नई कार की वारंटी में क्या-क्या शामिल होता है और क्या नहीं? देखें लिस्ट
अगर आप नई कार खरीद रहे हैं तो वारंटी के नियम और शर्तों को जानना जरूरी है. कार लेने से पहले यह जानना जरूरी होता है कि वारंटी में क्या कवर होता है और किन चीजों का खर्च खुद उठाना पड़ता है.

जब भी हम कोई नई कार खरीदते हैं तो डीलर हमें एक वारंटी कार्ड देता है. ज्यादातर लोग इसे बिना पढ़े ही रख देते हैं. उन्हें पता तक नहीं होता है कि यह कार्ड बहुत काम का होता है. वारंटी का मतलब है कि अगर कार में कोई खराबी आती है तो कंपनी उसे मुफ्त में ठीक करेगी. भारत में ज्यादातर कार कंपनियां 3 साल या 1 लाख किलोमीटर की वारंटी देती हैं, जो भी पहले पूरा हो जाए. कुछ कंपनियां तो 5 से 7 साल तक की वारंटी भी देने लगी हैं.
ऐसे में जरूरी है कि आपकी गाड़ी कितने साल की वारंटी दे रही है और उस वारंटी में क्या-क्या कवर हो रहा है. अगर आपको यह पता नहीं है कि वारंटी में क्या आता है और क्या नहीं, तो बाद में पैसे खर्च करते वक्त परेशानी हो सकती है. ऐसे में आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी कि नई कार की वारंटी में असल में क्या शामिल होता है और किन चीजों के लिए आपको खुद पैसे देने पड़ सकते हैं.
वारंटी में क्या-क्या शामिल होता है?
नई कार की वारंटी में सबसे पहले इंजन और गियरबॉक्स आता है. अगर इंजन में मैन्युफैक्चरिंग खराबी की वजह से कोई दिक्कत आती है तो कंपनी उसे मुफ्त में ठीक करती है. इसके अलावा इलेक्ट्रिकल पार्ट्स जैसे वायरिंग, सेंसर और म्यूजिक सिस्टम भी वारंटी में आते हैं, बशर्ते खराबी फैक्ट्री की गलती से हुई हो. सस्पेंशन, स्टीयरिंग सिस्टम, और एसी जैसे पार्ट्स भी आमतौर पर कवर होते हैं. कई कंपनियां पेंट और जंग लगने से बचाव के लिए भी अलग वारंटी देती हैं, जिसे कोरोजन वारंटी कहते हैं. इसके साथ ही कुछ ब्रांड बैटरी और टायर पर भी वारंटी देते हैं. अगर कार में कोई पार्ट बार-बार खराब हो रहा हो, तो सर्विस सेंटर उसे बदलने की सलाह देता है और यह भी वारंटी के अंदर आता है. लेकिन इसका फायदा तभी मिलता है जब आप कार की सर्विस समय पर करवाते हैं और कंपनी के बताए गए नियमों का पालन करते हैं.
यह भी पढ़ेंः 50 हजार रुपये देकर घर लाएं स्विफ्ट, इतनी बनेगी EMI
वारंटी में क्या शामिल नहीं होता?
अब बात करते हैं उन चीजों की जो वारंटी में शामिल नहीं होती हैं, यानी जिन चीजों का पैसा आपको अपनी जेब से भरना पड़ता है. सबसे पहला मामला है सामान्य टूट-फूट का. इसमें ब्रेक पैड, क्लच प्लेट, वाइपर ब्लेड, और बल्ब जैसी चीजें आती हैं, क्योंकि ये समय के साथ खुद ही घिसती हैं. दूसरा, अगर एक्सीडेंट या दुर्घटना से कार को नुकसान पहुंचा है तो उसे वारंटी नहीं बल्कि इंश्योरेंस कवर करता है. तीसरा, अगर आपने कार में कोई बाहरी मॉडिफिकेशन करवाया है जैसे अलग साइलेंसर या नॉन-कंपनी पार्ट्स लगवाए हैं तो उससे होने वाला नुकसान वारंटी में नहीं आता. चौथा, समय पर सर्विस न करवाने या गलत ईंधन डालने से हुई खराबी भी वारंटी से बाहर होती है. इसके अलावा प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़ या आग से हुआ नुकसान भी वारंटी में कवर नहीं होता. इसलिए नई कार खरीदते समय वारंटी की पूरी शर्तें ध्यान से पढ़ना बहुत जरूरी होता है.
यह भी पढ़ेंः 15 हजार की EMI पर कौन-सी कार ला सकते हैं घर? देख लें लिस्ट























