अमेरिका का दोहरा रवैया, भारत पर पाबंदी लगाकर खुद रूस से खरीद रहा तेल
अमेरिका के दोहरे रवैये ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. एक तरफ वह भारत और चीन जैसे देशों को रूस से तेल व गैस न खरीदने के लिए दबाव डाल रहा है और खुद डील साइन कर रहा है.

- अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस से बड़े पैमाने पर डीजल खरीदने की घोषणा की.
- खुद रूस से कुल 48 लाख टन डीजल खरीदने पर सहमति बनी.
- अमेरिका ने अन्य देशों को रूसी तेल खरीदने पर प्रतिबंधों की धमकी दी.
- नवंबर चुनावों से पहले बढ़ती डीजल कीमतें रोकने के लिए यह कदम.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से बड़े पैमाने पर डीजल खरीदने का ऐलान किया है, जिसने पूरी दुनिया में हड़कंप मचा दिया है. एक तरफ अमेरिका, भारत सहित रूस से तेल खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों को यह धमकी दी है कि अगर उन्होंने रूस से तेल खरीदा, तो अमेरिका उन पर 100% टैरिफ लगा देगा.
इस सिलसिले में अमेरिका में 'सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' (SRIA) 2026 का कानून भी पास हुआ है. अब सवाल आता है कि यह अमेरिका का कैसा दोहरा रवैया है, एक तरफ वह दूसरे देशों को रूस से तेल खरीदने के लिए मना कर रहा है और दूसरी तरफ खुद वही काम कर रहा है. बता दें कि अमेरिका ने रूस से तुरंत 3 लाख टन और नवंबर में 5 लाख टन डीजल खरीदने का करार किया है.
रूस से कितना डीजल खरीदेगा अमेरिका?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुए समझौते के तहत अमेरिका रूस से कुल 48 लाख टन (करीब 3.6 करोड़ बैरल) तक डीजल खरीदने जा रहा है. इनमें से 3 लाख टन से अधिक डीजल की सप्लाई अभी तुरंत की जाएगी. जबकि नवंबर महीने में 5 लाख टन डीजल अलग से भेजे जाएंगे. इसके बाद फिर 10 लाख टन डीजल की सप्लाई की जाएगी. बतौर ट्रंप, अगर सब कुछ ठीक रहा तो रूस से 30 लाख टन डीजल की सप्लाई की जा सकती है.
क्यों रूस से डीजल खरीद रहा अमेरिका?
अमेरिका में नवंबर 2026 में मिडटर्म चुनाव होने हैं और इस बीच यहां डीजल की कीमतें काफी ज्यादा बढ़ गई है, जो अभी 6.28 डॉलर प्रति गैलन के ऐतिहासिक स्तर पर है. प्यू रिसर्च के मुताबिक, 84% अमेरिकी वोटरों के लिए इस समय अर्थव्यवस्था का मुद्दा सबसे बड़ा है. अमेरिका में किसान से लेकर ट्रक चालक और छोटे कारोबारी सभी इस महंगाई से बेहद परेशान हैं और ये ही लोग ट्रंप के वोट बैंक का भी एक बड़ा हिस्सा है. ऐसे में कहीं न कहीं ट्रंप प्रशासन चुनाव में अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठा रहे हैं.
ये भी पढ़ें:
साल के आखिर तक 6000 डॉलर का हो जाएगा सोना, जानें कितने में मिलेगा 10 ग्राम?






















