8th Pay Commission: 14% से छलांग लगाकर 140% तक कैसे पहुंचेगी सैलरी?
कर्मचारी यूनियनों ने 8वें वेतन आयोग के तहत फिटमेंट फैक्टर को 3.833 रखने की मांग की है. यह पिछले वेतन आयोग में कर्मचारियों को मिली वास्तविक वेतन वृद्धि का लगभग 10 गुना बैठता है.

- 8वें वेतन आयोग की बैठक में 3.833 फिटमेंट फैक्टर पर जोर.
- यह फैक्टर 7वें आयोग के 2.57 से 49% अधिक है.
- पिछली कम बढ़ोतरी और महंगाई की भरपाई हेतु मांग.
8वें वेतन आयोग की इस हफ्ते मुंबई में हितधारकों के साथ बड़ी बैठक है. इसमें मुख्य रूप से 3.833 के फिटमेंट फैक्टर की मांग दोहराए जाने की संभावना है. इसके जरिए पेंशन और सैलरी में बढ़ोतरी की बात रखी जाएगी. 3.833 का फिटमेंट फैक्टर 7वें वेतन आयोग के 2.57 के फिटमेंट फैक्टर से 49% अधिक है.
अगर सरकार कर्मचारी यूनियनों की इस मांग को मान लेती है, तो सैलरी के मल्टीप्लायर में सीधे तौर पर लगभग 49% की बढ़ोतरी हो जाएगी. इसे ठीक से समझने के लिए यह ध्यान रखना जरूरी है कि फिटमेंट फैक्टर दो तरह से काम करता है. पहला यह जमा हुए महंगाई भत्ते (DA) को बेसिक पे में मर्ज कर लेतर है और फिर इसके ऊपर जो भी हाइक मिलती है, उसे ही वेतन में वास्तविक वृद्धि माना जाता है.
2.57 फिटमेंट फैक्टर का असली गणित
छठे वेतन आयोग (6th CPC) के अंत में महंगाई भत्ता 125% तक पहुंच चुका था. अब जब बेसिक सैलरी में 125% को जोड़ा जाएगा, तो वह अपने आप ही अपने मूल वैल्यू का 2.25 गुना हो जाएगा. मिसाल के तौर पर, अगर आपकी बेसिक सैलरी 10000 रुपये है और इसमें 125% के रूप में 12500 रुपये का महंगाई भत्ता जोड़ा जाए, तो नई सैलरी 22,500 रुपये हो जाएगी, जो 10,000 का ठीक 2.25 गुना है. अब जब 1 जनवरी 2016 को सातवां वेतन आयोग लागू हुआ, तब नियमों के मुताबिक, 125% DA को बेसिक सैलरी में मर्ज करना था.
अब बेसिक सैलरी में 125% जोड़ने का मतलब पुरानी सैलरी का 2.25 गुना हो जाना है. यानी कर्मचारियों की पुरानी सैलरी को सुरक्षित रखने के लिए कम से कम 2.25 से गुना करना जरूरी था. सिर्फ DA मर्ज करने से कर्मचारियों की असली सैलरी नहीं बढ़ती, वह तो सिर्फ महंगाई की भरपाई होती है इसलिए सातवें वेतन आयोग ने कर्मचारियों को इसके ऊपर 14.29% की वास्तविक वेतन वृद्धि (Fitment Benefit) देने की सिफारिश की थी, जो ऐतिहासिक रूप से अब तक की सबसे कम बढ़ोतरी थी. जब 2.25 की बेसिक सैलरी में वास्तविक 14.29% की बढ़ोतरी को मल्टीप्लाई किया गया, तो यह 2.5714 आया, जिसे राउंड ऑफ कर 2.57 किया गया.
8वें वेतन आयोग में 3.833 की मांग
कर्मचारी यूनियनों की मांग है कि जिस तरह से छठे वेतन आयोग में 54% की भारी बढ़ोतरी मिली थी और सातवें वेतन आयोग में सबसे कम बढ़ोतरी हुई थी, तो इसकी कसर अब आठवें वेतन आयोग में पूरी की जाए. कर्मचारी यूनियनों का तर्क है कि जिस तरह से पिछले दस सालों में महंगाई बढ़ी है, उसे देखते हुए 14.3% की बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी काफी कम है. इसका उनकी परचेजिंग पावर पर असर पड़ा है. अब अगर सरकार 3.833 का फिटमेंट फैक्टर को मान लेती है, तो कर्मचारियों को पिछले वेतन आयोगों के स्तर की वास्तविक और संतोषजनक वेतन वृद्धि मिल पाएगी.
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