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जामिया हिंसा: SIT ने की पुलिस एक्शन की जांच, 3 घंटे तक सबूतों को खंगाला, कई लोगों से की पूछताछ

चार्जशीट में दावा किया गया है कि सभी प्रदर्शनकारियों को पहले से ही यह बता दिया गया था कि अगर पुलिस पीछे भागती है तो सभी को यूनिवर्सिटी में घुस जाना है. क्योंकि पुलिस यूनिवर्सिटी के अंदर नहीं आएगी.

नई दिल्लीः दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने जामिया यूनिवर्सिटी में 15 दिसंबर 2019 को हुए दंगे के मामले में साकेत कोर्ट में स्थित साउथ ईस्ट जिले की सीएमएम की अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है. इस चार्जशीट में दिल्ली पुलिस ने खुलासा किया है कि 15 दिसंबर को हुए दंगे के मामले में दिल्ली पुलिस ने 6 लोगों को गिरफ्तार किया था, जो जामिया नगर इलाके के अबुल फजल एन्क्लेव, बटला हाउस आदि इलाके के रहने वाले हैं. इन सभी ने पूछताछ में बेहद ही चौकाने वाले खुलासे किये हैं.

आरोपियों का कहना है कि इन्हें और इस प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों को अलग-अलग पार्टियों के स्थानीय नेताओं और जामिया के कुछ वर्तमान व पूर्व छात्रों ने कुछ दिन पहले से ही भड़काना शुरू कर दिया था. सभी को डर दिखाया गया था कि अगर विरोध नहीं किया गया तो मुसलमानों को देश से निकाल दिया जाएगा.

क्या कहकर भड़काया गया था

क्राइम ब्रांच की एसआईटी द्वारा दायर की गई चार्जशीट में यह दावा किया गया है कि गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में खुलासा किया है कि इन लोगों को यह कहकर भड़काया गया था कि "अब मोदी का विरोध नहीं किया तो मोदी सबको निकालने का कानून ला रहा है, और सभी मुस्लिमों को जल्दी ही देश से निकाल देगा."

पुलिस का दावा है कि गिरफ्तार आरोपियों ने यह भी खुलासा किया कि स्थानीय नेताओं और जामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों ने यह भी कहा था कि यह मोदी को अपनी ताकत दिखाने का समय है कि मुसलमान क्या चीज है ? इसलिए सभी लोग प्रदर्शन में शामिल हुए.

प्रदर्शनकारियों को जामिया यूनिवर्सिटी में घुसने के लिए भी कहा गया था

चार्जशीट में दावा किया गया है कि सभी प्रदर्शनकारियों को पहले से ही यह बता दिया गया था कि अगर पुलिस पीछे भागती है तो सभी को यूनिवर्सिटी में घुस जाना है. क्योंकि पुलिस यूनिवर्सिटी के अंदर नहीं आएगी. इतना ही नहीं सभी लोगों को यह भी कहा गया था कि पुलिस और सरकार का डटकर विरोध करना है.

इन 6 आरोपियों से पुलिस ने की है पूछताछ

चार्जशीट में जिन 6 आरोपियों के नाम का जिक्र किया गया है, उनके नाम इस प्रकार है दानिश उर्फ ज़फ़र, शरीफ अहमद उर्फ बादशाह, दिलशाद उर्फ अमन, मोहम्मद हनीफ उर्फ राजा समीर अहमद और मोहम्मद दानिश. इन सभी को 16 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था.

ये सभी जामिया नगर के अलग अलग इलाकों जैसे अबुल फजल एन्क्लेव, बटला हाउस आदि के रहने वाले हैं. पुलिस ने इन्हीं के खुलासे पर चार्जशीट में यह खुलासा किया है कि सभी प्रदर्शनकारियों को मुसलमानों को देश से बाहर निकालने के नाम से डराया और भड़काया गया था.

किन पर लगाया गया है भड़काने का आरोप

क्राइम ब्रांच ने इस चार्जशीट में यह दावा किया है कि गिरफ्तार आरोपियों से हुई पूछताछ में यह पता चला है कि प्रदर्शनकारियों को भड़काने के पीछे आसिफ खान(पूर्व विधायक), आशु खान नेता, मुस्तफा नेता, हैदर नेता के अलावा जामिया के छात्र चंदन कुमार, आसिफ तन्हा और कासिम उस्मानी हैं.

क्राइम ब्रांच का दावा हल्का पुलिस का प्रयोग किया गया था

चार्जशीट में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने यह दावा किया है कि 15 दिसंबर को जामिया में हुए दंगे में शामिल प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए हल्का बल प्रयोग का इस्तेमाल किया गया था. जबकि हाल ही में जारी किए गए कुछ सीसीटीवी फुटेज में दिल्ली पुलिस व अर्ध सैनिक बलों के जवान जिस तरह से लाइब्रेरी में घुसकर छात्रों के साथ मारपीट कर रहे हैं, उससे पुलिस द्वारा हल्का बल प्रयोग किए जाने के इस दावे पर कहीं न कहीं सवालिया निशान भी खड़े होते हैं?

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