By: ABP News Bureau | Updated at : 06 Jul 2016 05:42 PM (IST)
नई दिल्ली: फड़कती हुई मांसपेशियां और चेहरे पर जीत का जुनून. फिल्म 'सुल्तान' में सलमान खान एक देसी पहलवान की भूमिका में है. लेकिन सलमान महज फिल्मी पहलवान नहीं है दरसअल कसरत और पहलवानी उनके खून में शामिल है. यूं तो सलमान के खानदान में पहलवानी की परंपरा बरसों पुरानी रही है लेकिन खुद सलमान को बॉडी बिल्डिंग का शौक उनके चाचा नईम खान की सोहबत में लगा था.
नईम खान जो सलमान खान के चाचा हैं उनके मुताबिक, वो बच्चा था छोटा मैं कसरत लगाता था, हमारा कमरा अलग था वो मुझे देखता था वो आकर बैठ जाता था मेरे उपर और मैं डिप्स लगाता था बहुत शौक था उसको. मैं मना करता था कि अभी तुम बहुत छोटे हो जब बड़े हो जाना तो करना उसको बहुत शौक था. 3-4 साल उम्र से उसको बहुत शौक था. वो अपने सारे भाइयों बहनों में सबसे दुबला और कमजोर था. अब तो माशाअल्लाह बहुत अच्छा हो गया है और आज उसी की वजह से हिंदुस्तान के गली मौहल्ले में जिम है. ये दिलीप कुमार अमिताभ बच्चन किसी के समय नहीं था पर 100% इसी की वजह से ये शौक आया है.
नईम खान ने आगे बताया, मैं गया था शूटिंग में मैने पूछा कि कौन सा दांव लगा रहे हो तो बोला कि आप मेरे कोच से बात कर लो. तो वो मास्टर चंगीराम का लड़का आया था वो सीखा रहा था जगदीश कालीरमन तो मैंने बताया कि ये दांव करो ये देखने में अच्छा लगेगा. तो वो लगाया है उसने. तो मैनें सीखाया था चित्ती उखड़े, एक जफर पेंच दांव भी सीखाया था ये दांव एक पाकिस्तानी पहलवान आया था उसने सीखाया था.
वहीं सलमान के कजिन मतिन खान का कहना है कि मेरे चाचा अब्दुल नईम खान को बहुत शौक रहा है पहलवानी का. उन्होने कभी कुश्ती करी नहीं लेकिन जोर बहुत किया उन्होने हिंदुस्तानी कल्चर की जो पहलवानी है उसको बहुत अच्छे से देखा और समझा...तो ब्लड लाइन का जो असर है वो फैमिली पर कहीं न कहीं जरुर आता है.
सलमान ख़ान को पहलवानी का ये हुनर विरासत में मिला है और उनकी इस विरासत का एक अहम पड़ाव, एक सौ आठ साल पुरानी ये विजय बहादुर व्यायामशाला भी है. 1950 के दशक में इसी अखाड़े में सलमान खान के चाचा नईम खान और उनके पिता सलीम खान जोर करने और कुश्ती सीखने आया करते थे. हांलाकि इस अखाड़े की शक्लो-सूरत अब काफी बदल चुकी है. इंदौर के छावनी इलाके में मौजूद इस अखाड़े ने यूं तो देश को कई नामी पहलवान दिए हैं लेकिन साल 1978 में ये अखाड़ा उस वक्त भी सुर्खियों में आया, जब सलमान खान के पिता और बॉलीवुड के मशहूर फिल्म लेखक सलीम खान ने अपनी लिखी फिल्म डॉन में इस अखाड़े का जिक्र किया था.
ओलंपियन पप्पू यादव जो विजय बहादुर व्यायामशाला के पहलवान हैं के मुताबिक, हम उस समय आते थे जब बहुत छोटे थे. डॉन पिक्चर आई थी. तो डॉन कई बार देखी अखाड़े का नाम आता था हमारे. अमिताभ बच्चन बोलते थे हम भी विजय बहादुर उस्ताद के पट्ठे हैं. ऐसे वैसे नहीं. तो वो डॉयलॉग देखने हम कई बार पिक्चर देखने जाते थे. की भई हमारे अखाड़े का नाम लिया है तो वो कहानी सलीम साहब ने लिखी थी. तो हम बहुत छोटे थे तब वो यहां आते थे यहां पलासिया में घर था उनका. उनके बड़े भाई भी आते थे. तो काफी पुराना जुड़ाव है इस व्यायाम शाला से उनका.
