नैनीताल में हरीश रावत के सामने भाजपा का विजयी रथ रोकने की चुनौती
उत्तराखंड की नैनीताल-ऊधमसिंह नगर पर दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है।

नैनीताल, एबीपी गंगा। उत्तराखंड की पांच लोकसभा सीटों में से नैनीताल-ऊधमसिंहनगर का इतिहास बेहद प्रतिष्ठापूर्ण रहा है। इस क्षेत्र से केसी पंत और एनडी तिवारी जैसे कई दिग्गज राजनेता निकले हैं। यही वो सीट है जहां साल 1991 में एनडी तिवारी की प्रधानमंत्री बनने की उम्मीदों को झटका लगा था। वैसे तो यह सीट कांग्रेस के वर्चस्व वाली रही है, लेकिन कुछ मौकों पर भाजपा ने विरोधी दलों को शिकस्त दी है। इस सीट की खासियत रही है कि जब-जब देश की राजनीति में कोई लहर चली तो प्रतिद्वंद्वी दल के प्रत्याशी की चुनावी नैया पार नहीं कर पाई। कांग्रेस ने यहां कई बार जीत का स्वाद चखा तो भाजपा केवल तीन बार ही अपना परचम लहरा पाई। इस सीट पर कभी अकबर अहमद डम्पी की पत्नी और पूर्व मिस इंडिया नैना बलसावर अपने गलैमर का जलवा बिखेरती रही तो कभी खांटी राजनेता अपना लोहा मनवाते रहे। बतादें कि यह सीट भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की कर्मस्थली भी रही है। क्षेत्र की जनता ने पंत परिवार पर अपना भरोसा भी दिखाया। 1962, 67 व 71 में पंत के पुत्र केसी पंत ने यहां जीत की हैट्रिक भी लगाई।
1991 में पीएम बनते-बनते रहे गए थे तिवारी इस साल तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद एनडी तिवारी के प्रधानमंत्री बनाए जाने की चर्चा जोरों पर थी, लेकिन 1991 के चुनाव में भाजपा के बलराज पासी ने एनडी तिवारी को करारी शिकस्त दी थी। जिसके बाद पीवी नरसिंह राव को प्रधानमंत्री बना दिया गया। चुनाव जीतने पर तिवारी के प्रधानमंत्री बनने की बहुत संभावनाएं थीं। इससे पहले आपातकाल के खिलाफ चली लहर में हुए चुनाव में भारतीय लोकदल के प्रत्याशी भारत भूषण ने कांग्रेस के उम्मीदवार को धूल चटाई थी। 2014 की प्रचंड मोदी लहर में भगत सिंह कोश्यारी ने रिकार्ड मतों से चुनाव जीता। कोश्यारी ने कांग्रेस के सांसद रहे केसी सिंह बाबा को शिकस्त दी थी। वर्ष 2002 में नैनीताल सीट पर उपचुनाव भी हुआ था जिसमें कांग्रेस के महेंद्र पाल ने चुनाव जीता।
हर दा पेश करेंगे चुनौती! कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को नैनीताल से टिकट दिए जाने के बाद यह हॉट सीट बन गई है। हरीश रावत के सामने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट मैदान में हैं। बतादें कि भट्ट पहली बार लोकसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। हर दा के सामने जहां कांग्रेस की प्रतिष्ठा बचाने की चुनौती होगी तो वहीं भट्ट के सामने भाजपा का मैजिक बरकरार रखने की चुनौती। बहरहाल, हर दा के यहां से चुनावी मैदान में जाने के बाद मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
क्या है गोलिक स्वरूप नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोकसभा का एक चौथाई हिस्सा पर्वतीय और बाकी मैदानी क्षेत्र है। इसका बड़ा हिस्सा तराई का है। इस चुनाव क्षेत्र की सीमाएं अल्मोड़ा पिथौरागढ़ व चंपावत जनपद के अलावा उत्तर प्रदेश की सीमा से मिलती है। इसमें लालकुआं, नैनीताल, भीमताल, हल्द्वानी, कालाढुंगी, रुद्रपुर, काशीपर, सितारगंज, गदरपुर, खटीमा, जसपुर, बाजपुर, किच्छा, नानकमत्ता जैसे विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं।
नैनीताल लोकसभा चुनाव वर्ष सांसद दल
1951 सीडी पांडेय कांग्रेस 1957 सीडी पांडेय कांग्रेस 1962 केसी पंत कांग्रेस 1967 केसी पंत कांग्रेस 1971 केसी पंत कांग्रेस 1977 भारत भूषण बीएलडी 1980 एनडी तिवारी कांग्रेस (आई) 1984 सतेंद्र चंद्र कांग्रेस 1989 महेंद्र सिंह पाल जनता दल 1991 बलराज पासी भाजपा 1996 नारायण दत्त तिवारी तिवारी कांग्रेसS 1998 ईला पंत भाजपा 1999 एनडी तिवारी कांग्रेस 2004 केसी बाबा कांग्रेस 2009 केसी बाबा कांग्रेस 2014 भगत सिंह कोश्यारी भाजपा
मतदाताओं की स्तिथि कुल मतदाता : 1788737 पुरुष मतदाता : 947110 महिला मतदाता : 841601 ट्रांसजेंडर 26
क्या है स्थानीय मुद्दे यह सीट तीन चौथाई मैदानी और एक चौथाई पर्वतीय है। नैनीताल जिले की पांच और ऊधमसिंहनगर की नौ विधानसभा सीटें इस लोकसभा में आती है। नैनीताल की अपनी समस्या अलग है, न ही नैनीताल झील का सुदृढ़ीकरण हो सका और न ही नैनीताल शहर की पेयजल समस्या का समाधान खोजा जा सका। पर्यटकों के लिए भी कुछ खास नहीं हो सका, इस बार पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर नैनीताल के दोनों रास्तों पर हॉउसफुल का बोर्ड लगाकर सड़क बंद कर दी गयी, हल्द्वानी शहर की सूरत बदलने की कोई कोशिश नहीं हुई, ट्रैफिक जाम यहां एक स्थाई समस्या बन गयी है।
ऊधमसिंहनगर जिले में राइस मिले बंद हो गयी और गन्ना किसानो का भुगतान अभी भी बकाया है। यह जिला खेती किसानी और इंडस्ट्री के लिए जाना जाता है लेकिन दोनों ही सेक्टर में हालात खराब है। पिछले कई सालों में दर्जनों इंडस्ट्री यहां से पलायन कर गयी।
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