सिर्फ iPhone नहीं, अब दूसरे इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स भी भारत में होंगे तैयार!
Google को लेकर भी सरकार की ओर से बड़ा संकेत दिया गया है. दरअसल, कंपनी अपने एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड डिवाइस के प्रोडक्टिविटी का एक हिस्सा चीन से भारत में शिफ्ट करने का प्लान कर रही है.

- एप्पल भारत में आईफोन के अतिरिक्त अन्य हार्डवेयर बनाएगा।
- गूगल भी चीन से निर्यात-उन्मुख डिवाइस उत्पादन भारत लाएगा।
- सरकार ने ₹62,500 करोड़ की नई मोबाइल निर्माण योजना शुरू की।
- यह योजना उत्पादन, कंपोनेंट निर्माण और निर्यात को बढ़ावा देगी।
भारत को मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा ग्लोबल हब बनाने की दिशा में सरकार लगातार नई कोशिशें कर रही है. इसी कड़ी में अब Apple के भारत में iPhone के अलावा दूसरे हार्डवेयर प्रोडक्ट्स भी तैयार किए जाएंगे. इसके अलावा, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Google भी चीन से अपने एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड डिवाइस प्रोडक्शन को बंद करके उसे भारत में शिफ्ट करने का प्लान बना रहा है. सरकार के मुताबिक, इससे देश के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को नई रफ्तार मिल सकती है और भारत की ग्लोबल सप्लाई चेन में भूमिका और मजबूत होगी.
Apple iPhone के बाद दूसरे प्रोडक्ट्स पर नजर
केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, Apple भारत में अपने मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को एक्सपेंड करने की तैयारी में है. इसका मतलब साफ है कि अब एप्पल देश में सिर्फ आईफोन ही नहीं बल्कि अपने कई सारे दूसरे प्रोडक्ट्स और हार्डवेयर पार्ट्स को भी भारत में तैयार करने का प्लान कर रही है. ऐसा करने से लोकल सप्लायर्स, कंपोनेंट मैन्यूफैक्चर्स और रोजगार के अवसरों को ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है.
Google चीन से भारत ला सकता है प्रोडक्शन
इसके साथ ही Google को लेकर भी सरकार की ओर से बड़ा संकेत दिया गया है. दरअसल, कंपनी अपने एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड डिवाइस के प्रोडक्टिविटी का एक हिस्सा चीन से भारत में शिफ्ट करने का प्लान कर रही है. अब अगर ऐसा होता है तो भारत में Google के स्मार्टफोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की मैन्युफैक्चरिंग ताकत बढ़ेगी.
इससे भारत को ग्लोबल एक्सपोर्ट बेस के रूप में तैयार करने में भी मदद मिलेगी. कंपनियों का चीन पर निर्भरता कम करना और अलग-अलग देशों में अपने प्रोडक्शन यूनिट को खोलने से भारत को भी काफी लाभ मिलने वाला है.
62,500 करोड़ रुपये की नई मैन्युफैक्चरिंग योजना
सरकार ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए करीब ₹62,500 करोड़ की Mobile Phone Manufacturing Scheme (MPMS) को मंजूरी दी है. ये योजना मौजूदा वित्त वर्ष से लेकर 2030-31 तक चलेगी और पहले की Production Linked Incentive (PLI) योजना के बाद मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को नई दिशा देने का लक्ष्य है.
नई योजना का मकसद सिर्फ मोबाइल फोन असेंबल करना नहीं है बल्कि देश में ज्यादा से ज्यादा वैल्यू एडिशन और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना भी है.
कंपनियों को मिलेंगे अलग-अलग इंसेंटिव
नई स्कीम के तहत एलिजिबल मोबाइल कंपनियों को बिक्री के आधार पर 2.25% से 5% तक मैन्युफैक्चरिंग इंसेंटिव भी सरकार की ओर से मिल सकता है. इसके अलावा लोकल लेवल पर कंपोनेंट्स की खरीद के लिए 1.5% तक एक्सट्रा हेल्प भी दिया जा सकता है.
भारतीय ब्रांड्स के लिए अलग से 5% इंसेंटिव की योजना तैयार की गई है. वहीं, भारत में डिजाइन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए एक्सट्रा 3% इंसेंटिव भी उपलब्ध कराया जा सकता है.
भारत की बढ़ती मोबाइल एक्सपोर्ट ताकत
पिछले एक दशक में भारत के मोबाइल फोन एक्सपोर्ट में काफी वृद्धि देखने को मिली है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2014 से 2025 के बीच मोबाइल फोन एक्सपोर्ट में लगभग 166 गुना बढ़ोतरी हुई है. इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट में भी मोबाइल फोन की हिस्सेदारी काफी बढ़ी है.
भारत अब दुनिया के बड़े मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग देशों में शामिल हो चुका है. ऐसे में Apple और Google जैसी ग्लोबल कंपनियों की ओर से भारत में प्रोडक्टिविटी को बढ़ाना देश की स्थिति को और मजबूत कर सकता है.
भारतीय कंपनियों को भी मिलेगा फायदा
बताते चलें कि सरकार की इस नई योजना में भारतीय ब्रांड्स और लोकल डिजाइन को ज्यादा लाभ मिल सकता है. सरकार भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर अगले 10 से 14 महीनों में हाई-वॉल्यूम सेगमेंट के लिए बेहतर स्मार्टफोन डिजाइन तैयार करने पर भी काम कर रही है.
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