विजय बहादुर व्यायामशाला इंदौर का अकेला अखाड़ा नहीं है. इस शहर में पहलवानी की परंपरा होल्कर रियासत के जमाने से रही है. महाराजा होल्कर राजबाड़ा में अहिल्याबाई की इसी मूर्ति के पास पहलवानों के दंगल करवाया करते थे, इंदौर में उन दिनों होने वाली इन कुश्तियों में पटियाला के मशहूर गामा पहलवान समेत देश भर के नामी पहलवान हिस्सा लिया करते थे. सुपरस्टार सलमान खान के चाचा नईम खान उन दिनों को याद कर बताते हैं कि जब वो 15 साल के थे तब इंदौर में होने वाले दंगलों को देखकर ही उन्हें भी पहलवानी का शौक लगा था लेकिन उनका ये शौक उस वक्त जुनून में तब्दील हो गया था जब उन्हें ये किताब एक अंग्रेज अफसर ने तोहफे में दी थी.
नईम खान ने बताया कि एक यूरोपियन फैमिली थी उन्होने मुझे ये किताब दी थी. मिस्टर सिडेन्स करके थे, यूरोपी थे मेरे फादर के दोस्त थे. बहुत अच्छे लोग थे. उस जमाने में तो इतनी इंग्लिश समझ में नहीं आती थी लेकिन धीरे- धीरे उस किताब को पढ़ता रहा समझता रहा. और फोटो देख कर धीरे-धीरे करता था. और शौक था मुझे ये फालतू ये स्टंटबाजी करना. तो ये एक स्टंट देखे जो कुर्सी उठाते हैं ना पाया पकड़ के तो मैं तीन चार कुर्सियां उठाता था.तो मेरे मुकाबले कोई नहीं कर पाता था.
स्ट्रेन्थ एंड हाउ टू आब्टेन इट, बॉडी बिल्डिंग पर लिखी गई करीब 125 साल पुरानी ये किताब दुनिया के पहले बॉडी बिल्डर यूजेन सैंडो ने लिखी थी. इंग्लैंड के रहने वाले यूजेन सैंडो की इसी किताब को पढ़ने के बाद सलमान के चाचा नईम खान ने भी देसी पहलवानी के साथ - साथ जिमिंग के जरिए बॉडी बिल्डिंग पर भी ध्यान देना शुरु किया था.
नईम खान बताते है कि जब वो 15 साल के थे तब उन्होंने अपने पॉकेट मनी से घर के अंदर ही छोटा सा अपना जिम भी बना लिया था. उन्होंने सैंडो की किताब में दिखाए गए ये डंबल भी तब 10 रुपये में खरीदे थे. इतना ही नहीं बॉडी बिल्डिंग में इस्तेमाल होने वाली वेट लिफ्टिंग की रॉड और वेट भी वो खुद ही कारखानों में बनवाया करते थे. इंदौर में सलमान खान के पुश्तैनी घर में रखा पत्थर का डंबल भी तब नईम खान के जिम का एक अहम हिस्सा हुआ करता था. करीब चालीस किलो वजनी इस डंबल को नईम खान एक हाथ से उठा लिया करते थे और इसी वजह से उनके हाथों में इतनी ताकत थी कि वो इंदौर और आस-पास के इलाके में पंजा लड़ाने के लिए मशहूर हो गए थे.
