मिडिल क्लास बाजार के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ सकता है भारत: रिपोर्ट
ब्रूकिंग्स की तरफ से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का मध्यमवर्गीय बाजार तेजी से आगे बढ़ रहा है और 2022 तक भारत अमेरिका को पीछे कर सकता है. इस रिपोर्ट मे वैश्विक स्तर पर मिडिल क्लास के बाजार में बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है.

नई दिल्ली: जापान के बाद अब अमेरिका को पीछे छोड़ 2022 तक भारत मध्यम वर्ग के बाजार के मामले में पहले स्थान पर आ सकता है. एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत का मध्यम वर्गीय बाज़ार तेजी से बढ़ रहा है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 2016 में भारत ने मध्यमवर्गीय बाजार के मामले में जापान को पिछाड़ दिया था.
ब्रूकिंग्स की तरफ से यह रिपोर्ट जारी की गई है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का मध्यमवर्गीय बाजार तेजी से आगे बढ़ रहा है और 2022 तक भारत अमेरिका को पीछे कर सकता है. इस रिपोर्ट मे वैश्विक स्तर पर मिडिल क्लास यानी मध्यम वर्ग के बाजार में बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है.
रिपोर्ट में कहा गया है, "पूरी दुनिया में जो भी नए लोग अरबपति बनेंगे, उनमें से 90% लोग अकेले एशिया महाद्वीप से ही होंगे. इन लोगों में करीब 380 मिलियन या 38 करोड़ लोग भारत से जबकि 350 मिलियन या 35 करोड़ लोग चीन से हो सकते हैं. इसके अलावा 210 मिलियन या 21 करोड़ अन्य एशियाई लोग होंगे. रिपोर्ट के मुताबिक भारत का विश्व जनसंख्या में बड़ा योगदान है, इसके चलते ही भारत में मिडिल क्लास की संख्या भी ज़्यादा है.
भारत, इंडोनेशिया और नाइजीरिया जैसे विकासशील देशों के मिडिल क्लास देश बनने की वजह से अब फर्टिलिटी रेट में कमी आ सकती है और इस हिसाब से बढ़ती जनसंख्या पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी. भारत के मिडिल क्लास मार्केट बनने वाला है लेकिन सोशल असिस्टेंस ना होना भारत के लिए परेशानी बन सकता है.
एक दूसरी रिपोर्ट के मुताबिक किसी भी विकासशील देश ने एक मजबूत सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम नहीं बनाया है. जबकि विकास की इस स्टेज पर विकसित देश एक मजबूत सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम बना चुके थे. हर विकासशील देश उस स्थिति में है जहां पर उसे किसी ऐसे प्रोग्राम को बनाने की ज़रूरत है.
मिडिल क्लास जनसंख्या के बढ़ने के चलते कार्बन फुटप्रिंट (वातावरण में जिसनी कार्बन डाइऑक्साइड है) वो बढ़ने के आसार हैं. लेकिन अगर नए शहरों को अच्छे तरीके से प्लान किया जाए तो कार्बन का उत्सर्जन कम किया जा सकता है. इसके लिए उन तरीकों का इस्तेमाल किया जाना ज़रूरी है जिनसे हम कार्बन कम उपयोग करें. इसके लिए मास ट्रांसपोर्ट और कम ऊर्जा की खपत वाली इमारतों का निर्माण किया जा सकता है.
Source: IOCL


























