स्वतंत्र पत्रकारिता की आड़ में क्रिएटर्स पर उठे सवाल
आंदोलनों के बीच स्वतंत्र पत्रकारों और कंटेंट क्रिएटर्स की भूमिका पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. पुलिस और कई मेन स्ट्रीम मीडिया संस्थानों में बहस है कि ऐसे लोगों को पत्रकार माना जाए या नहीं?

इंडिया गठबंधन और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शनों के दौरान कुछ स्वतंत्र पत्रकारों और कंटेंट क्रिएटर्स की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं. सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि ये क्रिएटर्स पैसे लेकर कंटेंट बनाते रहे हैं. इनकी कमाई का मुख्य जरिया व्यूज़ से मिलने वाली रकम के साथ पेड कॉन्टेंट बनाना है.
लंबे समय तक मीडिया जगत से जुड़े पत्रकारों की चिंता इसलिए है क्योंकि ये लोग खुद को निष्पक्ष और आम लोगों का साथ देने वाले बताते हैं, लेकिन उनकी निष्पक्षता और पैसे के लेन-देन को लेकर खुलासों ने सवालिया चिह्न लगा दिया है.
कई ऐसे सबूत सामने आए हैं, जब उनसे अलग-अलग कैंपेन के लिए संपर्क किया गया तो उन्होंने किसी खास प्रोग्राम को आगे बढ़ाने के लिए पैसों की मांग (कोटेशन) की. बताई गई रकम में एक रील की फीस से लेकर बड़े कंटेंट पैकेज तक शामिल थे. कुछ कोटेशन 1.6 लाख रुपये तक भी थे. हालांकि, ये कॉन्टेंट क्रिएटर्स मेन स्ट्रीम मीडिया घरानों और संस्थानों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं और सरकार की ओर झुके होने का आरोप लगाते हैं.
इन क्रिएटर्स में अनेक नाम हैं. ऐसे दावे हैं कि जब अलग-अलग मौकों पर इन क्रिएटर्स से संपर्क किया गया तो उन्होंने रील्स और पैकेज आदि के लिए पैसों की डिमांड की. मीडिया के जानकारों का कहना है कि जो खुद को स्वतंत्र बताता है, उसे यह साफ बताना चाहिए कि उसने पैसे लेकर कंटेंट बनाया है या नहीं. अगर कोई पैसे लेकर किसी पार्टी या मुद्दे का समर्थन करता है, तो लोगों का भरोसा टूटता है.
'न्यूज़ कैप्सूल' पर आने वालीं ममता सिंह ने कथित तौर पर एक रील के लिए 40,000 रुपये की कीमत बताई. वहीं 'न्यूज़ कैप्सूल' से ही जुड़ी रहीं एक और क्रिएटर प्रिया सिंह ने कथित तौर पर SP के लिए पॉलिटिकल कंटेंट वाली हर इंस्टाग्राम रील के लिए 30,000–35,000 रुपये की कीमत बताई.
दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस अधिकारियों से बहस करते हुए नजर आईं शिवानी गौतम ने समाजवादी पार्टी के साथ कथित तौर पर साथ काम करने में दिलचस्पी दिखाई और आगे बातचीत के लिए अपना मोबाइल नंबर शेयर किया. दिलचस्प है कि इस क्रिएटर ने दावा किया था कि BJP IT सेल ने उन्हें पेड वीडियो बनाने का ऑफर दिया था, जिसे उन्होंने पॉलिटिकल कंटेंट के लिए पत्रकारों को पैसे देने की कोशिशों के उदाहरण के तौर पर सबके सामने उजागर किया था.
ज़ैश मलिक भी कथित तौर पर पार्टी के लिए पॉलिटिकल कंटेंट बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए तैयार दिखे. वहीं प्रिशा यादव के सामने जब SP के लिए इंस्टाग्राम कंटेंट बनाने का प्रस्ताव रखा गया, तो वह भी पार्टी के साथ काम करने को तैयार थीं. कंटेंट पैकेज के लिए उन्होंने 13,000 से 85,000 रुपये तक की डिमांड की.
इसी तरह प्रिशा यादव, मनीष राजपूत, गोविंद गुर्जर, वंदना मीना, मिलन सर (अनिल कुमार, जो ‘खोटा सिक्का’ नाम से अकाउंट चलाते हैं), ‘दैट्स हर पॉडकास्ट’ की नेहा शर्मा और विशाल कादयान को लेकर भी सबूत हाथ लगे हैं, जिसमें इन्होंने कथित तौर पर कंटेंट के लिए पैसों की डिमांड की.





