नईम खान ने आगे बताया, हां पंजे का मामला अलग था. कसरत करते थे तो पंजाब हरियाणा के उस्ताद थे उनका नाम काफी सुना था उनका नाम था नूर. उस्ताद तो उन्होने ने कहा कि इस लड़के से पंजा लड़ाओ मैं उस लड़के का हाथ नहीं मोड़ पाया. फिर मैने सीखा और अल्लाह के करम से बंबई में भी लड़ाया एमपी में भी लड़ाया भोपाल में भी लड़ाया मेरा हाथ आज तक कोई मोड़ नहीं पाया. अच्छा आज उस समय रिवाज भी था. आज पूछो तो कोई जानता भी नहीं हैं पंजा पूछो तो आर्म रेसलिंग समझते हैं वो पंजा अलग था. यूपी में भी बहुत था जोर रामपुर में भी लड़ाते थे. भोपाल में भी लड़ाते थे पर अब कोई नहीं जानता.
सुपस्टार सलमान खान के खानदान में पहलवानी का शौक उनके दूसरे चाचा अलीम खान और उनके कजिन भाइयों को भी रहा है. और यही वजह है कि बचपन में जब स्कूल की छुट्टियों के दौरान सलमान खान इंदौर आते थे तब अपने कजिन के साथ जिम में जाकर पसीना बहाना वो कभी नहीं भूलते थे.
सत्तर के दशक की शुरुआत में इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज की क्रिकेट टीम बेहद मजबूत मानी जाती थी. इस कॉलेज ने देश को कई नामी क्रिकेट खिलाड़ी भी दिए है लेकिन ये कॉलेज क्रिकेट और हॉकी जैसे स्पोर्टस ही नहीं बल्कि अपने जिम को लेकर भी मशहूर रहा है. 1974 में सलमान ख़ान के कजिन मतीन खान औऱ मुबीन खान भी क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ा करते थे.
उन दिनों कभी साइकिल पर तो कभी मोटरसाइकिल पर बैठ कर सलमान खान भी अपने कजिन के साथ क्रिश्चियन कॉलेज के उस जिम में जाया करते थे जहां उन्होंने पहली बार प्रोफेशनल जिम इक्वीपमेंट के जरिए अपने रिश्तेदारों को बॉडी बिल्डिंग करते देखा था.
मतीन खान जो सलमान खान के चचेरे भाई हैं उनके अनुसार, उस वक्त तो वो बच्चे थे तो जैसे हम कॉलेज जाया करते थे तो साथ में साइकिल में बैठकर हमारे साथ चले गये या मोटरसाइकिल में बैठकर चले गये. तो जो आदमी घर में बैठकर देखता है तो मैं समझता हुं कि उसका कहीं न कहीं बहुत ज्यादा असर आता है. सलमान में आज जो भी चीजें हैं जैसे लोगों की बहुत ज्यादा मदद करना, लो प्रोफाइल किसी से बात करना, नेचुरल तरीके से बात करना तो मैं ये समझता हुं कि ये सब फैमिली बैकग्राउंड से बहुत ज्यादा कनेक्टेड है. पहलवानी भी 100 % वही है. जैसे कोई बड़ा भाई एक्सरसाइज कर रहा है और छोटा भाई साथ में है तो नेचुरल सी बात है उसें इंटरेस्ट आ ही जाता है. तो उसमें वो करने की कोशिश करते थे.
1960 के दशक में इंदौर में पहला जिम शुरु हुआ था. क्रिश्चयन कॉलेज का ये जिम अब खस्ताहाल में है, यहां मौजूद जिम इक्वीपमेंट धूल से अटे पड़े है और इन पर मकड़ी के जाले तक लग चुके हैं. जाहिर है ये जिम कई सालों से बंद पड़ा है लेकिन बॉडी बिल्डिंग के ये साजो- सामान आज भी ये गवाही दे रहे हैं कि 70 के दशक में यहां कितनी रौनक होगी जब सुपरस्टार सलमान खान अपने कजिन के साथ इस जिम में वर्जिश करने आते थे. खास बात ये है कि क्रिश्चियन कॉलेज का जिम उन दिनों इसलिए भी मशहूर था क्योंकि यहां पसीना बहाकर कॉलेज के कई छात्रों ने बॉडी बिल्डिंग में राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल हासिल किए थे.
