इस कंपनी के शेयर की लगी लंका, 2 दिन में 15 प्रतिशत लुढ़का, नुवामा कहा- खरीदने का सही मौका
ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल का मानना है कि संशोधित एक्साइज ड्यूटी संरचना मौजूदा व्यवस्था की तुलना में काफी ज्यादा है और यह जीएसटी के तहत टैक्स-न्यूट्रल ट्रांजिशन की उम्मीदों के विपरीत है.

IT Share Falls: भारतीय खुदरा निवेशकों के बीच वर्षों से भरोसेमंद माने जाने वाले आईटीसी के शेयर को सिगरेट पर टैक्स बढ़ने से बड़ा झटका लगा है. नए कर ढांचे की घोषणा के बाद कंपनी के वैल्यूएशन में करीब 15 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई है. इसी के चलते ब्रोकरेज फर्म नुवामा इक्विटीज ने आईटीसी के शेयर को डाउनग्रेड करते हुए ‘बाय’ से ‘होल्ड’ रेटिंग में ला दिया है और 12 महीने का टारगेट प्राइस 534 रुपये से घटाकर 415 रुपये कर दिया है.
क्यों आईटी के शेयर में गिरावट?
आईटीसी के शेयरों में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने सिगरेट पर टैक्स बढ़ाने का ऐलान किया है, जो 1 फरवरी 2026 से लागू होगा. नए कर ढांचे के तहत सरकार ने बेस जीएसटी दर को 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया है. इसके साथ ही पहले लागू फिक्स्ड सेस और एड-वेलोरम (मूल्य आधारित) टैक्स की जगह अब प्रति 1,000 सिगरेट स्टिक पर एक नई बेसिक एक्साइज ड्यूटी लागू की गई है. हालांकि, नेशनल कैलैमिटी कंटिजेंट ड्यूटी (NCCD) को पहले की तरह ही बरकरार रखा गया है.
ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल का मानना है कि संशोधित एक्साइज ड्यूटी संरचना मौजूदा व्यवस्था की तुलना में काफी ज्यादा है और यह जीएसटी के तहत टैक्स-न्यूट्रल ट्रांजिशन की उम्मीदों के विपरीत है. जेएम फाइनेंशियल के अनुमान के अनुसार, मिश्रित आधार पर आईटीसी के लिए प्रति सिगरेट स्टिक बेसिक एक्साइज ड्यूटी और कुल टैक्स बोझ में 40 से 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है. इस अतिरिक्त टैक्स का असर संतुलित करने के लिए कंपनी को सिगरेट के एमआरपी में 20 से 40 प्रतिशत या उससे भी अधिक की बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है, जिसमें औसतन लगभग 35 प्रतिशत तक की कीमत वृद्धि संभव है.
क्या है ब्रोकरेज फर्म की राय
ब्रोकरेज का यह भी कहना है कि 65 मिमी से कम लंबाई वाली डीएसएफटी श्रेणी, जो आईटीसी के कुल वॉल्यूम का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा है, उस पर असर अपेक्षाकृत सीमित रहेगा. वहीं आरएसएफटी सेगमेंट, जो करीब 50 प्रतिशत वॉल्यूम का प्रतिनिधित्व करता है, साथ ही लॉन्ग्स और केएसएफटी श्रेणियों में ड्यूटी दरों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है. इससे इन सेगमेंट्स में बिक्री और मार्जिन पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
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