गन्ने के अलावा किस-किस चीज से बनती है चीनी, सबसे सस्ती कौन सी?
भारत में इस वक्त तेजी से चीनी की कीमतें करीब 20 फीसदी बढ़ गई हैं. ऐसे में त्योहार के सीजन में इसका असर देखने को मिलेगा. चलिए जानें कि गन्ने के अलावा चीनी अन्य किन-किन चीजों से बनती है.

- गन्ने की चीनी सबसे सस्ती; अन्य विकल्प अत्यधिक महंगे पाए गए।
भारत में इन दिनों चीनी की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. सिर्फ अगस्त के महीने में ही 20 फीसदी बढ़े दामों ने त्योहारों के मौसम में कड़वाहट घोल दी है. भारत दुनिया में दूसरा ऐसा देश है जो कि सबसे ज्यादा चीनी का उत्पादन करता है, लेकिन बढ़े दामों की वजह से अब हमें इसे बाहर से आयात करना पड़ेगा. हालांकि चीनी उद्योग का कहना है कि देश में चीनी की कमी नहीं है. जबकि चर्चा यह है कि सरकार एथेनॉल बनाने पर ज्यादा जोर दे रही है, इसलिए गन्ने की सप्लाई वहां हो रही है. इसीलिए चीनी के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी देखने को मिली है. लेकिन आपको पता है कि चीनी के अलावा भी अन्य कई चीजों से चीनी बनाई जाती है. चलिए जानें कि गन्ने से बनी चीनी के दाम ज्यादा किफायती हैं या अन्य चीजों से बनी चीनी के दाम.
चुकंदर
यूरोप और अमेरिकी महाद्वीपों में चुकंदर से चीनी बनाने का काम बहुत बड़े पैमाने पर किया जाता है. चुकंदर, गन्ने के बाद मिठास का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है. जब इसे रिफाइन किया जाता है, तो इससे निकलने वाली चीनी और सुक्रोज का स्तर लगभग वही होता है, जो हमें गन्ने की सफेद शक्कर में देखने को मिलता है. रंग और स्वाद में गन्ने की मिठास से इसका कोई फर्क कर पाना मुश्किल होता है.
मीठा ज्वार
आमतौर पर ज्वार तो पीसकर रोटी बनाने के काम आता है, लेकिन इसकी एक खास किस्म ऐसी भी होती है जिसके तने मिठास से भरे होते हैं. इसके तनों को पेरने के बाद जो रस निकाला जाता है, उससे गाढ़ा मीठा सिरप तैयार होता है. कई जगहों पर खास प्रक्रियाओं के जरिए इससे दानेदार चीनी भी बनाई जाती है. यह प्राकृतिक रूप से बहुत पौष्टिक और असरदार माना जाता है.
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खजूर
खजूर खान में बेहद मीठा होता है. इसके फलों और इसकी कुछ खास प्रजातियों के पेड़ों से निकलने वाले रस से चीनी व गुड़ तैयार की जाती है. इसे सुखाकर या गाढ़ा करके जो पाउडर बनता है, वह गुड़ होता है. वह न केवल स्वाद बढ़ाता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी गन्ने की चीनी या गुड़ से कहीं ज्यादा बेहतर माना जाता है.
नारियल का फूल और रस
नारियल के पेड़ के फूलों से जो ताजा रस निकलता है, उसे धीमी आंच पर पकाकर गाढ़ा किया जाता है. इसके बाद जो मिठास तैयार होती है, उसे कोकोनट शुगर कहा जाता है. इसका रंग हल्का भूरा होता है और इसका कैरेमल जैसा स्वाद मिठाइयों में एक अलग ही जायका बढ़ाता है.
ताड़ का रस
विभिन्न प्रजातियों के ताड़ के पेड़ों के रस से पाम शुगर तैयार की जाती है. इसे पारंपरिक तरीकों से बनाकर और फिर सुखाकर दानेदार रूप दिया जाता है. दक्षिण भारत और एशियाई देशों में इसका इस्तेमाल बहुत समय से किया जा रहा है.
मेपल का रस
इसके बारे में शायद ही लोग जानते हों, लेकिन कनाडा और अमेरिका के ठंडे इलाकों में मेपल के पेड़ पाए जाते हैं, जिनकी पत्तियां नारंगी रंग की होती हैं. इन पेड़ों के तने से एक खास तरह का रस निकाला जाता है. इस रस को उबालकर मेपल सिरप बनाया जाता है. इसका स्वाद और महक बहुत अनोखी होती है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है. इस सिरप का इस्तेमाल ज्यादातर वेफल, पैनकेक और डेजर्ट में किया जाता है.
मक्का
क्या आपको पता है कि मक्के से भी चीनी बनाई जाती है, लेकिन इससे सीधी दानेदार सफेद चीनी तो नहीं बनती, लेकिन ग्लूकोज और हाई-फ्रक्टोज कॉर्न सिरप जरूर तैयार किया जाता है. दुनिया भर की सॉफ्ट ड्रिंक्स, पैक की हुई मिठाइयों और बिस्किट बनाने वाली बड़ी कंपनियां इसी मक्के के सिरप का सबसे ज्यादा करती हैं.
कसावा/टैपिओका
कसावा, आलू और शकरकंद की तरह दिखता है. इसकी जड़ों में स्टार्च की भरपूर मात्रा होती है. रासायनिक और प्राकृतिक प्रक्रियाओं से इसके स्टार्च को तोड़कर तरल ग्लूकोज और अन्य मीठी चीजें बनाई जाती हैं. बेकरी और खाद्य उद्योग में इसका उपयोग बड़े स्तर पर होता है.
आलू और अन्य
आलू और इसी तरह की अन्य स्टार्च वाली फसलों से भी चीनी के ढेर विकल्प तैयार किए जाते हैं. इनके स्टार्च को बदलकर ग्लूकोज सिरप बनाया जाता है, जो कम लागत में बढ़िया मिठास देने का काम करता है.

कौन सी चीनी कितनी है सस्ती?
अगर चीनी से जेब पर पड़ने वाले असर की बात करें, तो गन्ने से बनने वाली आम सफेद चीनी ही सबसे सस्ती पड़ती है, जिसकी बाज़ार कीमत भारत में लगभग 60-70 रुपये प्रति किलोग्राम तक हो गई है. इसके अलावा दूसरे प्राकृतिक स्रोतों से बनने वाले चीनी या शुगर सिरप सीमित उत्पादन के कारण काफी महंगे होते हैं.
नारियल की चीनी- यह लगभग 200-300 प्रति 300-350 ग्राम (यानी 600 से 800 रुपये प्रति किलोग्राम) के भाव पर बिकती है.
स्टीविया- मीठी तुलसी के पौधों से तैयार होने वाले चीनी के इस ऑप्शन की एक छोटी डिब्बी (300 गोलियों वाली) 120 से 300 रुपये तक आती है, जो वजन के हिसाब से बहुत महंगी बैठती है.
मंक फ्रूट शुगर- यह जीरो-कैलोरी प्राकृतिक चीनी का विकल्प लगभग 500 से 600 रुपये प्रति 250-400 ग्राम (यानी 1,200 से 1,500 रुपये प्रति किलोग्राम) तक में बाजार में मिलता है.
खजूर या ताड़ की चीनी- यह विकल्प बाकियों की तुलना में थोड़ा ज्यादा किफायती है और लगभग 200-400 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास मिल जाता है.
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