'पर उपदेश कुशल बहुतेरे', खरगे ने प्रधानमंत्री की अपील को बताया 12 साल की नाकामी, जानें क्या कहा?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने महंगाई, आर्थिक संकट और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपीलों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है.

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आर्थिक मुद्दों को लेकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि जब देश में “गरीबी में आटा गीला” जैसी स्थिति बनी हुई है, तब प्रधानमंत्री लोगों को बचत करने का पाठ पढ़ा रहे हैं.
खरगे ने कहा कि 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद कांग्रेस पार्टी ने हर पहलू को सामने रखा था. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अर्थव्यवस्था की स्थिति, रुपये में गिरावट, पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी, खाद की कमी, फूड सिक्योरिटी पर खतरे, दवाइयों की बढ़ती कीमतों और एमएसएमई सेक्टर के संकट जैसे मुद्दों को लगातार उठाया.
“प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार में व्यस्त थे”
खरगे ने सवाल उठाया कि जब देश इन समस्याओं से जूझ रहा था, तब प्रधानमंत्री चुनावी प्रचार और रोड शो में व्यस्त क्यों थे. उन्होंने कहा कि उस समय सरकार की ओर से कहा जा रहा था कि “स्थिति काबू में है” और “सब चंगा सी”. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि अब चुनाव खत्म होने के बाद लोगों को उपदेश दिया जा रहा है कि यह मत खरीदिए, वह मत करिए, बचत करिए और घर से काम करिए.
उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि अपनी 12 वर्षों की नाकामी का ठीकरा जनता पर नहीं फोड़ना चाहिए. खरगे ने गोस्वामी तुलसीदास की पंक्ति “पर उपदेश कुशल बहुतेरे” का भी उल्लेख किया.
राहुल गांधी ने भी साधा निशाना
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला. उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री ने जनता से सोना नहीं खरीदने, पेट्रोल का कम इस्तेमाल करने और अन्य चीजों में कटौती करने की अपील की है, जो सरकार की नाकामी का सबूत है. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जनता से त्याग की मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि लोगों से कहा जा रहा है कि सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम इस्तेमाल करो, खाद और खाने का तेल कम उपयोग करो, मेट्रो में सफर करो और घर से काम करो.
“यह उपदेश नहीं, नाकामी के सबूत”
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि यह उपदेश नहीं बल्कि सरकार की विफलता के संकेत हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि 12 साल में देश को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया गया है कि अब जनता को बताया जा रहा है कि क्या खरीदना है और क्या नहीं. उन्होंने कहा कि हर बार जिम्मेदारी जनता पर डाल दी जाती है ताकि सरकार खुद जवाबदेही से बच सके. राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि अब देश चलाना “कम्प्रोमाइज्ड पीएम” के बस की बात नहीं रह गई है.
प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा था?
दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा था कि केंद्र सरकार युद्ध के प्रतिकूल प्रभावों से लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने नागरिकों से चुनौतियों से निपटने और देश की मदद के लिए सहयोग करने की अपील की थी. भारतीय जनता पार्टी की तेलंगाना इकाई की एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि युद्ध के कारण पेट्रोल और उर्वरक की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने कहा कि जब सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ता है तो संकट से निपटना और मुश्किल हो जाता है.






















