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BLOG: सबूतों की सर्जिकल स्ट्राइक क्यों?

पाकिस्तान में छुपे अलकायदा मुखिया ओसामा बिन लादेन को अमेरिका के विशेष कमांडो दस्ते ने कैसे मर गिराया था इस पर पूरी फिल्म बन चुकी है, लेकिन अगर आप अमेरिकी सरकार से इसके बारे में जानकारी चाहेंगे तो यह जानकारी तो आपको नहीं मिलेगी बल्कि आप सुरक्षा निरोधक कार्रवाई के दायरे में जरूर आ जायेंगे.

वही अगर इसको लेकर आप गूगल पर एबटाबाद प्रूफ सर्च करते हैं तो आपको सबसे पहले लाइव ऑपरेशन देखते अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी टीम के फोटो और उस मकान के फोटो, जिसमें ओसामा छुपा हुआ था, के अलावा कुछ  नहीं मिलेगा. तो क्या दुनिया में अपनी तकनीक का सिरमौर माना जाने वाले अमेरिका ने इस सबसे बड़े आपरेशन की कोई फुटेज नहीं बनाई थी ?

जी नहीं,  अमेरिकी कमांडों ने न सिर्फ इस पुरे आपरेशन को रिकॉर्ड किया था बल्कि इसकी लाइव स्ट्रीमिंग भी की थी जिसे वाइट हाउस में राष्ट्रपति ओबामा और उनके सुरक्षा सहयोगी इसे देख रहे थे. ऐसे में सवाल उठता है कि अमेरिका जो दुनिया का सबसे ताक़तवर देश मन जाता है, उसने इन जानकारियों को परदे  में क्यों रखा.

आप को याद होगा कि ओसामा को मरने के बात उसे समंदर में अज्ञात जगह जल समाधि दे दी गयी थी और दुनिया भर में आतंकियों और उनके सहयोगियों ने ओसामा के मारे जाने को लेकर अफवाहों का बवंडर बना दिया था. इस सब के बावजूद अमेरिका ने इस से जुड़े किसी फुटेज को कभी सार्वजानिक नहीं किया.

फ़िल्माने का उद्देश्य रणनीतिक न कि राजनीतिक दरअसल, सर्जिकल ऑपरेशन्स के लिए माने जाने वाले इज़रायल-अमेरिका-रुस जैसे देश इन्हें अपनी ट्रेनिंग और तकनीकी कारणों के लिए फिल्माते हैं. जिससे भविष्य में भूल सुधार और और क्या बेहतर हो सकता था को जाना और उस पर अमल किया जा सके.

ऐसे में जाहिर है की भारत, जो इन देशों से तमाम तरह की हथियार, सैन्य उपकरण एवं अन्य तकनीकी विशेषज्ञता लेता है, और अपनी सामरिक दक्षता जैसे जंगल वॉरफेयर व माउंटेन वॉरफेयर के अनुभवो को जॉइंट ट्रेनिंग के जरिये इन देशो से साझा भी करता है अपने सर्जिकल स्ट्राइक को नहीं फिल्माएगा?

निश्चित तौर पर भारत सरकार ने भी इस ऑपरेशन के फोटो और  वीडियो फिल्माए हैं. भारतीय सेटेलाइट ने इस ऑपरेशन के फुटेज लिए हैं. जबकि ग्राउंड जीरो में मौजूद एक-एक कमांडो जो कि अपने आप में कम्पलीट यूनिट की तरह था ने इस ऑपरेशन को हेलमेट में लगे थर्मल इमेंजिग और नाइटविजन कैमरों की मदद से फिल्माया भी है.

हो सकता है लाइव देखा हो आपरेशन! संभव है कि पीएम मोदी ने भी इस ऑपरेशन को लाइव देखा हो, भारत के पास ऐसी सुविधा है. ऐसे में सवाल  यह उठता है कि अगर यह रिकार्डिंग भारत सरकार के पास है तो वह इसे सार्वजनिक क्यों नहीं कर रही. वो भी तब जब तमाम देशी विदेशी दबाव उस पर बनाया जा रहा है.

जाहिर है भारत और दूसरे देशों के इन सर्जिकल ऑपरेशन के स्तर भले ही अलग हों पर इसे गोपनीय रखने कारण लगभग एक जैसे हैं. ऐसे ऑपरेशन सेना आम जनता या किसी अन्य समूह को जानकारी देने के लिहाज से नहीं बल्कि अपने ऑपरेशन को सफल बनाने के उद्देश्य से काम करती है.

सेना तमाम तरह की रिकार्डिंग अपने अंदरुनी उपयोग के लिए और भविष्य में होने वाले ऑपरेशन्स के लिए कमांडो तैयार करने की मंशा से करती है. यह सेना की रणनीति का अहम हिस्सा होता है और अत्यन्त गोपनीय होता है. ऐसे में इन्हें सार्वजानिक करने से दुश्मन न सिर्फ आपकी कार्रवाई करने के तरीके आपकी सामरिक तयारी आपके कमांडो की क्षमता-कमज़ोरी को समझ लेगा बल्कि कश्मीर जैसे मामलें में यह फुटेज भविष्य में बदली भू राजनितिक परिस्थितियों में अंतराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ एक हथियार के रूप में इस्तेमाल हो सकता है.

