उत्तराखंड: पिथौरागढ़ के गांव में खराब हालत के चलते मेडिकल सेंटर पर ताला, डॉक्टर ने लगाया प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
उत्तराखंड के एक गांव के मेडिकल सेंटर पर इस कोरोना काल के वक्त ताला लगा मिला. मेडिकल सेंटर के डॉक्टर का कहना है कि सेंटर की हालत खराब है जिसकी जानकारी प्रशासन को कई बार दी गई है लेकिन उन्हें आश्वासन के अलावा उन्हें और कुछ नहीं मिला.

उत्तराखंड में कोरोना के चलते स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल बना हुआ है. पिथौरागढ़ के एक गांव के मेडिकल सेंटर पर ताला लगा मिला है. मेडिकल सेंटर के डॉक्टर ने बताया कि प्रशासन को कई बार इस सेंटर की हालत के बारे में खबर की हुई है लेकिन आश्वासन के अलावा उन्हें और कुछ नहीं मिलता.
दरअसल, पिथौरागढ़ से करीब 80 किलोमीटर दूर एक बरम नाम से गांव है. इस गांव में एक ही आयुर्वेदिक चिकित्सालय है जिस पर करीब आसपास के 8 से 10 गांव निर्भर हैं. जब एबीपी न्यूज़ की टीम इस मेडिकल सेंटर पर पहुंची तो यहां ताला लगा मिला.
सेंटर की इस बुरी हालत की सूचना प्रशासन को कई बार की गई है- डॉक्टर
अस्पताल के दरवाजे पर ही डॉक्टर का नम्बर लिखा था जब एबीपी न्यूज़ की टीम ने डॉक्टर रमेश चंद को फोन किया उन्होंने बताया कि वो अभी सरकार की तरफ से दी गई मेडिकल किट को बांटने के लिए गांव में गए हुए हैं. इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि, फार्मेसिस्ट होगा लेकिन वो भी नहीं था.
डॉक्टर रमेश चंद का साफ कहना था कि ये मेडिकल सेंटर पिछले कई सालों से काफी बुरी हालत में है इस बारे में कई बार प्रशासन को बताया गया है लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन के अलावा और कुछ नहीं मिलता. डॉक्टर रमेश चंद ने बताया कि कोरोना के इस काल में इस गांव में एक बार कैम्प लगा था लेकिन कोई भी टेस्ट करवाने नहीं आया.
बरसात में अस्पताल की छत से पानी टपकता है- ग्रामीण
वहीं, उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं में कमी तो है ही लेकिन जनता भी लापरवाही कर रही है. आसपास के गांव के लोगों से जब टीम ने बात की तो उन्होंने बताया कि इस अस्पताल में दवाई लेने कोई नहीं आता क्योंकि इलाज के लिए या तो इन्हें 80 किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ जाना पड़ता है या फिर धरचुला.
एक ग्रामीण ने बताया डॉक्टर तो आते है लेकिन अस्पताल की हालात बहुत बुरी है. बरसात में सब खराब हो जाता है. कोई इलाज के लिए नहीं आता है. 12-1 बजे तक सब चले जाते हैं. उसके बाद अगर किसी को समस्या होती हो तो धरचुला और पिथौरागढ़ जाना पड़ता है. हम स्वस्थ थे इस लिए नहीं करवायी जांच.
सीरियस पेशेंट को बड़े अस्पताल रेफर कर दिया जाता है- फार्मेसिस्ट राहुल
खुद ग्रामीण इस बात को कुबूल कर रहे हैं कि उन्होंने अपना कोरोना टेस्ट नहीं करवाया है. इसी बीच मेडिकल सेंटर के फार्मेसिस्ट राहुल टीम के हाथ लग गए और उन्होंने बताया कि जब बारिश होती है तो पूरे अस्पताल की छत टपकने लगती है. अस्पताल में गंदगी हो जाती है. राहुल का कहना था कि अगर यहां कोई सीरियस पेशेंट आ जाता है उसे आगे रेफेर कर देते हैं क्योंकि सुविधाओं के नाम पर यहां कुछ नही है.
आपको बता की उत्तराखंड सरकार ने जिले के सभी अस्पतालों को कोविड केअर सेंटर बना दिया है. लेकिन इस मेडिकल सेंटर की हालत को देखकर आप ये अंदाजा लगा सकते है स्वास्थ्य के नाम पर कैसे कोरोना के इस काल में लोगों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है.
यह भी पढ़ें.
नवजोत सिंह सिद्धू ने किया किसानों का समर्थन, पटियाला-अमृतसर में अपने घरों पर लगाए काले झंडे























