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AFINDEX-2023 से भारत-अफ्रीका के रक्षा संबंधों को मिलेगा बढ़ावा, चीन का मुकाबला करना होगा आसान

AFINDEX 2023 सैन्य अभ्यास में 9 अफ्रीकी देशों - इथियोपिया, केन्या, लेसोथो, नाइजर, सेशेल्स, तंजानिया, युगांडा, जाम्बिया और 11 अन्य पर्यवेक्षक अफ्रीकी देशों ने भाग लिया है. ये सभी देश जरूरत पड़ने पर एक साथ चीन का मुकाबला करने की तैयारी में हैं.

नौ अफ्रीकी देशों की सेना की टुकड़ी 11 अन्य देश के सैन्य पर्यवेक्षकों के साथ वर्तमान में भारत में भारतीय सेना के साथ सैन्य अभ्यास कर रही है. भारतीय नौसैनिक जहाज सुजाता विशेष आर्थिक क्षेत्र की संयुक्त निगरानी के लिए 21-23 मार्च तक मोजाम्बिक तट पर मोजाम्बिक नौसेना के साथ था. पहला अफ्रीका चीफ्स कॉन्क्लेव 28 मार्च को पुणे में आयोजित किया जाएगा. ये भारतीय सशस्त्र बलों के अपने अफ्रीकी समकक्षों के साथ हाल के कुछ हाई-प्रोफाइल फ्लैगशिप कार्यक्रम हुए है. पिछले कुछ समय से, भारत एक गहरी आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी के लिए औपनिवेशिक शासन से बाहर आने वाले 54 रिसर्जंट देशों के महाद्वीप अफ्रीका के साथ फिर से जुड़ने के गंभीर प्रयास कर रहा है. भारत और अफ्रीका के बीच घनिष्ठ और ऐतिहासिक संबंध रहे हैं. भारत-अफ्रीका रक्षा संबंधों की नींव दो सिद्धांतों पर 'SAGAR' या Security में सभी के लिए सुरक्षा और विकास' और 'वसुधैव कुटुम्बकम' पर आधारित है, जिसका अर्थ है "दुनिया एक परिवार है."

इस सदी की शुरुआत में, भारत ने सबसे पिछड़े महाद्वीप के साथ अपने संबंधों की शुरुआत की, जिसे भारत में अपने विस्तारित पड़ोस का एक हिस्सा माना जाता है. तेजी से बदलती भू-राजनीति के बीच, अफ्रीका में पुराने और नए स्वतंत्र राष्ट्रों को लुभाने के लिए दुनिया भर के देश प्रयासरत हैं, जो अक्सर आंतरिक जनजातीय संघर्ष में उलझे रहते हैं. पहले और दूसरे दशक में अफ्रीका कार्यक्रम से, जिसमें हर तीसरे वर्ष राष्ट्राध्यक्षों का शिखर सम्मेलन होता है, भारतीय नेतृत्व ने अब रक्षा मंत्रियों, सेवा प्रमुखों के प्रमुखों और अफ्रीकी देशों के सैनिकों के साथ सीधे जुड़ाव की पहल की है.

भारतीय सेना वर्तमान में 10 दिवसीय अफ्रीका-भारत क्षेत्र प्रशिक्षण अभ्यास (21-30 मार्च) और सेवा प्रमुखों का पहला सम्मेलन आयोजित कर रहा है जो 28 मार्च को पुणे में होगा. AFINDEX अभ्यास में नौ अफ्रीकी देशों की सेना भाग ले रहे हैं. 11 अन्य अफ्रीकी देशों के पर्यवेक्षकों के साथ देश (इथियोपिया, केन्या, लेसोथो, नाइजर, सेशेल्स, तंजानिया, युगांडा और जाम्बिया) शामिल हैं. अफ्रीकी देशों के साथ इस तरह के जुड़ाव भारतीय रक्षा नीतियों और क्षमताओं को उनके बीच बेहतर ढंग से पेश करने में सक्षम होंगे.

निस्संदेह, चीन ने इस क्षेत्र में अपने व्यापक प्रभुत्व स्थापित करने का बीड़ा उठाया है, लेकिन अधिकांश देश अब चीनी सरकार और उद्यमों के साथ जुड़ने के नुकसान को महसूस कर रहे हैं. वे चीन के कर्ज में फंसे हुए हैं और उनकी सरकारों को राजनीतिक वर्ग और बुद्धिजीवियों की आलोचना का शिकार होना पड़ रहा है, जबकि भारत ने भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम के तहत क्षमता निर्माण की नीति के माध्यम से विश्वसनीयता हासिल की है.

द्विपक्षीय व्यापार के संदर्भ में देखा जाए तो चीन भारत से लगभग तीन गुना (260 बिलियन अमेरिकी डॉलर) आगे है और अफ्रीकी रक्षा उपकरण बाजार में एक प्रमुख व्यापारी देश बन गया है. हालांकि, भारत भी धीरे-धीरे इस क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहा है. ऐसा होता हुआ देखा भी जा सकता है. चूंकि भारतीय व्यापार 2001 में 7.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर अब लगभग 90 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक का हो गया है. हालांकि, बढ़ती मांग और आपूर्ति करने की भारतीय क्षमता को देखते हुए, द्विपक्षीय व्यापार अभी भी संतुलित नहीं है.

ऐतिहासिक रहे हैं भारत-अफ्रीका के संबंध

भारत ने सदी के पहले दशक में फोकस अफ्रीका कार्यक्रम शुरू किया, जिससे भारत और भारतीयों के बारे में बेहतर समझ विकसित हुई. बॉलीवुड फिल्मों के अलावा, गांधी और नेहरू के राष्ट्र के रूप में भारत की सौम्य छवि होने के बावजूद हम अफ्रीकी जनता के बीच लोकप्रियता का लाभ उठाने में विफल रहे हैं. भारत ने महाद्वीप में सभी औपनिवेशिक शासनों की कड़ी निंदा की और अंतर्राष्ट्रीय मंचों और संगठनों में सक्रिय रूप से उन देशों की स्वतंत्रता का समर्थन किया है.

