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2024 ने दिखाया ट्रेलर, 2027 में पूरी फिल्म! BJP ने पंजाब में बदली रणनीति, AAP, SAD, कांग्रेस चौंके

Punjab Politics: पंजाब में अगले वर्ष 2027 के चुनाव के पहले बीजेपी की रणनीति ने आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, शिअद की टेंशन बढ़ा दी है.अब यह देखना होगा कि इस रणनीति का क्या असर होता है?

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  • भाजपा 2027 पंजाब चुनाव में अकेले लड़ेगी, 117 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी.
  • पार्टी को लगता है कि राज्य में वोट शेयर बढ़ रहा है.
  • शहरी, युवा और हिंदू वोटरों पर होगा मुख्य फोकस.
  • विपक्ष का कहना है कि भाजपा के पास मजबूत उम्मीदवार नहीं.

पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर तस्वीर अब साफ होती जा रही है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने यह तय कर लिया है कि वह इस बार किसी भी सहयोगी दल के साथ नहीं, बल्कि पूरी तरह अपने दम पर चुनाव लड़ेगी. यह फैसला सिर्फ एक चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि पंजाब की राजनीति में पार्टी की भूमिका को बदलने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव अकेले लड़ेगी. 

BJP के इस फैसले पर आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन इतना जरूर है कि तीनों ही दल इस फैसले से टेंशन में जरूर आ गए हैं. लंबे वक्त तक बीजेपी से अलायंस रहने के चलते शिअद को इस बात का डर है कि बीजेपी उसके वोटों में सेंध न लगाए.

पंजाब के संदर्भ में बात करे तो बीजेपी का लंबे समय तक शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के साथ गठबंधन रहा. साल 1997 से लेकर साल 2017 तक दोनों दलों ने मिलकर चुनाव लड़ा और सरकार भी बनाई. हालांकि साल 2020 में कृषि कानूनों के विरोध के बीच यह गठबंधन टूट गया. इसके बाद साल 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने नए सहयोगियों के साथ हाथ मिलाया, लेकिन परिणाम बेहद कमजोर रहे.

अब साल 2027 के लिए पार्टी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी गठबंधन में नहीं जाएगी और 117 की 117 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी. यानी बीजेपी अब 'पार्टनर' की भूमिका से बाहर निकलकर खुद को मुख्य खिलाड़ी के तौर पर स्थापित करना चाहती है.

हालांकि ऐसी एक कोशिश वर्ष 2024 के चुनाव में बीजेपी ने की लेकिन नतीजा सिफर रहा और सभी 13 लोकसभा सीटों में से उसके हाथ एक भी सीट नहीं आई. 

अकेले लड़ने वाली रणनीति के पीछे की सोच क्या है?

बीजेपी का मानना है कि पंजाब में उसका वोट शेयर धीरे-धीरे बढ़ रहा है. साल 2024 लोकसभा चुनाव में भले ही पार्टी कोई सीट नहीं जीत पाई, लेकिन वोट प्रतिशत में इजाफा हुआ. 2024 के चुनाव में बीजेपी को 18.56% वोट मिले. जो 2017 के चुनाव के मुकाबले 8 फीसदी ज्यादा थे. पार्टी इसी आधार पर यह दावा कर रही है कि वह अब राज्य में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक जमीन बना सकती है. बीजेपी साल 2024 के वोट प्रतिशत को ट्रेलर मान कर साल 2027 के चुनाव में सियासत की फिल्म पूरी करने की कोशिश में है.

इस रणनीति के तहत बीजेपी शहरी वोटर्स, हिंदू मतदाताओं और पहली बार वोट देने वाले युवाओं पर खास फो कस कर रही है. साथ ही, पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की कोशिश भी तेज कर दी गई है.

हालांकि, बीजेपी के लिए राह आसान नहीं है. 2022 विधानसभा चुनाव में पार्टी सिर्फ 2 सीटें ही जीत पाई थी, और 2024 लोकसभा चुनाव में उसका खाता भी नहीं खुला. इससे यह साफ है कि पंजाब में पार्टी का जनाधार अभी सीमित है.

विपक्ष का हमला

इसके अलावा, राज्य में पहले से मजबूत तीन राजनीतिक ताकतें मौजूद हैं- आम आदमी पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल. ऐसे में चौथे बड़े विकल्प के रूप में खुद को स्थापित करना बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती होगी.

बीजेपी के इस फैसले पर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं. आम आदमी पार्टी का कहना है कि बीजेपी के पास पूरे राज्य में मजबूत उम्मीदवार और संगठन नहीं है. बीते दिनों सीएम भगवंत मान ने कहा था कि बीजेपी के पास उम्मीदवारी के लिए लोग नहीं हैं.

 क्या बदलेगा 2027 में?

चुनाव दर चुनाव बात करें तो वर्ष 2017 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी 23 सीटों पर चुनाव लड़ी और उसे सिर्फ 3 पर जीत मिली. 2019 लोकसभा चुनाव में जब बीजेपी अपने दम पर 300 से अधिक सीटों पर जीती तब भी पंजाब में वह सिर्फ 2 सीटों पर सिमटी रही. इस चुनाव में बीजेपी को 9.63 फीसदी वोट मिले जो पिछले चुनाव के मुकाबले 0.93 फीसदी वोट ज्यादा थे. यहां तक कि 2014 के चुनाव में बीजेपी को सिर्फ 1 सीट मिली थी और उसका वोट प्रतिशत 8.70% था.

साल 2027 का चुनाव पंजाब में एक नए राजनीतिक प्रयोग की तरह होगा. लोकसभा चुनाव के बाद पहली बार बीजेपी पूरे आत्मविश्वास के साथ अकेले मैदान में उतर सकती है. साल 2027 का चुनाव तय करेगा कि क्या पार्टी वास्तव में राज्य में अपनी जमीन बना पाएगी या फिर उसे फिर से गठबंधन की राह पर लौटना पड़ेगा.

राहुल सांकृत्यायन एबीपी लाइव में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और स्टेट्स टीम का नेतृत्व कर रहे हैं. उन्हें राजनीति, शासन-प्रशासन, अपराध और राज्यों की समकालीन राजनीतिक गतिविधियों की कवरेज में एक दशक से अधिक का अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और फीचर डेस्क से की और इसके बाद न्यूज़18 हिंदी, वनइंडिया हिंदी और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया.   राहुल ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की शिक्षा प्राप्त की है. उन्होंने कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2018, लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और महाकुंभ 2025 जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों की कवरेज की है. पत्रकारिता के साथ-साथ उन्हें हिंदी साहित्य और वैचारिक लेखन में भी विशेष रुचि है.

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