Dearness Allowance: कितने प्रकार के होते हैं डीए और कैसे तय होती है दर?
महंगाई भत्ता (डियररेंस अलाओएंस) सरकारी कर्मचारियों की सैलरी का काफी अहम हिस्सा माना जाता है. इसकी दर AICPI के आधार पर तय होती है. जानें DA के प्रकार, गणना का फॉर्मूला और टैक्स से जुड़े जरूरी नियम.

- केंद्र सरकार महंगाई भत्ता साल में दो बार संशोधित करती है.
- महंगाई भत्ते की गणना AICPI के औसत आंकड़ों पर आधारित.
- केंद्र, राज्य कर्मचारी व पेंशनभोगी लाभान्वित, यह कर योग्य.
केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी में महंगाई भत्ता यानी डियररेंस अलाउंस (DA) अहम भूमिका निभाता है. बढ़ती महंगाई के बीच रोजमर्रा के खर्चों का असर कम करने के लिए सरकार कर्मचारियों को यह भत्ता देती है. DA में बढ़ोतरी होने पर कर्मचारियों की सैलरी में इजाफा होता है. इसकी दर तय करने में महंगाई के आंकड़ों का महत्वपूर्ण योगदान होता है.
केंद्र सरकार आमतौर पर साल में दो बार महंगाई भत्ते में संशोधन करती है. इसकी घोषणा मार्च और अक्टूबर के आसपास होती है, जबकि नई दरें जनवरी और जुलाई से लागू की जाती हैं. DA तय करने में ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI) के आंकड़ों का इस्तेमाल होता है. यह सूचकांक बताता है कि समय के साथ वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में कितना बदलाव आया है.
कैसे निकाला जाता है DA बढ़ोतरी का हिसाब?
महंगाई भत्ते की गणना के लिए पिछले 12 महीनों के AICPI के औसत आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है. सातवें वेतन आयोग के तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों के DA की गणना एक तय फॉर्मूले से होती है. सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए गणना में पिछले तीन महीनों के औसत आंकड़े इस्तेमाल किए जाते हैं.
केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए फॉर्मूला इस प्रकार है:
DA प्रतिशत = सरकार महंगाई के आंकड़ों के आधार पर नई दर तय करती है. जनवरी 2026 से केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशन भोगियों का DA 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत किया गया था. यानी इसमें 2 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई.
कितने प्रकार का होता है महंगाई भत्ता?
महंगाई भत्ते को समझने के लिए इसकी दो प्रमुख श्रेणियों को जानना जरूरी है.
- इंडस्ट्रियल DA: यह मुख्य रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के औद्योगिक कर्मचारियों से जुड़ा होता है. इसकी समीक्षा आम तौर पर हर तीन महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर की जाती है.
- वेरिएबल DA (VDA): यह निर्धारित न्यूनतम वेतन पाने वाले श्रमिकों की महंगाई से सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होता है. इसकी दरें उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और न्यूनतम वेतन से जुड़े नियमों के आधार पर संशोधित की जाती हैं.
ध्यान रहे कि केंद्र सरकार के नियमित कर्मचारियों का DA और न्यूनतम वेतन पाने वाले श्रमिकों का VDA अलग-अलग नियमों के तहत तय होता है.
किन लोगों को मिलता है महंगाई भत्ते का लाभ?
केंद्र और राज्य सरकारों के पात्र कर्मचारियों के अलावा पेंशनभोगियों को भी महंगाई से राहत देने के लिए संबंधित भत्ता या राहत दी जाती है. वहीं, निजी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को DA मिलना अनिवार्य नहीं है। यह उनके रोजगार और वेतन से जुड़े नियमों पर निर्भर करता है.
क्या DA पर टैक्स भी लगता है?
वेतन में मिलने वाला महंगाई भत्ता आयकर के दायरे में आता है. कर्मचारियों को इसे अपनी आयकर रिटर्न में दिखाना होता है. DA बढ़ने से हाथ में आने वाली सैलरी बढ़ सकती है, लेकिन वास्तविक फायदा कर्मचारी के मूल वेतन और लागू टैक्स नियमों पर निर्भर करेगा. इसलिए DA की नई दर जानने के साथ यह समझना भी जरूरी है कि इसकी गणना किस आधार पर होती है और बढ़ोतरी का आपकी सैलरी पर कितना असर पड़ेगा.
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