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IN PICS: सूखे की दस सबसे खौफनाक तस्वीरें !

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देश के कई इलाकों में भारी सूखा पड़ा है, लेकिन महाराष्ट्र का मराठवाड़ा सबसे भयंकर सूखे से जूझ रहा है. सूखे की वजह से किसी की मौत हो रही है तो कोई 14 एकड़ जमीन का मालिक होने के बावजूद मजदूरी कर रहा है. इतना ही नहीं सूखे की वजह से लोगों की किडनी तक फेल हो गई है. आगे की स्लाईड में पढ़िए सूखे की दस सबसे खौफनाक कहानियां.
देश के कई इलाकों में भारी सूखा पड़ा है, लेकिन महाराष्ट्र का मराठवाड़ा सबसे भयंकर सूखे से जूझ रहा है. सूखे की वजह से किसी की मौत हो रही है तो कोई 14 एकड़ जमीन का मालिक होने के बावजूद मजदूरी कर रहा है. इतना ही नहीं सूखे की वजह से लोगों की किडनी तक फेल हो गई है. आगे की स्लाईड में पढ़िए सूखे की दस सबसे खौफनाक कहानियां.
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कर्नाटक के 12 जिले सूखे की मार झेल रहे हैं. उन्हीं में से एक इलाका बीदर का है जहां लोग जान जोखिम में डालकर पानी जुटा रहे हैं. मलकापुर गांव के एक कुएं में थोड़ा सा पानी है लेकिन वो पीने लायक नहीं है. यहां एक बोर से पानी आता है और जिसे पानी चाहिए उसे कुएं के अंदर जाकर अपनी जान जोखिम में डालकर पानी भरना होता है.
कर्नाटक के 12 जिले सूखे की मार झेल रहे हैं. उन्हीं में से एक इलाका बीदर का है जहां लोग जान जोखिम में डालकर पानी जुटा रहे हैं. मलकापुर गांव के एक कुएं में थोड़ा सा पानी है लेकिन वो पीने लायक नहीं है. यहां एक बोर से पानी आता है और जिसे पानी चाहिए उसे कुएं के अंदर जाकर अपनी जान जोखिम में डालकर पानी भरना होता है.
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कर्नाटक के बीदर जिले के एक गांव ने पानी के लिए दूसरे गांव से समझौता किया है. समझौते के तहत एक गांव के लोग रात में पानी भरते हैं औऱ दूसरे गांव के लोग दिन में. और इस काम में छोटे-छोटे बच्चे भी हाथ बटाते हैं.
कर्नाटक के बीदर जिले के एक गांव ने पानी के लिए दूसरे गांव से समझौता किया है. समझौते के तहत एक गांव के लोग रात में पानी भरते हैं औऱ दूसरे गांव के लोग दिन में. और इस काम में छोटे-छोटे बच्चे भी हाथ बटाते हैं.
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बुंदेलखंड में उत्तर प्रदेश के 7 जिले आते हैं. सूखे की वजह से इन सभी जगहों पर पानी का ऐसा संकट है कि लोग बूंद बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं. महोबा के खन्ना गांव में एक मां अपनी 3 छोटी-छोटी बच्चियों के साथ रोज कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाती हैं. जिस उम्र में इन बच्चों को खेलना और पढ़ना चाहिए उस उम्र में वो अपने सिर पर पानी के मटके ढो रहे हैं.
बुंदेलखंड में उत्तर प्रदेश के 7 जिले आते हैं. सूखे की वजह से इन सभी जगहों पर पानी का ऐसा संकट है कि लोग बूंद बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं. महोबा के खन्ना गांव में एक मां अपनी 3 छोटी-छोटी बच्चियों के साथ रोज कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाती हैं. जिस उम्र में इन बच्चों को खेलना और पढ़ना चाहिए उस उम्र में वो अपने सिर पर पानी के मटके ढो रहे हैं.
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यूपी सरकार ने इन लोगों की मदद के लिए अनाज देने की योजना शुरू की है लेकिन ये मदद सब तक नहीं पहुंच पा रही है. हमीरपुर के शंकरपुर गांव में रहने वाले नत्थूराम के परिवार में 10 लोग हैं. वो बटाई पर काम कर के अपना गुजारा चलाते थे. सूखे की वजह से खेत खराब हो चुके हैं इसलिए कमाई का कोई जरिया नहीं बचा है.
यूपी सरकार ने इन लोगों की मदद के लिए अनाज देने की योजना शुरू की है लेकिन ये मदद सब तक नहीं पहुंच पा रही है. हमीरपुर के शंकरपुर गांव में रहने वाले नत्थूराम के परिवार में 10 लोग हैं. वो बटाई पर काम कर के अपना गुजारा चलाते थे. सूखे की वजह से खेत खराब हो चुके हैं इसलिए कमाई का कोई जरिया नहीं बचा है.
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घर के पुरुष भी काम की तलाश में रोज सुबह शहर आते हैं, लेकिन बिना मजदूरी किए उन्हें भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है. मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है तो उन लोगों के सामने भी रोजी रोटी का संकट खड़ा हो चुका है जो इन्हें किराये पर मजदूरी का औजार देते हैं. हाल ये है कि गांवों से लोग घर बार छोड़कर मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे बड़े शहरों का रुख कर रहे हैं ताकि अपने और अपने परिवार का पेट भर सकें.