क्रिश्चियन कॉलेज के स्पोर्टस टीचर का कहना है कि पुराने समय में जो इक्वीपमेंट थे वो मल्टीपरपस आ गए. एक एक प्लेटफॉर्म पर दस दस एक्सरसाइज के वो आ गए. पुराने समय में सारे इक्वीपमेंट इंडीजुअल्स बने हुए है. ये तो दस पंद्रह साल से ये सब आए है. जैसे बाइसेप्स के लिए अलग है, पुशअप्स के लिए अलग है, पुलिंग के लिए अलग है. जैसे रोमन रिंग है ये अलग चीज है ये जिमनास्टिक की चीज है. लेकिन थोड़ा यहां पर लोगों को जो थोड़ा मेहनत करने का बॉडी खींचने का था वो इस पर करते थे. साथ में ये रोप कलांबिंग ये पार्ट है अखाड़ों का. लेकिन चूंकि आदमी में पावर चाहिए, जान चाहिए तो इसका उपयोग यहां चढ़ने के लिए यहां भी करने लगे. और दूसरा जो ये एक आजकल पावर लिफ्टिंग आ गया तो पावर लिफ्टिंग के अलग मूवमेंट है. तो ये सब डिफरेंस है.
क्रिश्चियन कॉलेज का जिम सुपरस्टार सलमान खान का पहला जिम है क्योंकि इससे पहले उन्होंने किसी प्रोफेशनल जिम में कदम नहीं रखा था. दिलचस्प बात ये भी है कि सलमान खान का ये पहला जिम इस मायने में भी अनोखा था कि इसमें पारंपरिक पहलवानी में काम आने वाले सामान और मॉर्डन बॉडी बिल्डिंग इक्वीपमेंट से लेकर जिमनास्टिक के साधन भी मौजूद थे.
नितिन जो कि बॉडी बिल्डर है का कहना है कि अगर आपने बॉडी बिल्डिंग शुरु की है तो पहले इससे आप पावर लेंगे फिर आप उसमें जाएंगे. बॉडी बिल्डिंग करे या कुश्ती करें. सबसे पहले ये रहता है पावर के लिए. आपके हाथों में पावर ही नहीं रहेगा तो अपने दंड कैसे लगाएंगे. आपके हाथ में पावर नहीं रहेगा तो आप डंबल कैसे उठाएंगे. तो दिस इज पावर. पावर के लिए ही इसे यूज करना पड़ेगा. पहले बार में नहीं चढ़ पाए दूसरे में नहीं चढ़ पाएंगे तीसरे में चढ़ेगे आप. तो इसेस पावर, अखाड़े में ज्यादा यूज होता है ये. और ये तो कितने साल बोला सर ने साठ सत्तर साला पुराना है. अब तो नए नए डेवलप हो गए पर हम सैल्यट करते हैं इन चीजों को.
एक तरफ पारंपरिक अखाड़ों में नजर आने वाला रस्सा है, वहीं जिम में मौजूद रोमन रिंग, पैरेलल बार और डबल बार जिमनास्ट के जरिए बॉडी को फ्लेक्जिबल बनाने के काम आते हैं. सुपरस्टार सलमान ख़ान के इस पहले जिम में वेट लिफ्टिंग बेंच, वेट लिफ्टिंग पुली, वेट लिफ्टिंग रॉड और बैरिंग से चलने वाली इस ट्रेड मिल के अलावा वेट लिफ्टिंग और पावर लिफ्टिंग में काम आने वाले अलग-अलग तरह के तमाम इक्वीपमेंट भी मौजूद है.
मतीन खान के अनुसार, आज अखाडों में भी ये हो गया है कि मॉर्डन और ट्रेडिशनल दोनों एक्सरसाइज वहां हो रही हैं तो उसके रिजल्ट अच्छे आते हैं. उस जमाने में हमारे एक कोच हुआ करते थे दाउद दलजी वो उनकी देन थी उन्होने उस चीज को समझी उस चीज पर स्टडी करकी उन्होने उस जिम को मॉर्डनाइज किया था.
एबीपी न्यूज़ के जसीम खान ने पूछा- तो सलमान खान भी जाते थे आप के साथ वहां तो किस तरह की यादें हैं किस तरह की कसरतें लगाते थे वो ?
