सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे पर आया अभिजीत दीपके का बड़ा बयान, 'प्रशासन का कोई...'
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बिल्डिंग गिरने के बाद CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा कि छात्र मलबे के नीचे दबे हुए हैं और स्थानीय लोग उन्हें अपने हाथों से बचाने का प्रयास कर रहे हैं.

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार (06 सितंबर) को पांच मंजिला इमारत ढह गई. इस हादसे में अभी तक 2 लोगों की मौत की खबर है. कई लोगों को बाहर निकाला गया है जबकि कई लोग अभी मलबे में फंसे हुए हैं. इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि प्रशासन का कोई भी व्यक्ति वहां नजर नहीं आ रहा है.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ''सत्य निकेतन इलाके में बिल्डिंग गिरने के बाद छात्र मलबे के नीचे दबे हुए हैं और स्थानीय लोग उन्हें अपने हाथों से बचाने का प्रयास कर रहे हैं. प्रशासन का कोई भी व्यक्ति वहां नजर नहीं आ रहा है. जब हर मिनट किसी की जान बचाया जा सकता है, तो प्रशासन कहां है? और ऐसा कब तक होता रहेगा?''
20 साल पुरानी थी सत्य निकेतन में गिरी बिल्डिंग!
जानकारी के मुताबिक जो बिल्डिंग गिरी है उसे पीजी के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था. यह इलाका दिल्ली यूनिवर्सिटी के ‘साउथ कैंपस’ के प्रमुख हिस्से के पास स्थित है. घटनास्थल के आसपास की गलियां बहुत ही संकीर्ण है और भीड़भाड़ रहती है. इस इलाके में कई हॉस्टल और मेस हैं.
स्थानीय लोगों के मुताबिक इमारत करीब 20 साल पुरानी थी और घटना के समय, दोपहर करीब 1.30 बजे, बेसमेंट में निर्माण कार्य चल रहा था.
एनडीआरएफ समेत कई एजेंसियां मौके पर मौजूद
दिल्ली एम्स के सूत्रों ने बताया कि अस्पताल में लाए गए चार घायलों में से दो की हालत अब भी गंभीर है, जबकि एक को मृत अवस्था में लाया गया था. एक बचावकर्मी को भी अस्पताल लाया गया था, जिसे इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई. पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि स्थानीय पुलिसकर्मी, दमकल विभाग, एंबुलेंस और अन्य इमरजेंसी सेवाएं मौके पर मौजूद हैं. एनडीआरएफ की टीम भी घटनास्थल पर पहुंच गई है और बचाव एवं राहत अभियान जारी है.
बिल्डिंग के मालिक की हुई पहचान
पुलिस ने बताया कि उन्होंने इमारत के मालिक की पहचान कर ली है और उसे पकड़ने के लिए कई टीम गठित की गई हैं. अधिकारियों के अनुसार, ढही हुई इमारत को ‘हॉस्टल डेज’ के नाम से जाना जाता था. घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने अनुमान जताया कि 20 से अधिक लोग मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं, हालांकि इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
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