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Coronavirus: मुंबई में शुरू हुआ सेरो सर्वेक्षण, पीएम मोदी भी दे रहे हैं इस पर जोर

इस सर्वेक्षण के आधार पर अगस्त महीने में कोरोना के खिलाफ जारी लड़ाई में निर्णायक फैसले लिए जाएंगे. पढ़े आखिर सेरो सर्वेक्षण क्या है और ये कैसे मदद करेगा?

मुंबई: वर्तमान में कोरोना के खिलाफ लड़ाई एक बहुत ही महत्वपूर्ण और निर्णायक मोड़ पर पहुंची है. भारत सरकार कोरोना वायरस पर रोक लगाने के लिए तमाम प्रयास कर रही है और ये प्रयास अब बहुत ही निर्णायक चरण पर है. यह चरण सेरो सर्वेक्षण का है. कोरोना के खिलाफ लड़ने के लिए सरकार का अगला कदम ये सेरो सर्वेक्षण तय करेगा. इस सर्वेक्षण के निष्कर्षों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इसी के आधार पर केंद्र सरकार कोरोना पर क़ाबू पाने के लिए नया कार्यक्रम तय करेगी. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पर जो दे रहे हैं.

देश का कोरोना कैपिटल कहे जाने वाले मुंबई में अब कोरोना का क़हर धीरे धीरे कम हो रहा है. कोरोना से ठीक हुए मरीज़ और कोरोना पॉज़िटिव मरीज़ों को लेकर तो रिसर्च चल ही रहा है लेकिन देश में कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपनी अच्छी इम्यूनिटी के दम पर कोरोना पर मात की और उन्हें पता तक नहीं चला. ऐसे लोग ये कैसे संभव कर पाए, कैसे लोग कोरोना का इलाज किए बिना ही ठीक हो गए, इसी तरह के कोरोना से बचने के लिए हर संभव उपाय खोजने के लिए मुंबई में सेरो सर्वेक्षण किया जा रहा है.

सेरो सर्वेक्षण है क्या?

बीएमसी के हेल्थ ऑफ़िसर भूपेन्द्र पाटिल ने एबीपी न्यूज़ को जानकारी देते हुए कहा, “सेरो सर्वेक्षण कोरोना से लड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण हथियार है. इस सर्वेक्षण के ज़रिए कोरोना से रक्षा कैसे की जा सकेगी और कोरोना कैसे और क्यों किसी व्यक्ति को होता है इसका डेटा उपलब्ध कराएगा. शुरुआत में मुंबई के लोग इस सेरो सर्वेक्षण से डर गए थे. वे इस तरह के सर्वेक्षण से इनकार कर रहे थे. लेकिन बाद में लोगों ने इस को करने के लिए हामी भरी.”

सेरो टेस्ट में ब्लड सैंपल लेकर सर्वे किया जाता है. इस टेस्ट से पता चलता है कि किस व्यक्ति को कोरोना हुए और वो ठीक हो गया? किसे नहीं हुआ और किस व्यक्ति में कोरोना के ख़िलाफ़ एंटी बॉडी बना और कैसे?

बीएमसी ने मुंबई के 3 वार्डों में सेरो सर्वेक्षण शुरू किया. चेंबूर, माटुंगा और दहिसर परिसर में इसे शुरू किया गया. हर वॉर्ड में 3500 सैंपल लिए गए. बीएमसी इस सर्वेक्षण का दूसरा चरण 18 जुलाई से किया जाएगा. बताया जा रहा है कि ये सर्वेक्षण करने पर खुद  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ज़ोर दे रहे है.

इस सर्वेक्षण के आधार पर, अगस्त के महीने में कोरोना के लड़ाई में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे जिनकी घोषणा खुद प्रधानमंत्री करेंगे. यही वजह है कि मुंबई की तरह देश के दूसरे राज्यों में भी सेरो सर्वेक्षण शुरु होने जा रहा है. मुंबई में लोग भी इस सर्वे में हिस्सा ले रहे हैं.

यह सर्वेक्षण 12 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों में किया जाता है. 10,000 से ज्यादा नमूने झुग्गियों, घनी आबादी वाले क्षेत्रों और अन्य विभागों से एकत्र किए गए हैं. इन नमूनों की जाँच से ये पता लगाया जाएगा कि शरीर में कितने कोरोना एंटीबॉडी का उत्पादन होता है? एंटीबॉडी का उपयोग कोविड संक्रमण को रोकने में कैसे किया जाएगा, इसकी जांच होगी.

इस सेरो सर्वेक्षण में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और फ्रंट लाइन वर्कर का एक अलग सर्वेक्षण शामिल होगा. इस सेरो सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य सामान्य आबादी में कोविड के भौगोलिक प्रसार को समझना है. इससे कोरोना संक्रमण के प्रसार को समझा जा सकता है.

यह संक्रमण द्वारा उत्पन्न सामाजिक और जनसांख्यिकी जोखिमों को निर्धारित करने में मदद करेगा और इस आधार पर कोरोना से निपटने के लिए आगे की रणनीति तय की जाएगी.

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