मतीन ने कहा- एक्सरसाइज हुआ करती थीं रस्सा चढ़ गये, बेन्च प्रेस लगा ली फुटबॉल खेल लिया. रुटीन एक्सरसाइज हुआ करती थी और हमें जो एक्सरसाइज कराते थे उसका बैकग्राउंड हमारे चाचा से ही मिलता था.
जाहिर है सुपरस्टार सलमान खान को बचपन में ही बॉडी बिल्डिंग का चस्का लग चुका था लेकिन जब वो 15 साल के हुए तब उन्होंने बाकायदा आधुनिक साजो-सामान से लैस मुंबई के जिम में जाना भी शुरु कर दिया था. उन दिनों अक्सर युवा सलमान खान मुंबई के बांद्रा में बने होटल सी रॉक के जिम में पसीना बहाते देखे जाते थे. यही नहीं उन्होंने अपना एक जिम भी बना लिया था. दिलचस्प बात ये है कि सलमान खान का ये पहला जिम एक कार गैराज में बनाया गया था.
नईम खान ने बताया, वो बॉम्बे में रहते थे गर्मियों की छुट्टियों में आते थे, पर मेरे को देखकर उनको शौक लग गया था. औऱ फिर वहां तो बाम्बे में एक से एक जिम बन गए क्लब बन गए. टेकनीक नई नई आ गई एक एक मसल्स की आ गई. पहले दो चार पांच एक्सरसाइज करो औऱ बस. मगर वो नीचे उन्होनें वहां जिम बना लिया था वहीदा रहमान के गैरेज में. वो करते थे देखता था मैं बैठकर चुपचाप. अच्छा लगता था कि अच्छा कर रहे है औऱ अच्छे सेट्स करता था वेट के साथ में.
पंद्रह साल के सलमान खान की जिंदगी में बॉडी बिल्डिंग का जो सिलसिला शुरु हुआ वो फिर कभी थमा नहीं है, यही वजह है कि बतौर हीरो अपनी पहली फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ में शर्ट उतारने वाले सलमान का कसरती बदन उनकी फिल्म ‘सुल्तान’ में भी नजर आ रहा है.
दरअसल सलमान खान का गठीला जिस्म फिल्मी परदे पर आज उनकी सबसे बड़ी पहचान बन चुका है. एक ऐसी पहचान जिसे बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्टनिस्ट आमिर खान भी चुनौती देने की हिम्मत नहीं दिखा सके है.
सितंबर में रिलीज होने वाली आमिर खान की फिल्म ‘दंगल’ की कहानी भी फिल्म ‘सुल्तान’ की तरह हरियाणा के एक पहलवान महावीर सिंह फोगट की जिंदगी पर आधारित है. जाहिर है पहली बार पहलवान का किरदार निभा रहे आमिर भी फिल्मी परदे पर अपने गठीले बदन का जलवा दिखाएंगे. लेकिन आमिर भी सलमान को ही बॉलीवुड का असली बॉडी बिल्डर मानते हैं.
फिल्म सुल्तान की रिलीज से पहले सलमान खान एक बार फिर विवादों में घिर गए लेकिन तमाम विवादों के बीच भी उनका स्टारडम, बॉक्स ऑफिस पर शिद्दत से चमकता रहा है. सलमान आज बॉलीवुड के सबसे बिकाऊ और सबसे टिकाऊ फिल्म स्टार माने जाते हैं. खास बात ये है कि साल 2008 के बाद से उन्होंने जितनी भी फिल्मों में काम किया है उनमें से ज्यादातर फिल्मों में उन्होंने अपनी शर्ट उतारी है. लेकिन सलमान के गठीले बदन के पीछे जहां खानदानी पहलवानी छिपी है, तो वहीं अपने कसरती जिस्म को बनाए रखने के लिए उन्होंने मेहनत भी ढेर सारी की है. सलमान खान आज भी हर दिन जिम में जमकर पसीना बहाते हैं और यही वजह है कि पचास साल की उम्र में भी फिल्मी परदे पर नजर आ रहा है ये सुल्तान.
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