जंग के बीच जापान भी चौंकन्ना, चीन तक मार करने वाली मिसाइलें कर डालीं तैनात, मची खलबली
जापान ने आत्मरक्षा की नीति में बड़ा बदलाव करते हुए अपग्रेडेड टाइप-12 मिसाइलों को कुमामोटो प्रांत के केंगून शिविर में तैनात किया है. इनकी मारक क्षमता चीन तक बताई जा रही है.

जापान की पहली लंबी दूरी की मिसाइल को दक्षिण-पश्चिमी सेना के शिविर में तैनात किया गया है. अधिकारियों ने मंगलवार (31 मार्च) को यह जानकारी दी. पश्चिम एशिया में चल रही उथल पुथल के बीच जापान भी अपनी सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में लगा हुआ है.
न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, जापान की मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज द्वारा विकसित और निर्मित अपग्रेडेड टाइप-12 भूमि-से-जहाज तक मार कराने वाली मिसाइलों को कुमामोटो प्रांत के केंगून शिविर में तैनात किया गया है.
1,000 किलोमीटर तक मारक क्षमता
रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइज़ुमी ने पत्रकारों से कहा, "यह तैनाती जापान के दृढ़ संकल्प और आत्मरक्षा करने की क्षमता को दर्शाती है." अपग्रेडेड टाइप-12 मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 1,000 किलोमीटर (620 मील) है, जो मूल मिसाइल की 200 किलोमीटर (125 मील) की मारक क्षमता से काफी ज्यादा है और इसकी मारक क्षमता चीन तक है.
आत्मरक्षा की नीति में बड़ा बदलाव
लंबी दूरी की मिसाइल की तैनाती से जापान को स्टैंडऑफ की ताकत मिल गई है, जिसका मतलब है कि अब जापान दूर से ही दुश्मन के मिसाइल ठिकानों पर हमला कर सकता है. यह देश की शांतिवादी संविधान के तहत लंबे समय से चली आ रही आत्मरक्षा की नीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है. आवासीय क्षेत्र के पास तैनाती का विरोध कर रहे निवासियों ने केंगून शिविर के बाहर प्रदर्शन किया और कहा कि इससे तनाव बढ़ेगा और संभावित दुश्मनों द्वारा क्षेत्र को निशाना बनाए जाने का खतरा बढ़ जाएगा.
मिसाइल तैनाती के पीछे का कारण
जापान के रक्षा मंत्रालय ने टाइप-12 मिसाइल को तैनात करने का फैसला 2024 में किया था. मिसाइल तैनाती के पीछे का कारण ताइवान के पास पूर्वी चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य उपस्थिति को माना जा रहा है क्योंकि चीन ताइवान को अपना हिस्सा बताता है और उसके खिलाफ सैन्य शक्ति के इस्तेमाल की भी धमकियां देता है. अमेरिका और उसके दूसरे सहयोगी देश ताइवान को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता नहीं देते हैं, लेकिन उसकी रक्षा की बात करते हैं. बता दें कि अमेरिका ताइवान की रक्षा और उसे हथियार देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य भी है.
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