यही वजह है कि एबटाबाद ऑपरेशन का वीडियो अमेरिकी सेना ने आज तक जारी नहीं किया है. अमेरिका ने तो ऑपरेशन के दौरान खराब हुए अपने हेलीकॉप्टर को वहीं नष्ट कर दिया था, जिससे उसकी रणनीति का कोई फुटप्रिंट कहीं किसी और के हाथ न लग जाये.

सियासत के लिए सुबूत? देश के अन्दर विपक्षी पार्टियों से लेकर पीड़ित देश पाकिस्तान भी भारत के पाक-अधिकृत कश्मीर के अंदर सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांग रहा है. लेकिन उस पाकिस्तान को सबूत देकर क्या लाभ जिसे पिछले तीस सालों से तमाम सरकारें आतंकी हमलों के सबूत पर सबूत दिए जा रही हैं.

जो पाकिस्तान आज तक नहीं माना कि आतंक उसकी विदेश नीति का अहम हिस्सा है वह यह सबूत लेकर आखिर अन्तरराष्ट्रीय मंच पर क्या साबित करेगा. जाहिर है इस भी वह अपने  फायदे के लिए ही इस्तेमाल करना चाहेगा.

इसके पहले मुम्बई और पठानकोट जैसे आतंकी हमलों के सबूत भारत पाकिस्तान को एक बार नहीं कई बार दे चुका है. इन सबूतों को पाकिस्तान नें आतंकी हमलों में हुई चूक को दुरुस्त करने में इस्तेमाल नहीं किया इसका क्या कोई प्रमाण पाकिस्तान दे सकता है.

दूसरी ओर देश के अंदर जो विपक्षी दल 60 साल से राज कर रहे थे, जिन्हें राजनीति और कूटनीति का पारंगत माना जाता है वो इस सबूत से कौन सी राजनीति साधना चाहते है. तो उसके साथ दो साल से राजनीति कर रही पार्टी है जिसे सबूत मांगने पर पाकिस्तान में हीरो बना दिया गया.

वार के बाद भारत की कूटनीति

सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारत दोनो देशों के बीच तनाव को कम करने की हर संभव कूटनीतिक कोशिश कर रहा है. लेकिन पाकिस्तान हर भारत को प्रोवोक करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहता. लेकिन कहते कि दूध का जला छाछ को भी फूंक फूंक कर पीता है. रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर अरब सागर में पाकिस्तानी बोट का जलता हुआ फोटो जारी कर एक बार पहले ही अपने हाथ जला चुके हैं.

ब्रिक्स सम्मेलन भी बांध रहा हाथ इस बार सरकार कोई एडवेंचर करने के मूड में नहीं है. उसे मालूम है कि इसी महीने भारत में 18-20 अक्टूबर को ब्रिक्स सम्मेलन होने जा रहा है. इसमें रुस और चीन समेत दुनिया के पांच बड़े देश शामिल  होंगे. इसके सम्मेलन के ठीक पहले पाकिस्तान भारत को दुनिया के सामने आक्रांता के तौर पर पेश करना चाहता है. लेकिन ब्रिक्स सम्मेलन से पहले भारत सरकार की चेस्टथपिंग उसे नुकसान पहुंचा सकती है.

भारत भी इससे बचना चाह रहा है. पाकिस्तान के साथ पिच को टोन डाउन करने के लिए ही बार्डर पार कर आए पाकिस्तानी बच्चे को सुरक्षित सौंपना, विदेश मंत्री द्वारा पाकिस्तानी युवती को ट्विटर पर बेटी कह कर पुकारने जैसी घटनाएं इसी पोस्चरिंग का हिस्सा मानी जा सकती हैं.

अमेरिकी सेटेलाइट में भी दर्ज सुबूत

सूत्रों की मानें तो अमेरिकी एनएसए का भारत के एनएसए अजीत डोभाल को ऑपरेशन के बाद तुरन्त फोन करना अपने आप में पर्याप्त सबूत है कि भारत की तरफ से सर्जिकल स्ट्राइक की कारवाई की गई है. ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिकी उपग्रह में भारतीय कारवाई के सबूत भी दर्ज हो गए हैं.

बहरहाल इस सरकार का मूड पीएम मोदी ही तय करते हैं और मोदी का यह स्टाइल रहा है कि पहले सबको हल्ला मचा लेने दिया जाये. सभी अपने दांव चल दें, विरोधियो के तमाम पत्ते बिसात पर आने के बाद ही प्रधानमंत्री अपना तीर तरकश से निकालेंगे.

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ओपिनियन

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