छोटे दुकानदारों के लिए बड़ी राहत, 1 नवंबर से आसान होगा GST रजिस्ट्रेशन
अमेजन, फ्लिपकार्ट पर सामान बेचने वाले छोटे ई-कॉमर्स सेलर्स के लिए 1 नवंबर से जीएसटी रजिस्ट्रेशन आसान होने जा रहा है. 57वीं GST काउंसिल की बैठक में इस पर फैसला लिया गया था.

- छोटे ई-कॉमर्स सेलर्स का सरल GST रजिस्ट्रेशन 1 नवंबर से शुरू.
- ई-कॉमर्स वेयरहाउस को मुख्य व्यापारिक स्थान मानकर रजिस्ट्रेशन मिलेगा.
- 20 लाख से कम टर्नओवर पर TCS से अब छूट मिलेगी.
छोटे ई-कॉमर्स सेलर्स के लिए वस्तु एवं सेवा कर (GST) रजिस्ट्रेशन की सरल प्रक्रिया 1 नवंबर से शुरू हो जाएगी. अभी 57वीं GST काउंसिल की बैठक में इसे मंजूरी दी गई थी. 'एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया' (ASSOCHAM) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान नाम न जाहिर करने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि रजिस्ट्रेशन के आसान प्रॉसेस को शुरू करने के लिए सिस्टम में जरूरी सारे बदलाव पूरे कर लिए गए हैं और अगले महीने की शुरुआत से GST पोर्टल पर यह सुविधा लाइव हो जाएगी.
क्या है नया नियम?
काउंसिल ने केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) नियम, 2017 के नए नियम 14B के तहत एक सरल और वैकल्पिक पंजीकरण प्रक्रिया का प्रस्ताव रखा था. इस व्यवस्था के तहत ई-कॉमर्स साइट्स पर सामान बेचने वाले छोटे विक्रेता दूसरे राज्यों में भी रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे. इसके लिए उन्हें ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के गोदाम को ही अपना मुख्य व्यावसायिक स्थान (principal place of business) घोषित करना होगा. उन्हें उन राज्यों में अपना अलग कार्यालय या दुकान खोलने की आवश्यकता नहीं होगी.
पहले अगर कोई सेलर अमेजन या फ्लिपकार्ट के जरिए देश के अन्य राज्यों के वेयरहाउस (गोदामों) में अपना माल स्टॉक करना चाहता था, तो उसे उस राज्य में अपना एक फिजिकल ऑफिस दिखाना पड़ता था. नए नियम में इस अनिवार्यता को अब खत्म कर दिया गया है. पहले के नियम में दूसरे राज्यों में ऑफिस किराए पर लेने, उसका बिजली बिल भरने, रेंट एग्रीमेंट बनाने वगैरह में झंझट होता था, लेकिन अब नए नियम के तहत, सेलर अमेजन या फ्लिपकार्ट के Fulfillment Centre या वेयरहाउस में अपना सामान रखकर दूसरे राज्यों के ग्राहकों को तेजी से डिलीवरी कर सकेंगे.
20 लाख से कम टर्नओवर पर राहत
नए नियम में जिन छोटे ई-कॉमर्स ऑपरेटर का सालाना टर्नओवर 20 लाख से कम है, उन्हें अब टीसीएस (TCS) कलेक्शन के दायरे से छूट देते हुए जीएसटी थ्रेशोल्ड लिमिट का पूरा लाभ दिया जाएगा. यानी कि जिस तरह एक छोटे ऑफलाइन दुकानदार को 20 लाख तक के टर्नओवर पर कोई टैक्स नहीं देना होता है. ठीक उसी तरह से यह सुविधा अब ऑनलाइन सेलर्स को भी दी जाएगी. अब जब टैक्स नहीं कटेगा, तो रोजमर्रा के कारोबार के लिए उनके पास अधिक पैसा बना रहेगा.
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