भारत और अफ्रीका के बीच ऐतिहासिक संबंधों में पिछले तीन से चार वर्षों के दौरान और गहरा हुआ है, जिसने संबंधों को और मजबूत होने की उम्मीदें जगाई हैं और यह पारस्परिक रूप से लाभकारी साबित होगा. भारत को व्यापार और रक्षा दोनों क्षेत्रों में सबसे मजबूत भागीदार बनाने की संभावनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगा. अफ्रीका भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 54 देशों के साथ यह संयुक्त राष्ट्र में एक बहुत ही महत्वपूर्ण वोटिंग ब्लॉक भी है.

भारत को विभिन्न प्रस्तावों के लिए संयुक्त राष्ट्र में हमेशा अधिकतम समर्थन मिलता है, जिसमें अफ्रीकी देशों के प्रमुख ब्लॉक भारत के साथ खड़े रहते हैं. गांधीनगर में आयोजित पिछले अक्टूबर DefExpo-22 के दौरान अफ्रीकी रक्षा अधिकारियों की जबरदस्त भागीदारी भारतीय सशस्त्र बलों के साथ जुड़ाव की उनकी इच्छा का प्रमाण है, जो अफ्रीकी देशों की सेनाओं को विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं. DefExpo के दौरान, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत-अफ्रीका रक्षा संवाद को संबोधित किया अफ्रीकी रक्षा मंत्रियों के साथ विशेष द्विपक्षीय बैठकें की थी. इस दूसरे संवाद का विषय था - रक्षा और सुरक्षा सहयोग में तालमेल और मजबूती के लिए रणनीति अपनाना. इस दौरान एक परिणाम दस्तावेज जारी किया गया जिसमें प्रशिक्षण स्लॉट और प्रशिक्षण टीमों की प्रतिनियुक्ति बढ़ाकर आपसी हित के सभी क्षेत्रों में प्रशिक्षण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की सिफारिश की गई; अफ्रीका के रक्षा बलों का सशक्तिकरण और क्षमता निर्माण और संयुक्त अभ्यास में भागीदारी और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मानवीय सहायता प्रदान करना आदि है. अफ्रीकी देशों के विशेषज्ञों के लिए भारत-अफ्रीका सुरक्षा फेलोशिप कार्यक्रम की शुरुआत की गई है.

गांधीनगर में अफ्रीकी रक्षा मंत्रियों के परामर्श से, भारत ने हर दो साल में एक बार आयोजित होने वाले DefExpo के दौरान भारत अफ्रीका-रक्षा वार्ता को संस्थागत बनाने का प्रस्ताव रखा है. इससे अफ्रीकी देशों और भारत के बीच मौजूदा साझेदारी और क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद-विरोधी जैसे क्षेत्रों सहित आपसी जुड़ाव के लिए नए एरिया का पता लगाने में मदद मिलेगी.

6 फरवरी, 2020 को DefExpo के दौरान लखनऊ में पहली बार भारत-अफ्रीका रक्षा मंत्री सम्मेलन (IADMC) आयोजित की गई थी. भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन IV। IADMC 2020 के समापन के बाद एक संयुक्त घोषणा पत्र जिसे की 'लखनऊ घोषणा' के नाम से भी जाना जाता है को दस्तावेज के रूप में अपनाया गया था.

इन चार क्षेत्रों में भारत अफ्रीका के साथ साझेदारी को बढ़ाने पर है जोर

रक्षा सहयोग भारत-अफ्रीका संबंधों का केवल एक पहलू है. वास्तव में, भारत ने दोनों देशों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए चार क्षेत्रों में अफ्रीका के साथ अपनी साझेदारी को मजबूत करने की योजना बनाई है. जिसमें पहला क्षेत्र सौर ऊर्जा व स्वच्छ ऊर्जा है, इससे ऊर्जा सुरक्षा लाने में मदद मिलेगी और अफ्रीका में रोजगार सृजित होंगे. दूसरा हिंद महासागर में रक्षा व्यापार और सैन्य आदान-प्रदान, बख्तरबंद वाहनों और यूएवी का निर्माण है. तीसरा फिजिकल और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देना है, जो आईटी/कंसल्टेंसी और प्रोजेक्ट एक्सपोर्ट में मदद करता है और चौथा हेल्थकेयर और फार्मा के क्षेत्र में संबंधों को और मजबूत करना है.

दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार तेजी से बढ़ रहा है और यह लगभग 90 बिलियन अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है. मर्चेंडाइज व्यापार 2019-20 में 67 बिलियन अमेरिकी डॉलर से 34% बढ़कर 20-21 में 89 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है. इस तरह से अफ्रीका अब भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन गया है.

इसी प्रकार, रक्षा से लेकर व्यापार तक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग के लिए, भारत-अफ्रीका के संबंधों में वृद्धि देखी गई है. वास्तव में, इस क्षेत्र में भारत की लोकप्रियता और विश्वसनीयता को महसूस करते हुए, अमेरिका और जापान जैसे विकसित देश महाद्वीप में विभिन्न विकास परियोजनाओं को शुरू करने के लिए भारत के साथ त्रिपक्षीय साझेदारी कर रहे हैं. भारत के साथ इन देशों के वित्तीय संसाधनों का क्षेत्र में चीनी आक्रामक व्यापार और सुरक्षा नीतियों का मुकाबला करने के लिए बेहतर उपयोग किया जा सकता है.

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