Chhattisgarh News: धर्मांतरण के खिलाफ छत्तीसगढ़ में नया कानून पास, जानें जुर्माने का प्रावधान
Chhattisgarh News in Hindi: छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पास हो गया है. अवैध धर्मांतरण पर सख्त सजा का प्रावधान है. नाबालिग, महिला मामलों में सजा बढ़ेगी और मददगारों पर भी कार्रवाई होगी.

छत्तीसगढ़ विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पास हो गया है. इस विधेयक के मुताबिक छत्तीसगढ़ में अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने के मामले में दोषी पाए जाने पर 7 से 10 साल तक कि कैद और 5 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा अगर पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति- जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग या आदिवासी वर्ग से हो तो सजा बढ़कर 10 से 20 साल और 10 लाख रुपये जुर्माना लगाया जाएगा. वहीं सामूहिक धर्मांतरण के मामले में सजा 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक और 25 लाख रुपये जुर्माना लगाया जाएगा.
जानकारी के अनुसार, गुरुवार (20 मार्च) को छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में इस बिल को पेश किया. नया कानून साल 1968 में बने धर्मांतरण कानून की जगह लगा. जिसे सरकार ने वर्तमान आधुनिक तकनीकी और सामाजिक परिस्थितियों के हिसाब से नाकाफी माना था और इसीलिए नए धर्म स्वतंत्र विधायक की जरूरत पड़ी. सरकार का कहना है कि इससे छत्तीसगढ़ में लगातार तेजी से हो रहे धर्मांतरण के मामलों को रोका जा सकेगा.
सरकार के मुताबिक इस बिल का मकसद जबरदस्ती, बलपूर्वक, धन का लालच देकर या गलत जानकारी देकर किए जाने वाले धर्मांतरण पर लगाम लगाना है. विधानसभा में धनबाद सिविल पास कर दिया गया इस दौरान बीजेपी विधायकों ने सदन में जय श्री राम के नारे भी लगाए.
विपक्ष ने बिल का विरोध कर सदन से किया वाकआउट
छत्तीसगढ़ विधानसभा के सदन में जब धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पेश किया गया, तो विपक्ष ने इस बिल का विरोध कर सदन से वाकआउट कर दिया. विपक्ष का कहना है कि बल सदन में लाने के पहले हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों के साथ-साथ तमाम विपक्षी विधायकों से भी इस मामले पर राय लेनी चाहिए थी. हालांकि विपक्ष की अनुपस्थिति के बावजूद ध्वनि मत से बिल को पास कर दिया गया.
दोबारा धर्मपरिवर्तन कराने वालों को आजीवन कारावास
धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति एक बार धर्मांतरण कराने के मामले में जेल जा चुका है और सजा काट चुका है. उसके बाद भी अगर सजा पूरी होने के बाद वह किसी और व्यक्ति का धर्म परिवर्तन करते हुए दोषी पाया जाता है, तो उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाएगी. हालांकि परिस्थितियों के हिसाब से न्यायालय सजा की अवधि को कम कर सकता है.
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धर्मांतरण कराने में मददगारों पर भी होगा एक्शन
साथ ही कानून में अवैध धर्मांतरण करने वालों की मददगारों पर भी सख्त एक्शन लिया जाएगा. अवैध धर्मांतरण करने में मदद करने वालों को 6 महीने से लेकर 3 साल तक की कैद और 2 लाख रुपये तक जमाने की सजा हो सकती है. स्वेच्छा से धर्म बदलने के लिए कलेक्टर को 60 दिन पहले आवेदन देना होगा. नए विधेयक के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति को स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना है तो उसे 60 दिन पहले कलेक्टर को इसका आवेदन देना होगा. यह नियम सिर्फ धर्म बदलने वाले पर नहीं बल्कि धर्म बदलवाने वाले पादरी और मौलवी पर भी लागू होगा. उन्हें भी करीब सात दिन पहले यह आवेदन कलेक्टर को देना होगा. अगर धर्म परिवर्तन करने वाले और परिवर्तन करवाने वाले मौलवी या पादरी 60 दिन पहले इसकी सूचना कलेक्टर को नहीं देते तो धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को वैध माना जाएगा. इस सूरत में तत्काल गिरफ्तारी का प्रावधान है.
विदेशी फंडिंग वाली संस्थाओं पर भी कसेगा शिकंजा
लव जिहाद जैसी वारदातों को रोकने के लिए धर्मस्वातंत्र्य विधेयक 2026 में प्रावधान के मुताबिक सिर्फ शादी के लिए धर्म परिवर्तन को पूरी तरह से अवैध माना जाएगा. शादी के इच्छुक युवक युवतियों को भी 2 महीने पहले जिला मजिस्ट्रेट को धर्म परिवर्तन के इरादे की घोषणा करनी होगी. जिला मजिस्ट्रेट इसकी जांच करेंगे और अगर धर्म परिवर्तन के मकसद से शादी की गई है तो ऐसे तत्काल अवैध घोषित कर दिया जाएगा. इसके साथ ही विदेशी फंडिंग लेने वाली संस्थाओं पर भी शिकंजा कसा जा रहा है. कानून के मुताबिक विदेशी फंडिंग लेकर सामूहिक धर्म परिवर्तन करने वाली संस्थाओं पर पहली नजर रखी जाएगी. कोई संस्था प्रबंध देकर सामूहिक धर्मांतरण में शामिल पाई जाती है तो उसका रजिस्ट्रेशन तत्काल निरस्त किया जाएगा और उसे पर भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा.
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