Elon Musk SpaceX IPO: आ रहा दुनिया का सबसे बड़ा IPO, जानें मस्क की कंपनी SpaceX में कब मिलेगा दांव लगाने का मौका?
SpaceX IPO Timeline: एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स आईपीओ लाने जा रही है. बताया जा रहा है कि इसके लिए ड्राफ्ट पेपर्स भी जमा करा दिए गए हैं. इसका वैल्यूएशन 1.75-2 ट्रिलियन डॉलर के बीच हो सकता है.

SpaceX IPO: दुनिया के सबसे अमीर शख्स और टेक दिग्गज एलन मस्क (Elon Musk) की मशहूर स्पेस और सैटेलाइट कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) अपना आईपीओ लाने जा रही है. कंपनी ने इसके लिए अमेरिकी नियामक (SEC) के पास IPO के लिए आधिकारिक तौर पर ड्राफ्ट पेपर्स जमा कराए हैं.
अनुमान लगाया जा रहा है कि SpaceX 12 जून तक नैस्डैक (Nasdaq) पर SPCX टिकर के साथ लिस्ट होने की तैयारी कर रहा है. पिछले हफ्ते Reuters की एक रिपोर्ट के अनुसार, SpaceX का लक्ष्य 12 जून तक अपने शेयर लिस्ट करना है, जिसमें 4 जून को रोडशो शुरू करने और 11 जून तक शेयरों की बिक्री शुरू होने की उम्मीद है. अगर सब कुछ ठीक रहा, तो यह अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है.
SpaceX की लंबी उड़ान
सालों तक SpaceX को रॉकेट लॉन्च करने वाली एक कंपनी के तौर पर देखा जाता है, लेकिन अब यह इससे काफी निकल चुकी है. कंपनी अब सैटेलाइट भी लॉन्च करती है, Starlink सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क चलाती है, दोबारा इस्तेमाल होने वाले रॉकेट बनाती है और अब मस्क की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी xAI की भी मालिक है.
इसकी दोबारा इस्तेमाल होने वाली रॉकेट टेक्नोलॉजी ने अंतरिक्ष में पेलोड भेजने की लागत को 80 परसेंट तक कम कर दिया है. स्पेसएक्स का रॉकेट बिजनेस भारी रिसर्च और खर्च डिमांड करता है. वहीं, स्टारलिंक के 1 करोड़ से अधिक ग्लोबल सब्सक्राइबर्स कंपनी को हर महीने अरबों डॉलर का नकद मुनाफा दे रहे हैं.
कहां फंस रहा पेंच?
SpaceX का बहुत ज्यादा वैल्यूएशन निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है. 1.75 ट्रिलियन डॉलर के हिसाब से कंपनी का वैल्यूएशन साल 2025 में उसके कमाए गए 18.7 अरब डॉलर के रेवेन्यू से अधिक बैठ रहा है. कंपनी भले ही तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन इसका खर्च भी तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में अगर 18.7 अरब डॉलर के रेवेन्यू पर 1.75 ट्रिलियन डॉलर का वैल्यूएशन मांगा जा रहा है, तो यह 90 गुना से ज्यादा का प्राइस-टू-सेल्स (P/s) मल्टीपल है. Apple और Nvidia जैसी कंपनियां इतने ऊंचे मल्टीपल पर ट्रेड नहीं करतीं.
चिंता का यह भी एक कारण
इसका कॉर्पोरेट गवर्नेंस भी चिंता का एक विषय है. रिपोर्ट के मुताबिक, आईपीओ के बाद भी कंपनी के 'सुपर-वोटिंग शेयर्स' के कारण CEO Elon Musk कंपनी का लगभग 43 परसेंट हिस्सा अपने पास रखते हुए भी लगभग 80 परसेंट वोटिंग पावर को कंट्रोल करेंगे. इसका मतलब है कि आम निवेशकों के पास शेयर तो होंगे, लेकिन कंपनी के फैसलों में उनकी राय बहुत कम होगी.
(यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
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