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मेयर चुनाव: भारत में 'गन' तंत्र का नहीं राज, बीजेपी ने खूब उकसाया, पैरामिलिट्री फोर्स को सदन के अंदर घुसाया

बीजेपी के चलते एक बार फिर से दिल्ली मेयर का चुनाव टल गया है. लेकिन, सबसे बड़ी बात ये है कि 24 जनवरी को एमसीडी हाउस के अंदर जो कुछ हुआ है, उसको इस तरह से देखना चाहूंगा कि एक तरफ जहां पर 74 गणतंत्र दिवस मना रहे हैं. रिपब्लिक इज गवर्न बाय कंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया. देश का सर्वोत्तम डॉक्यूमेंट्स अगर कुछ है वो है हमारा संविधान. इस संविधान से पीएम से लेकर सीएम तक बनते हैं. देश में अगर सबसे सुप्रीम अगर कुछ है तो संविधान है. लेकिन, जिस तरीके से हथियारों के साथ आर्म्ड मिलिट्री फोर्स का बीजेपी ने इस्तेमाल कर उसे एमसीडी हाउस में बिठा दिया, ये बीजेपी का सबसे बड़ा दुर्भाग्य था, जो डेमोक्रेसी को बदनाम करता है.

डेमोक्रेसी में किसी की भी जीत या हार हो सकती है. जनता चुनकर भेजती है. एमसीडी चुनाव में दखिए सबसे बड़ा दिलचस्प बात ये है कि अप्रैल 2022 में चुनाव को आगे बढ़ाया, हार के डर मारे. इन्होंने फिर यूनिफिकेशन किया हार के डर की वजह से. फिर दिल्ली के वॉर्ड का परिसीमन किया, ताकि कुछ सीटें ज्यादा जीत जाएंगे. 

इसके बाद इन्होंने ड्रामा रचना शुरू किया कि सिसोदिया को अंदर डालो. ये सब 2022 के अंदर हुआ है. पहली बार इतिहास में किसी सरकार ने खुलेतौर पर चुनाव आयोग को बोला कि चुनाव की तारीख आगे बढ़ाओ. चुनाव आयुक्त बाध्य नहीं थे, लेकिन किस वजह से किया ये सब जांच का विषय है.

बीजेपी ने खूब उकसाया

इतना सबकुछ होने के बावजूद दिल्ली की जनता ने अपना बहुमत आम आदमी पार्टी के पक्ष में दिया. ऐसे में ये होना चाहिए था कि बीजेपी एमसीडी में सरकार बनने देती. पार्षदों का शपथ होता, मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव होता. इसके बाद बीजेपी हमारे काम का आंकलन करती. राजनीतिक रूप से घेरना चाहिए था. लेकिन वो न करके पहले 6 जनवरी को शपथ नहीं होने दिया. जो प्रोटेम बनते हैं, एलजी साहब ने रूल से इतर अपने व्यक्ति को बना दिया. बीजेपी के जिला स्तर के  अधिकारी को नॉमिनेटेड काउंसलर बना दिया

24 जनवरी को जो शपथ होनी थी, उन्होंने हमारी बात नहीं मानी. जो हमारे मनोनीत पार्षद थे पहले उनका कराया और उसके बाद हमारे निर्वाचित पार्षदों का कराया. आम आदमी पार्टी के पार्षद चुपचाप बैठे रहे. उन्होंने खूब उकसाया. पहले से प्लेकार्ड और पैम्पलेट्स लेकर आए थे. लाख उकसाने के बाद भी हमारे पार्षदों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. 

सदन में अर्धसैनिक बलों को घुसाया

हमारे 135 पार्षद, 13 विधायक और 3 सांसद, सभी वहां पर बैठे थे. कुल 151 की हमारी संख्या थी, जो आम आदमी पार्टी के पक्ष में वोट देने के लिए बैठे थे. ये जानते थे कि वे हार रहे हैं. अगर वोटिंग होती को बीजेपी के पक्ष में 113 की संख्या थी. मैं ये कह रहा हूं कि ये देश रहेगा, संविधान रहेगा, बीजेपी-कांग्रेस या आम आदमी पार्टी हो सकता है कल न रहे. लेकिन जो कुछ हुआ ये सबने देखा. मीडिया ने भी खुलकर बोला कि कैसे इतनी संख्या में जवानों की मौजूदगी थी.

कल को ये बोलें कि विधायक आप के ज्यादा है लेकिन हम स्पीकर नहीं बनने देंगे. न स्पीकर बनेगा न सरकार बनेगी. ये किस प्रकार की राजनीति की शुरुआत बीजेपी ने की है. ये पाकिस्तान नहीं है, जहां पर 'गन' तंत्र है. मैं उन सभी लोगों को बधाइयां देना चाहता हूं, जिन्होंने इस देश पर राज किया. उन्होंने गणतंत्र को बनाए रखे.

कहीं नहीं जाएंगे 'आप' के पार्षद

पिछले करीब 11 महीने से जिस तरह बैकडोर से एलजी के माध्यम से बीजेपी एमसीडी में राज कर रही है, वो जनता के हाथ में आता. जनता की आशाएं अब केजरीवाल, 'आप' के पार्षदों से हैं. चुनाव तो कराना ही होगा. ऐसे में पता नहीं क्यों समय जाया कर रहे हैं. सबको पता है कि आप के पार्षद कहीं नहीं जाएंगे. इन्होंने बहुत प्रयास किया कि ईडी और सीबीआई लगा देंगे.

जो मेरे क्षेत्र के विधायक हैं वो मुझे बता रहे थे, उनके पास तीन-तीन लोग आए. अरे भाई वो सोमनाथ भारती के नीचे के पार्षद हैं. मैं बीजेपी से कहना चाहता हूं कि डेमोक्रेसी का आदर करिए. चुनाव होगा और मेयर, डिप्टी मेयर हमारा ही होगा.

मैं ये कहना चाहता हूं कि बीजेपी बहुत बुरी तरह से बौखला गई है. इनको एक ही डर है कि नगर निगम शासन का सबसे प्रभावी संस्थान है. जब एमसीडी आपके अंदर आती है तो शहर का हुलिया बदल जाता है जो हम करेंगे. बीजेपी को अब ये डर है कि आप शहर की पूरी तस्वीर बदल देगी, इसलिए बीजेपी अडंगा लगा रही है. अगर मीटिंग में मेयर और डिप्टी मेयर का इनको चुनाव करना पड़ेगा. 

ये कांग्रेस को डरा सकते हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी के लोग डरने वाले नहीं है, क्योंकि हमारे यहां के सभी लोग आंदोलन से निकले लोग हैं. आप जितना करो, जितना अड़चन डालने का प्रयास करो लेकिन मुझे लगता है कि आने वाले समय में बीजेपी को संविधान को मानना ही पड़ेगा.

[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.]

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