एक फरवरी को केन्द्रीय बजट पेश होने वाला है और इससे पहले अलग–अलग सेक्टर सरकार से अपनी-अपनी मांगें रख रहे हैं. उद्योग जगत न सिर्फ वित्तीय राहत की उम्मीद कर रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर दूसरे देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए भी सरकार से सहयोग चाहता है. इन्हीं क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भी शामिल है, जिसने चीन में लगाए गए प्रतिबंधों का हवाला देते हुए सरकार से संरक्षण और राहत की मांग की है.
क्यों सरकार से गुहार?
मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग का कहना है कि चीन द्वारा मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाले कई अहम कंपोनेंट्स के निर्यात पर रोक लगाने से वैश्विक सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ा है. भारत में मोबाइल फोन निर्माण काफी हद तक आयातित पार्ट्स पर निर्भर है, ऐसे में चीन के प्रतिबंधों ने उत्पादन लागत और आपूर्ति दोनों को जोखिम में डाल दिया है. इसी वजह से कंपनियां सरकार से बजट में ऐसे कदम उठाने की मांग कर रही हैं, जिससे घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती मिल सके.
इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) ने सरकार से मोबाइल पार्ट्स जैसे माइक्रोफोन, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी) और वियरेबल्स पर कस्टम ड्यूटी में कटौती की मांग की है. इसके साथ ही, अन्य जरूरी कंपोनेंट्स पर भी टैरिफ कम करने की अपील की गई है, ताकि मोबाइल फोन की कुल उत्पादन लागत घटाई जा सके. आईसीईए के सदस्य संगठनों में एप्पल, फॉक्सकॉन, शाओमी, वीवो और ओप्पो जैसी बड़ी वैश्विक कंपनियां शामिल हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, आईसीईए ने सरकार को बताया है कि चीन की ओर से मैन्युफैक्चरिंग इनपुट्स पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण सप्लाई चेन में अनिश्चितता काफी बढ़ गई है. भारत की आयात पर निर्भरता इस जोखिम को और बढ़ा रही है. ऐसे में उद्योग संगठन ने मांग की है कि मोबाइल निर्माण में इस्तेमाल होने वाले आयातित कंपोनेंट्स पर जीरो ड्यूटी का लाभ दिया जाए, ताकि कंपनियों को राहत मिल सके और उत्पादन प्रभावित न हो.
सीमा शुल्क में छूट की मांग
उद्योग निकाय ने यह भी याद दिलाया कि पिछले बजट 2025-26 में सरकार ने कई कैपिटल गुड्स को सीमा शुल्क से बाहर रखा था. इसी तर्ज पर मोबाइल फोन उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले आयातित कंपोनेंट्स और लिथियम आयन सेल पर भी सीमा शुल्क शून्य किया जाना चाहिए. संगठन का कहना है कि इन जरूरी कंपोनेंट्स के बिना न केवल उत्पादन लागत बढ़ेगी, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया भी बाधित हो सकती है.
आईसीईए ने आगे कहा कि बैटरी मैटेरियल्स की वैश्विक आपूर्ति पहले से ही अनिश्चित बनी हुई है और चीन द्वारा निर्यात पर रोक लगाए जाने से यह समस्या और गंभीर हो गई है. ऐसे में भारत में जल्द से जल्द घरेलू बैटरी और लिथियम सेल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करना बेहद जरूरी हो गया है. इसी को ध्यान में रखते हुए उद्योग संगठन ने लिथियम सेल मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी पर भी सीमा शुल्क माफ करने की मांग सरकार से की है, ताकि भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सके.
























