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Media के खिलाफ Jamiat की अर्जी पर आदेश से SC ने मना क्यों किया ? |ABP Uncut
तबलीगी मरकज मामले की मीडिया रिपोर्टिंग के खिलाफ जमीयत उलेमा ए हिंद की याचिका पर कोई अंतरिम आदेश देने से सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि वह मीडिया पर पाबंदी लगाने का कोई आदेश नहीं देना चाहता है। जमीयत पहले प्रेस काउंसिल को मामले में पक्षकार बनाए। उसके बाद ही कोई सुनवाई होगी। सुन्नी देवबंदी उलेमाओं के संगठन जमीयत उलेमा ए हिंद ने मीडिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि तबलीगी जमात के मरकज पर मीडिया ने बहुत गैरजिम्मेदाराना रिपोर्टिंग की है। वहां हो रहे धार्मिक आयोजन में देश-विदेश से आए कई लोग जमा थे। उनमें से कुछ लोगों को कोरोना पॉजिटिव पाया गया। दुर्भाग्य से मरकज में शामिल होकर तेलंगाना गए छह लोगों की मौत भी हुई। लेकिन मीडिया ने मामले को सांप्रदायिक रंग दे दिया। ऐसा दिखाया जाने लगा जैसे देश के मुसलमान कोरोना फैलाने की कोई मुहिम चला रहे हैं। मामले की सुनवाई करने बैठे चीफ जस्टिस एस ए बोबड़े, जस्टिस नागेश्वर राव और एम शांतनागौडर इस याचिका से आश्वस्त नजर नहीं आए। संविधान के संरक्षक माने जाने वाले सुप्रीम कोर्ट ने लगातार मीडिया, लेखक, सिनेमा निर्माता, चित्रकारों समेत तमाम लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को अहमियत हमेशा है। ऐसी में जजों का सवाल था कि वह मीडिया पर पाबंदी लगाने का आदेश होते क्यों दे।
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