घर के पुरुष भी काम की तलाश में रोज सुबह शहर आते हैं, लेकिन बिना मजदूरी किए उन्हें भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है. मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है तो उन लोगों के सामने भी रोजी रोटी का संकट खड़ा हो चुका है जो इन्हें किराये पर मजदूरी का औजार देते हैं. हाल ये है कि गांवों से लोग घर बार छोड़कर मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे बड़े शहरों का रुख कर रहे हैं ताकि अपने और अपने परिवार का पेट भर सकें.
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सूखा की वजह से गांवों में कोई काम भी नहीं है. काम की तलाश में कोई हरियाणा गया तो कोई गुजरात. बांदा के नीबी गांव में श्रीकृष्ण और उनकी पत्नी अब घर में अकेले रहते हैं, घर बनाने के लिए कर्ज लिया था और अब उस कर्ज को चुकाने में परिवार ही बिखर गया. दो बेटे हैं पर दोनों लोहे की फैक्ट्री में काम करने के लिए रायगढ़ चले गए हैं.
सूखा की वजह से गांवों में कोई काम भी नहीं है. काम की तलाश में कोई हरियाणा गया तो कोई गुजरात. बांदा के नीबी गांव में श्रीकृष्ण और उनकी पत्नी अब घर में अकेले रहते हैं, घर बनाने के लिए कर्ज लिया था और अब उस कर्ज को चुकाने में परिवार ही बिखर गया. दो बेटे हैं पर दोनों लोहे की फैक्ट्री में काम करने के लिए रायगढ़ चले गए हैं.
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गांव के लोग सूखे की मार से शहरों में काम ढूंढने को मजूबर हैं. इन्हीं नामों में एक नाम सक्कू बाई का भी है जो छोटे-छोटे बच्चों को घर छोड़कर रोज सुबह काम की तलाश में लातूर शहर आती हैं और बिना कमाए घर लौट जाती हैं.
गांव के लोग सूखे की मार से शहरों में काम ढूंढने को मजूबर हैं. इन्हीं नामों में एक नाम सक्कू बाई का भी है जो छोटे-छोटे बच्चों को घर छोड़कर रोज सुबह काम की तलाश में लातूर शहर आती हैं और बिना कमाए घर लौट जाती हैं.
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मराठवाड़ा के लातूर शहर में सूखे की वजह से लोगों की किडनी तक फेल हो गई है ऐसी ही कहानी 15 साल के पवन की है. पवन को कोई मामूली बीमारी नहीं है. नौंवी क्लास में पढ़ने वाले पवन की दोनों किडनियों ने काम करना बंद कर दिया है और वो पिछले 3 महीने से डायलसिस पर है. डॉक्टरों का कहना है कि कम पानी पीने की वजह से पवन की किडनी में पथरी हो गई थी.
मराठवाड़ा के लातूर शहर में सूखे की वजह से लोगों की किडनी तक फेल हो गई है ऐसी ही कहानी 15 साल के पवन की है. पवन को कोई मामूली बीमारी नहीं है. नौंवी क्लास में पढ़ने वाले पवन की दोनों किडनियों ने काम करना बंद कर दिया है और वो पिछले 3 महीने से डायलसिस पर है. डॉक्टरों का कहना है कि कम पानी पीने की वजह से पवन की किडनी में पथरी हो गई थी.
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मराठवाड़ा में रहने वाले बलीराम के पास 14 एकड़ की खेती है लेकिन पानी की मार ऐसी है कि सबकुछ होने के बाद भी बलीराम के बाद कुछ नहीं है. वो किसान मुंबई में दिहाड़ी मजदूर बनकर काम कर रहा है. बलीराम को करीब 400 रुपए मजदूरी मिलती है.
मराठवाड़ा में रहने वाले बलीराम के पास 14 एकड़ की खेती है लेकिन पानी की मार ऐसी है कि सबकुछ होने के बाद भी बलीराम के बाद कुछ नहीं है. वो किसान मुंबई में दिहाड़ी मजदूर बनकर काम कर रहा है. बलीराम को करीब 400 रुपए मजदूरी मिलती है.
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महराष्ट्र के बीड जिले में 7 साल का सचिन अपने भाई के साथ कुएं से पानी लेने गया था. आसपास के पूरे इलाके में सिर्फ इसी गांव में पानी बचा है. लेकिन पानी के चक्कर में सचिन कुएं में गिर गया. आनन-फानन में लोगों ने सचिन को बाहर निकाला लेकिन उसको बचाया नहीं जा सका. सचिन पढ़ाई के साथ-साथ छोटे-मोटे काम करके दिन में 10-20 रुपए कमाकर परिवार को देता था.
महराष्ट्र के बीड जिले में 7 साल का सचिन अपने भाई के साथ कुएं से पानी लेने गया था. आसपास के पूरे इलाके में सिर्फ इसी गांव में पानी बचा है. लेकिन पानी के चक्कर में सचिन कुएं में गिर गया. आनन-फानन में लोगों ने सचिन को बाहर निकाला लेकिन उसको बचाया नहीं जा सका. सचिन पढ़ाई के साथ-साथ छोटे-मोटे काम करके दिन में 10-20 रुपए कमाकर परिवार को देता था.
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