क्या संयुक्त किसान मोर्चा का ये हठ चुनावी एजेंडे से जुड़ा हुआ है? | Hunkar
संयुक्त किसान मोर्चा अब जो भी कहे लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि ये आंदोलन मुख्य रूप से तीन कृषि क़ानूनों के पास होने के बाद इसके विरोध में शुरू हुआ था...इन्हें बिना शर्त वापस लेना ही इस आंदोलन की मुख्य मांग थी जो अब पूरी हो चुकी है...अब इस मांग के माने जाने के बावजूद आंदोलन जारी रखने का मतलब है कि किसान मोर्चा को लगता है कि सरकार दबाव में है और उससे अपनी सारी मांगें मनवा लें...लेकिन क्या इस तरह की ज़िद ब्लैकमेल नहीं है...जब सरकार बिल्कुल पीछे हट चुकी है तो क्या संयुक्त किसान मोर्चा को भी थोड़ा पीछे नहीं हटना चाहिए...क्या संयुक्त किसान मोर्चा का ये हठ चुनावी एजेंडे से जुड़ा हुआ है...आज की हुंकार इन्हीं सवालों के इर्द-गिर्द लेकिन पहले ये रिपोर्ट देखिए...
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