवादी क्षेत्र में कई हिंसक घटनाओं और नागरिकों की हत्याओं में शामिल रहे हैं. इनमें हाल ही में कावरगट्टा ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच भीमा मड़कम की हत्या की घटना भी शामिल है. पुलिस का कहना है कि दोनों नक्सली लंबे समय से सुरक्षाबलों के लिए चुनौती बने हुए थे.
सरकार की प्रतिक्रिया और नक्सल विरोधी अभियान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि सुरक्षाबलों के साहस से बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास का नया अध्याय लिखा जा रहा है. उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि डीआरजी, बस्तर फाइटर्स और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने अदम्य साहस दिखाते हुए दो कुख्यात माओवादियों को मार गिराया है.
मुख्यमंत्री ने इसे ‘डबल इंजन सरकार’ के सुशासन का परिणाम बताया. इस मुठभेड़ के साथ ही इस साल अब तक छत्तीसगढ़ में अलग-अलग मुठभेड़ों में कम से कम 22 माओवादी मारे जा चुके हैं. इससे पहले तीन जनवरी को बस्तर क्षेत्र में दो मुठभेड़ों में 14 माओवादियों को ढेर किया गया था. केंद्र सरकार ने वामपंथी उग्रवाद के खात्मे के लिए 31 मार्च की समय सीमा तय की है.



















