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Explained: पेट्रोल-डीजल को आखिर GST में शामिल करने से क्यों कतरा रही हैं सरकारें? आंकड़ों से समझिए

जिस पेट्रोल और डीजल ने मिडिल क्लास की गृहस्थी का माइलेज बिगाड़ कर रख दिया है. सरकार चाहे तो उसकी कीमत एक पल में आधी हो सकती है.

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने टैक्स सिस्टम में रिफॉर्म्स की जरूरत बताते हुए GST को लागू किया था. लेकिन इसी GST में पेट्रोल-डीजल को शामिल नहीं किया जा रहा. राज्य सरकारें भी नहीं चाहतीं कि पेट्रोल-डीजल जीएसटी के दायरे में आए. लेकिन सवाल यहां ये है कि आखिर क्यों? तो इस सवाल का जवाब आपको हम यहां बता रहे हैं.

पेट्रोल-डीजल को न तो केंद्र और न ही राज्य सरकारें GST के दायरे में लाना चाहती हैं. क्योंकि सरकारों को लगता है कि आम आदमी की जेब भरने के चक्कर में उसका ही खजाना खाली हो जाएगा. अगर पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें आधी हो जाएंगी. पेट्रोल 56 रुपये प्रति लीटर मिलेगा और डीजल 55 रुपये प्रति लीटर बिकेगा.

आंकड़ों से समझिए

  • 16 सितंबर को दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल का बेस प्राइस था 40 रुपये 78 पैसे
  • इस पर ढुलाई शुल्क लगा 32 पैसे
  • इस पर केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी लगी 32 रुपये 90 पैसे
  • इस कीमत पर 3 रुपये 84 पैसा डीलर कमीशन जुड़ा
  • फिर राज्य सरकार ने 23 रुपये 35 पैसे VAT लगा दिया
  • और आखिर में खरीददार को पेट्रोल मिला 101 रुपये 19 पैसे प्रति लीटर...जो डीलर प्राइस से 125% ज्यादा है

लेकिन यही पेट्रोल अगर जीएसटी के दायरे में आता, तो 16 सितंबर को आम आदमी ने जितना पैसा एक लीटर पेट्रोल के लिए दिया, उतने ही पैसे में उसे लगभग दो लीटर पेट्रोल मिल जाता. समझिए कैसे-

  • 16 सितंबर को दिल्ली में पेट्रोल का बेस प्राइस 40 रुपये 78 पैसे था
  • इस पर ढुलाई शुल्का 32 पैसे लगा..तो कीमत हो गई 41 रुपये 10 पैसे
  • इस पर अगर सरकार सबसे ज्यादा 28% जीएसटी भी लगाती तो टैक्स बनता 11 रुपये 51 पैसे
  • इस पर 3 रुपये 84 पैसे डीलर प्राइस भी जोड़ दिया जाता तो खरीददार को सिर्फ 56 रुपये 45 पैसे में एक लीटर पेट्रोल मिल जाता

सबसे बड़ा सच यही है कि अपना खजाना भरने के लिए सरकार ने आम आदमी के कंधों पर महंगाई का बोझ डाल दिया है. इसलिए 16 सितंबर को जिस एक लीटर पेट्रोल की कीमत 101 रुपये 19 पैसे थी, सरकार उस पेट्रोल को 56 रुपये 45 पैसे में नहीं बेचना चाहती. 

क्या भविष्य में GST के दायरे में आने की संभावना है?
सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि सरकार ने शराब को भी जीएसटी के दायरे से बाहर रखा है. क्योंकि यहां से भी मोटी कमाई होती है. बिजली की कीमतों को भी अब तक जीएसटी में शामिल नहीं किया गया. 

कोरोना की वजह से देश की अर्थव्यवस्था लड़खड़ाई हुई है. उद्योग पटरी पर लौट रहे हैं, व्यापार बढ़ रहा है लेकिन अर्थव्यवस्था की सेहत सुधरने में समय लगेगा. इसलिए भी सरकार अपना मुनाफा कम करने के मूड में नहीं है. हालांकि अब चर्चा ये भी जोर पकड़ रही है कि केंद्र सरकार बहुत जल्द जीएसटी के दो या तीन और दरें लागू कर सकती है. मुमकिन है कि बढ़ी हुई दरों में उन उत्पादों को शामिल किया जाए, जो अब तक GST के दायरे से बाहर हैं.

जीएसटी काउंसिल ने खारिज किया प्रस्ताव
GST को आजाद भारत के सबसे बड़े रिफॉर्म्स में से एक बताया गया था. दलील दी गई थी कि जीएसटी आने के बाद कई प्रकार के टैक्स से लोगों को राहत मिल जाएगी. राहत मिली भी, लेकिन आधी-अधूरी. क्योंकि जो पेट्रोल और डीजल आम आदमी की जिंदगी से सीधे जुड़ा है, उसे केंद्र सरकार ने अब तक जीएसटी से नहीं जोड़ा. केरल हाईकोर्ट ने जीएसटी काउंसिल से इस मुद्दे पर विचार करने का आदेश भी दिया था. लखनऊ में हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में विचार हुआ भी, लेकिन उम्मीदों पर फिर से पानी फिर गया.

जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने कहा, 'पेट्रोल डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने को लेकर चल रहे कयासों पर केरल हाईकोर्ट के सुझाव पर चर्चा की गई. सदस्यों ने साफ तौर पर इसको खारिज कर दिया.'

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