दिल्ली: मेट्रो कर्मचारियों की हड़ताल पर HC ने लगाई रोक, नोटिस जारी कर मांगा जवाब
मनीष सिसोदिया ने कहा था कि मेट्रो कर्मचारियों की उचित मांगे मानी जाएंगी लेकिन अगर मेट्रो के हड़ताली कर्मचारी काम पर वापस नहीं लौटे तो उन पर एस्मा लग सकता है.

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने कल से होने वाली मेट्रो के 9000 कर्माचारियों की हड़ताल पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने नोटिस जारी कर हड़ताली कर्माचारियों से जवाब मांगा है. कोर्ट के आदेश के बावजूद भी अगर मेट्रो कर्मचारी हड़ताल पर जाते हैं तो उन पर कोर्ट की अवमानना का मामला भी चलेगा. हाईकोर्ट के इस फैसले से उन 20 लाख यात्रियों को राहत मिलेगी जो रोजाना मेट्रो से सफर करते हैं.
काम पर नहीं आए तो लग सकता है एस्मा: मनीष सिसोदिया इससे पहले दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा था कि मेट्रो कर्मचारियों की उचित मांगे मानी जाएंगी लेकिन अगर मेट्रो के हड़ताली कर्मचारी काम पर वापस नहीं लौटे तो उन पर एस्मा लग सकता है. एसेंशियल सर्विसेज मैनेजमेंट एक्ट यानी एस्मा का इस्तेमाल सरकार हड़ताल रोकने के लिए करती है. अगर सरकार इस कानून को लागू करती है तो उसके बाद सरकारी कर्मचारी हड़ताल को जारी रखता या अपनी सेवाएं नहीं देते हैं तो उसे गैर कानूनी माना जाएगा और इस तरह उन्हें दंडित किया जा सकता है. इसे अधिकतम छह महीने के लिए लागू किया जा सकता है.
लेबर कमीशन से बाचचीत नहीं आई काम लेबर कमिश्नर के साथ बातचीत फेल होने के बाद दिल्ली मेट्रो के 9000 कर्मचारियों ने आज हड़ताल पर जाने का फैसला किया था. कर्माचारियों के हड़ताल के फैसले पर मेट्रो का संचालन करने वाली संस्था डीएमआरसी का अभी तक कोई बयान नहीं आया है. लेबर कमिश्नर से पहले डीएमआरसी से भी मेट्रो कर्माचारियों की बातचीत विफल रही थी.
हड़ताल पर कौन कौन से कर्मचारी? हड़ताल पर जाने वाले इन 9000 कर्मचारियों में मेट्रो चलाने वाले 900 ट्रेन ऑपरेटर, 1000 स्टेशन कंट्रोलर/ स्टेशन इंचार्ज, 5000 मेन्टेनेंस टेकनीशियन और करीब 2000 सपरवाइज़र शामिल हैं.अचानक नहीं लिया फैसला: मेट्रो कर्मचारी मेट्रो कर्मचारियों का आरोप है कि मेट्रो का परिचालन बंद करने का ये फैसला अचानक नहीं लिया गया बल्कि मांग पूरा करने को लेकर किया जा रहा ये प्रदर्शन 19 जून से ही जारी है इसके तहत पहले हाथ पर काली पट्टी बांधकर काम पर आए उसके बाद 25 जून से सांकेतिक भूख हड़ताल पर बैठे लेकिन इस सबके बावजूद इनकी बात नहीं सुनी जा रही. कर्मचारियों की इस हड़ताल को देखते हुए दिल्ली की बाराखंबा रोड पर बने मेट्रो भवन की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है.
हड़ताल करने वाले कर्मचारियों की क्या मांगें है?
- यूनियन को मान्यता दी जाए क्योंकि अभी तक 9 सदस्यों वाली कॉउंसिल को मैनेजमेंट ने मान्यता दी हुई है जो कि किसी एक्ट के तहत रजिस्टर्ड नहीं है जबकि कर्मचारी यूनियन को मान्यता नहीं दी हुई है जबकि वो एक्ट के तहत रजिस्टर्ड है.
- बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली की मांग.
- 23 जुलाई 2017 को हुए समझौते को सही रूप से लागू किया जाना चाहिए जिसमें पे स्केल को अपग्रेड करने को लेकर बात कही गई थी.
- इसके अलावा 7वें वेतन आयोग की सिफ़ारिश को लागू करवाने की मांग
- कर्मचारियों का कार्य क्षेत्र निर्धारित करने जैसी मांगें शामिल हैं.
हड़ताल का सीधा असर दिल्ली की सड़कों पर दिखेगा दिल्ली मेट्रो से रोजाना करीब 20 लाख यात्री सफर करते है, मेट्रो परिचालन बंद होने के बाद ये सभी सड़कों पर आ जाएंगे जिससे परिवहन व्यवस्था बदतर हो सकती है. इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों के लिए दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और निजी कैब से भी इसकी आपूर्ति हो पाना मुश्किल है.























