आतंकवाद की चुनौती से मिलकर निपटेंगे अब भारत-बांग्लादेश

वैसे तो पिछले पांच दशक से ही भारत और बांग्लादेश के रिश्ते दोस्ती भरे रहे हैं क्योंकि साल 1971 में उसे पाकिस्तान से आजाद कराकर एक अलग मुल्क बनाने में भारत का अहम योगदान था. लेकिन पिछले कुछ सालों में बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और विकास ने जो रफ्तार पकड़ी है, उसे देखते हुए अब वह भारत का महत्वपूर्ण पड़ोसी मुल्क बन गया है. दोनों देशों के बीच कई मुद्दों को सुलझा लिया गया है लेकिन कुछ मसले सुलझना अभी भी बाकी है. आतंकवाद की चुनौती से निपटने के लिए भी भारत को बांग्लादेश के साथ की जरूरत है, इसलिए कि भौगोलिक रूप से वह भारत के लिए अधिक संवेदनशील है.
तीन साल बाद भारत यात्रा पर आईं बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा की है. इसमें आतंकवाद और चरमपंथ का मुद्दा भी उठा. आपसी द्विपक्षीय सहयोग को भी और किस तरह से बढ़ाया जाये, इस पर भी दोनों शीर्ष नेताओं के बीच विस्तार से बातचीत हुई है. दोनों देशों ने सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित हैं. लेकिन इसमें अहम ये है कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर कुशियारा नदी से पानी कम करने को लेकर अब दोनों के बीच समझौता हो गया है. दरअसल, ये समझौता कुशियारा नदी के जल बंटवारे से संबंधित है जिससे दक्षिणी असम के कुछ क्षेत्रों और बांग्लादेश के सिलहट इलाके को अब इसका फायदा मिलेगा.
दोनों प्रधानमंत्रियों की इस बैठक में बढ़ते आतंकवाद और चरमपंथ का भी मुद्दा उठा. पीएम मोदी ने कहा कि आज हमने आतंकवाद और चरमपंथ के खिलाफ सहयोग पर जोर दिया है. 1971 की भावना को जीवित रखने के लिए बहुत जरूरी है कि हम ऐसी ताकतों का मिलकर सामना करें जो हमारे आपसी विश्वास पर हमला करती हों.
बांग्लादेश के महत्व को रेखांकित करते हुए मोदी ने ये भी कहा कि वह भारत का सबसे बड़ा विकास भागीदार है. दोनों देशों के लोगों के बीच सहयोग के स्तर में निरंतर सुधार हो रहा है. हमने आईटी , अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा सेक्टर में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है. पिछले साल बांग्लादेश की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ और शेख मुजीबुर्रहमान की जन्म शताब्दी का जिक्र करते हुए मोदी ने याद दिलाया कि उस मौके पर भारत ने एक रैली आयोजित की थी.
उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि अगले 25 साल के अमृतकाल में हमारी मित्रता नई ऊंचाइयों को छुएगी. प्रधानमंत्री ने ऐलान किया कि भारत-बांग्लादेश के बीच व्यापार वार्ता जल्द शुरू होगी. उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश बहुत जल्द सीईपीए (व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता) पर चर्चा शुरू करेंगे. वहीं बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि हमारी प्राथमिकता लोगों के मुद्दों, गरीबी हटाओ और इकॉनमी को डेवलप करना है.
शेख हसीना ने कहा कि भारत बांग्लादेश के लिए सबसे महत्वपूर्ण, निकटतम पड़ोसी है.दोनों देशों ने अतीत में बकाया मुद्दों को सुलझाया है और मुझे उम्मीद है कि तीस्ता जल बंटवारा संधि सहित दोनों देश सभी लंबित मुद्दों का शीघ्र समाधान कर लेंगे.गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एतराज के चलते तीस्ता जल समझौते पर अभी तक अमल नहीं हो पाया है.
हालांकि एक समय था जब भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में दूरी कुछ अधिक थी. लेकिन पिछले एक दशक में दोनों देशों के संबंध काफ़ी गहरे हुए हैं.दोनों देशों की सरकारों के बीच कई मुद्दों पर पहले भी समझौते हुए हैं और एक-दूसरे की समस्याओं पर ध्यान दिया गया. ये अलग बात है कि नौकरशाही की समस्याओं के चलते उठाए गए क़दमों के कार्यान्वयन में कुछ देरी हो रही हो.
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