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नेपाल बाढ़ ने उजाड़ दी बच्चों की दुनिया, हजारों ने गंवाए घर और परिवार

नेपाल के भोटेकोशी और त्रिशूली बाढ़ ने हजारों बच्चों को प्रभावित किया. कई बच्चों ने परिवार और घर खो दिए, जबकि 17 हजार से ज्यादा बच्चों को मानवीय मदद की जरूरत है.

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी बदलकर रख दी है. रसुवा, नुवाकोट और आसपास के इलाकों में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों का पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला. कई घर, सड़कें और पुल बह गए, जबकि बड़ी संख्या में लोग अपने परिवार से बिछड़ गए.

इस आपदा का सबसे गहरा असर बच्चों पर पड़ा है. कई बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने अपनी आंखों के सामने घर उजड़ते देखा और कुछ ने अपने माता-पिता, भाई-बहन या दूसरे रिश्तेदारों को खो दिया. अब बड़ी संख्या में बच्चे राहत केंद्रों में रह रहे हैं और उनके सामने सबसे बड़ा सवाल है कि उनका घर और पढ़ाई फिर कब पटरी पर लौटेगी.

16 साल के समीर ने खो दीं अपनी दोनों बहनें

रसुवा के रहने वाले 16 वर्षीय समीर तमांग की कहानी इस त्रासदी की भयावहता बताती है. जब भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आई, तब समीर स्कूल पहुंच चुका था. उसकी 13 साल की बहन प्रिया और 7 साल की पार्वती घर पर थीं. समीर के मुताबिक, छोटी बहन के हाथ में चोट लगी थी और वह स्कूल नहीं जा पा रही थी. इसलिए बड़ी बहन भी घर पर रहकर उसकी देखभाल कर रही थी. बाढ़ की खबर मिलने के बाद समीर अपनी जान बचाने के लिए वहां से निकल गया, लेकिन उसके बाद दोनों बहनों से संपर्क नहीं हो सका. बाढ़ में समीर का घर भी बह गया. उसके पिता सूर्या किसी तरह अपनी जान बचाकर निकल गए, जबकि उसकी मां छेसांग काम के सिलसिले में कुवैत में हैं. समीर अब राहत केंद्र में रह रहा है और अपनी बहनों को याद कर रहा है.

रंजू के परिवार के कई सदस्य लापता

रसुवा की एक अन्य छात्रा रंजू तमांग ने भी इस आपदा में अपने परिवार के कई लोगों को खो दिया है. कालिका ग्रामीण नगर पालिका की रहने वाली रंजू ने बाढ़ में अपनी मां, भाई और भतीजे समेत कई रिश्तेदारों को खो दिया. रंजू पहले ही अपने पिता बुद्धिमन को खो चुकी थी. इस बार उसकी मां शुभमाया भी बाढ़ की चपेट में आ गईं. इसके अलावा उसके बड़े भाई सूर्यमन, भतीजे ज्ञान बहादुर और परिवार के कुछ अन्य सदस्य भी लापता बताए गए हैं. रंजू उस समय स्कूल में थी. अचानक बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ने लगा तो स्कूल में अफरा-तफरी मच गई. अपनी जान बचाने के लिए बच्चे जंगल की ओर भागे. रंजू अब राहत केंद्र में रह रही है और अपने परिवार के लौटने की उम्मीद कर रही है.

कई बच्चों का परिवार से टूटा संपर्क

बाढ़ के बाद कई बच्चे अपने माता-पिता और भाई-बहनों से अलग हो गए हैं. शिक्षा और राहत एजेंसियां ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें उनके परिवारों से मिलाने की कोशिश कर रही हैं. नेपाल में 26 अगस्त की बाढ़ के बाद कम से कम 17,000 बच्चे प्रभावित हुए हैं, ऐसा UNICEF ने शुरुआती आकलन में बताया था. संगठन के अनुसार रसुवा, नुवाकोट और धादिंग में बच्चों के घरों, स्कूलों और स्वास्थ्य सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है. UNICEF के अनुसार कई बच्चे अपने प्रियजनों को खो चुके हैं और बड़ी संख्या में बच्चों को तत्काल मानवीय सहायता, सुरक्षित जगह, स्वास्थ्य सेवाओं और पढ़ाई जारी रखने के लिए मदद की जरूरत है. बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और परिवार से अलग हुए बच्चों को दोबारा मिलाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

स्कूलों पर भी पड़ा बाढ़ का भारी असर

बाढ़ ने नेपाल की शिक्षा व्यवस्था को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया है. कई स्कूल पूरी तरह तबाह हुए हैं, जबकि कई इमारतों को नुकसान पहुंचा है. UNICEF के अनुसार शुरुआती आकलन में 18 स्कूल पूरी तरह नष्ट और करीब 20 अन्य स्कूल क्षतिग्रस्त पाए गए थे. इससे लगभग 10,000 स्कूली उम्र के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है. ऐसे हालात में बच्चों के लिए अस्थायी पढ़ाई की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गया है. राहत शिविरों में रहने वाले बच्चों को किताबों, स्कूल सामग्री और सुरक्षित शिक्षा स्थल की जरूरत है.

भोटेकोशी और त्रिशूली में आई बाढ़ ने मचाई तबाही

नेपाल सरकार के अनुसार 26 अगस्त की सुबह रसुवा में भोटेकोशी नदी में अचानक तेज बाढ़ आई. यह बाढ़ सीमा क्षेत्र के पास हुए बर्फ और चट्टान के हिमस्खलन तथा ल्हेंदे खोला में पानी के अस्थायी रूप से रुकने के बाद आई. इसके बाद भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के रास्ते में आने वाले इलाकों में बड़े पैमाने पर तबाही हुई. बाढ़ ने घरों के साथ-साथ सड़क, पुल, हाइड्रोपावर परियोजनाओं और दूसरी जरूरी सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचाया. 5 सितंबर तक नेपाल सरकार के मुताबिक राहत, खोज और बचाव अभियान जारी था.

About the author सौरव कुमार

4 सालों से डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं. साल 2022 से एबीपी न्यूज़ से जुड़े हुए हैं. राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय डेस्क की भी जिम्मेदारी संभालते हैं. सेंट्रल यूनिर्वसिटी ऑफ साउथ बिहार से 2022 में पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक की डिग्री हासिल की. राजनीति, चुनाव, सामाजिक विषयों और साहित्य में रुचि है. तथ्यों की गहराई और भाषा की संवेदनशीलता पर जोर देते हैं. राजनीति से जुड़ी खबरों पर लगातार लिख रहे हैं

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