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अपने जुकाम को हल्के में लेकर कहीं बड़ी मुसीबत तो मोल नहीं ले रहे हैं ?

जाहिर है कि मौसम ठंड का है,तो ऐसे में किसी को भी सामान्य जुकाम होना या नाक बंद हो जाना एक आम बात होती है.लेकिन अब वो जमाना चला गया और इस हल्के जुकाम को भी अब हमें बड़ा मानकर इसे गंभीरता से लेना होगा.इसलिये कि दुनिया के लोगों की सेहत की चिंता करने वाले  विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दे दी है कि ओमिक्रोन के बढ़ते हुए संक्रमण के बीच किसी को भी सर्दी-जुकाम जैसे सामान्य लक्षण होते हैं, तो भी वह इसे हल्के में लेने की गलती भूलकर भी न करे और फ़ौरन मेडिकल सहायता ले.WHO कोई भी चेतावनी हमारे नेताओं के दिये बयानों की तरह हवाबाजी में नहीं जारी करता बल्कि कई देशों में हुई तमाम तरह की रिसर्च के  नतीजों को देखने के बाद ही इसका फैसला लेता है कि अब उसे दुनिया को किस तरह से सावधान व सतर्क करना चाहिए.

WHO की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन भारतीय हैं, जो हमारी आदतों व लापरवाही से भी बखूबी वाकिफ़ हैं,जो हमें बार-बार चेता रही हैं. सिर्फ़ हमें ही नहीं बल्कि हमारी तमाम राज्य सरकारों को भी कि इस ओमिक्रोन को हल्के में बिल्कुल भी मत लीजिये.ये दूसरी या तीसरी दफा है जब उन्होंने अपने ट्वीट के जरिये हम सबको चेताया है कि ,"ओमिक्रॉन आम कोल्ड नहीं है! स्वास्थ्य-व्यवस्था चरमरा सकती है." उन्होंने चेतावनी देते हुए ये भी कहा है कि बड़ी संख्या में रोगियों के परीक्षण, सलाह और निगरानी के लिए सिस्टम होना महत्वपूर्ण है, क्योंकि मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी अचानक और भारी हो सकती है.

अगर आप इन वैज्ञानिकों की चेतावनी को नजरअंदाज कर रहे हैं,तो फिर एक बार मुंबई और दिल्ली में कोरोना मरीजों के बेतहाशा बढ़ते आंकड़ों को देखिये,जिसके बाद आपको भी ये मानने के लिए मजबूर होना ही पड़ेगा कि भले ही वे कोई ज्योतिषी नहीं हैं,लेकिन वैज्ञानिक अनुभव के आधार पर वे कितनी सटीक भविष्यवाणी कर रहे हैं, जिसे भला कौन नकार सकता है.इसके बदले में वे हमसे न तो कोई दक्षिणा मांग रहे हैं और न ही कुंडली को बांचने की कोई फीस.उनका मकसद सिर्फ इतना ही है कि लोग उनकी दी गई चेतावनी को गम्भीरता से लेते हुए अपनी जिंदगी बचाने का हर वो उपाय अपनाते रहें,जो उन्हें मौत की नींद सुलाने से काफी हद तक बचा सकते हैं.

कोरोना का जो ओमिक्रोन वेरिएंट भारत में अभी अपनी तबाही मचाने की तैयारी कर रहा है,वह दुनिया के कई मुल्कों में अपना कहर बरपाने के बाद ही हम तक पहुंचा है.राहत की बात ये है कि वो डेल्टा की तरह फिलहाल उतने लोगों की जिंदगी नहीं छीन रहा लेकिन है तो वो भी वायरस का ही एक नया रुप जिसके लिये न कोई दोस्त है,न दुश्मन. उसे आपके मजहब,जाति, उम्र व सोच से भला क्या वास्ता,उसकी नजर में तो सब बराबर हैं.इसलिये दुनिया के तमाम वैज्ञानिकों की रिसर्च से निकले निचोड़ को अगर अपनी सरल भाषा में कहें,तो ये वायरस सबसे बड़ा धोखेबाज है,जो पता नहीं कितने रुप बदलकर अभी न जाने कब तक आता रहेगा.

दरअसल,ओमिक्रोन के मरीजों पर अमेरिका के कुछ वैज्ञानिकों ने गहन विश्लेषण किया है कि इस बीमारी के मुख्य लक्षण आखिर क्या हैं,जो डॉक्टर भी समझ नही पा रहे हैं.इसका पता लगाने के लिए ही यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने जो एनालिसिस किया है,उसके मुताबिक, ओमिक्रॉन वेरिएंट के चार सबसे आम लक्षण हैं- खांसी, थकान, रक्त का जमाव (कंजेशन) और नाक बहना.लेकिन ब्रिटेन के विशेषज्ञों ने भी इस पर काफी माथापच्ची की और उसके बाद पाया कि उन चार लक्षणों के साथ ही इस श्रेणी में मतली और भूख न लगने को भी जोड़ा जाना चाहिए. यानी,इन छह में से कोई भी एक लक्षण दिखाई देता है,तो घबराएं नहीं बल्कि डॉक्टर की सलाह लेकर उपचार कीजिये,ताकि संक्रमण फैलाने के वाहक बनने से खुद को रोका जा सके.

हालांकि ओमिक्रोन के जनक देश दक्षिण अफ्रीका से लेकर अमेरिका और ब्रिटेन में हुई कई रिसर्च से पता चला है कि अत्यधिक संक्रमणीय वेरिएंट के कारण होने वाले संक्रमण आमतौर पर हल्के होते हैं, जिनमें अस्पताल में भर्ती होने की जरुरत कम ही पड़ती है.लेकिन दिक्कत यही है कि लोग इससे बेपरवाह भी हो जाते हैं. डॉ.सौम्या की तरह ही WHO की महामारी वैज्ञानिक हैं, डॉ. मारिया वान केरखोव. उन्हें भी दुनिया भर के लोगों को जागरुक करने के लिए एक ट्वीट करना पड़ा,जिसमें उन्होंने लिखा, "ओमिक्रॉन आम कोल्ड नहीं है." केरखोव ने कहा कि वैक्सीन इक्विटी सुनिश्चित करके हम संक्रमण को रोक सकते हैं और जीवन को बचा सकते हैं.

हालांकि अन्तराष्ट्रीय स्तर पर आई कुछ रिपोर्टों में यही दावा किया गया है कि डेल्टा की तुलना में ओमिक्रॉन की वजह से अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम कम होता है, फिर भी बहुत से लोग संक्रमित हैं, बीमार हैं और अस्पताल में हैं और साथ ही ओमिक्रॉन (और डेल्टा) से मर भी रहे हैं. इस बीच, WHO ने यह भी कहा कि उभरते हुए सबूतों से पता चलता है कि ओमिक्रॉन इंसान के ऊपरी श्वसन तंत्र को प्रभावित कर रहा है, जिससे पिछले वेरिएंट की तुलना में इसके हल्के लक्षण दिखाई दे रहे हैं लेकिन फिर भी लोगों को सावधान रहने की जरुरत है.

वैसे भी हम लोग तो हाईवे पर दौड़ते बहुतेरे ट्रक के पीछे लिखे इस वाक्य को कई मर्तबा पढ़ चुके होंगे कि-"सावधानी हटी, तो दुर्घटना घटी". लेकिन ये वो वायरस है,जो कोई भी गाड़ी चलाये बगैर सिर्फ जरा-सी लापरवाही देखते ही अचूक हमला करने में माहिर है. फैसला भी हमें ही करना है कि आखिर चुनना किसे है-सावधानी को या बेपरवाही को.

नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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