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हमास बच्चों को दे रहा ट्रेनिंग? जानें क्या है इस वायरल दावे की सच्चाई

42 सेकंड के इस  वीडियो में बच्चों को हथियार संभालते हुए दिखाया गया है. पारंपरिक शलवार कमीज पहने ये बच्चे पिस्टल और राइफल से फायर करते समय एक संरचित पंक्ति बनाए रखते हैं.

निर्णय- असत्य


    यह पुराना वीडियो है, और 2012 से मौजूद है, जिसमें कथित तौर पर बच्चों को अल क़ायदा के आतंकवादी शिविर में प्रशिक्षित होते दिखाया गया है.

दावा क्या है?
हमास द्वारा बच्चों को रक्षा के लिए प्रशिक्षण देने के आरोपों के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें कुछ बच्चे पिस्टल और राइफल से फायरिंग करते हुए दिखाई दे रहे हैं. इस वीडियो को सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफ़ॉर्म पर इस दावे के साथ शेयर किया जा रहा है कि इसमें इजरायल-हमास संघर्ष के बीच फ़िलिस्तीनी बच्चों को दिखाया गया है.

42 सेकंड के इस  वीडियो में बच्चों को हथियार संभालते हुए दिखाया गया है. पारंपरिक शलवार कमीज पहने ये बच्चे पिस्टल और राइफल से फायर करते समय एक संरचित पंक्ति बनाए रखते हैं. वीडियो में कई जगह बैकग्राउंड में दो झंडे भी दिखाई दे रहे हैं.

एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर, एक यूज़र्स ने वीडियो को व्यंग्यात्मक कैप्शन के साथ शेयर किया, "इजरायल बमबारी कर रहा है और फिलिस्तीन के मासूम बच्चे गिल्ली-डंडा खेल रहे हैं." ऐसे ही एक एक्स पोस्ट पर 46,700 व्यूज़ थे. वायरल पोस्ट के आर्काइव वर्ज़न यहां और यहां देखे जा सकते हैं.


हमास बच्चों को दे रहा ट्रेनिंग? जानें क्या है इस वायरल दावे की सच्चाई

हालांकि, यह वीडियो कम से कम एक दशक पुराना है और कथित तौर पर आतंकवादी संगठन अल क़ायदा से जुड़े एक प्रशिक्षण शिविर का है. 2012-2013 की रिपोर्ट्स से पता चलता है कि शिविर का स्थान पाकिस्तान-अफ़गानिस्तान सीमा के पास था.

सच्चाई क्या है?
वीडियो के कीफ्रेम्स पर रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमें इस वीडियो फुटेज से संबंधित कई मीडिया रिपोर्टें मिलीं.

अप्रैल 2013 में, इंडिया टुडे ने उसी फुटेज वाले वीडियो पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें बच्चों की पहचान छिपाने के लिए उनके चेहरे धुंधले कर दिए गए थे. इसमें बताया गया है कि कैसे पाकिस्तान-अफ़गानिस्तान सीमा पर वजीरिस्तान क्षेत्र में सक्रिय तुर्किस्तान इस्लामिक पार्टी नाम के एक समूह ने वीडियो में देखी गई गतिविधियों ज़िम्मेदारी ली है.

इसके अलावा, एक संवाददाता ने बताया कि इस बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है कि वीडियो के पीछे कौन था, यह मूल रूप से अल क़ायदा की वेबसाइट पर अपलोड किया गया था और बाद में लीक हो गया, अंततः ब्रिटिश वीडियो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म लाइवलीक के माध्यम से सार्वजनिक डोमेन में सामने आया. उसी वीडियो पर इंडिया टुडे की एक टेक्स्ट रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका शीर्षक "लिटिल कमांडोज़" था.

अप्रैल 2013 में हफ़पोस्ट द्वारा वीडियो पर प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया था कि इसे कथित तौर पर उत्तरी वज़ीरिस्तान में फ़िल्माया गया था और इसमें छोटे बच्चों को अल क़ायदा के आतंकवादी शिविर पर हथियार चलाते हुए दिखाया गया था. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इसे "इस्लाम अवाज़ी" नाम दिया गया था - एक संगठन जिसकी पहचान इस्लामिक पार्टी ऑफ़ तुर्किस्तान के रूप में की गई है. रिपोर्ट में वायरल वीडियो के स्क्रीनग्रैब मौजूद हैं.

रूसी अंग्रेजी भाषा के न्यूज़ चैनल आरटी ने भी अप्रैल 2013 में वीडियो को कवर किया और फुटेज से कई स्क्रीन कैप्चर शेयर किए.

हमें नवंबर 2012 में मिरर द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट मिली, जिसमें कहा गया था कि वीडियो आतंकवादी संगठन अल क़ायदा से जुड़ी एक वेबसाइट पर पोस्ट किया गया था.

वायरल वीडियो में, 0:08 समयावधि से शुरू होकर और कई अन्य बिंदुओं पर, बच्चों के पीछे खड़े लोग दो झंडे पकड़े हुए दिखाई दे रहे हैं: एक काला और दूसरा नीला.हमास बच्चों को दे रहा ट्रेनिंग? जानें क्या है इस वायरल दावे की सच्चाई

वीडियो में 0:18 की समयावधि तक, झंडे दिखाई दिखाई देते हैं. काले झंडे को अल क़ायदा के झंडे के रूप में पहचाना जा सकता है, जबकि नीला झंडा तुर्किस्तान इस्लामिक पार्टी से जुड़े झंडे से काफ़ी मिलता जुलता है.


हमास बच्चों को दे रहा ट्रेनिंग? जानें क्या है इस वायरल दावे की सच्चाई

हालांकि, हम स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं कर सके कि वीडियो कब और कहां शूट किया गया था, यह एक दशक से अधिक पुराना है लेकिन यह स्पष्ट रूप से चल रहे इजरायल-हमास संघर्ष से संबंधित नहीं है.

निर्णय
एक दशक पुराना वीडियो, जिसमें कथित तौर पर अल क़ायदा प्रशिक्षण शिविर दिखाया गया था, को इजरायल-हमास संघर्ष के बीच फ़िलिस्तीनी बच्चों को दिखाने वाले वीडियो के रूप में ग़लत दावे से प्रसारित किया गया है. इसलिए, हम वायरल दावे को ग़लत मानते हैं. 

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट पहले logicallyfacts.com पर छपी थी. स्पेशल अरेंजमेंट के साथ इस स्टोरी को एबीपी लाइव हिंदी में रिपब्लिश किया गया है. एबीपी लाइव हिंदी ने हेडलाइन, कंटेंट और फोटो में बदलाव करके रिपोर्ट को रिपब्लिश किया है.

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