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Himalayan Flash Floods: कुदरत का क्रोध या इंसान की गलती? | विकास पर सवाल
पर्यावरणविद ने हिमालयी क्षेत्रों में हो रही प्राकृतिक आपदाओं पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि बादल फटना एक प्राकृतिक घटना है, लेकिन इसका प्रभाव मानवीय कारणों से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, "ये प्राकृतिक आपदा है लेकिन प्राकृतिक आपदा ये जो इतना रौद्र रूप लेती हुई नजर आ रही है। ये जो सब कुछ और बर्बाद और इंसान को मिटा देने पर आमादा नजर आ रही है, ये दरअसल इंसान की गलती और ये बिना सोचे समझे जो विकास हो रहा है।" उन्होंने चारधाम रोड निर्माण में पेड़ों की कटाई और नदी किनारों पर मलबे के जमाव का उल्लेख किया। विशेषज्ञों ने हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी में अनियोजित शहरीकरण, टनलिंग और सड़क निर्माण को आपदाओं का कारण बताया है। नदी के पुराने रास्तों पर मानव बस्तियों के निर्माण से भी नुकसान बढ़ा है। 2013 की केदारनाथ त्रासदी, जोशीमठ में भूस्खलन और सिल्क्यारी टनल ढहने जैसी घटनाओं से सबक न सीखने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने विकास की वर्तमान परिभाषा पर सवाल उठाए, जिसमें चौड़ी सड़कों और त्वरित पहुंच को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों की वहन क्षमता को नजरअंदाज किया जाता है।
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